गुवा में टकराव का पटाक्षेप—मजदूरों की बहाली पर बनी ऐतिहासिक सहमति
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल क्षेत्र में बीते दिनों से चल रहा तनाव आखिरकार मंगलवार को समाप्त हुआ, जब त्रिपक्षीय वार्ता ने निर्णायक मोड़ ले लिया। लंबे संघर्ष, धरना, नारेबाजी और आरोप–प्रत्यारोप के बीच यह वार्ता मजदूरों के लिए बड़ी जीत साबित हुई। वार्ता समाप्त होते ही संयुक्त यूनियनों ने आंदोलन को खत्म करने का ऐलान कर दिया और सभी मजदूर वापस अपने-अपने दायित्वों पर लौट गए। उद्योग क्षेत्र, जो कई दिनों से ठहराव की कगार पर था, अब फिर से सामान्य संचालन की ओर बढ़ने लगा है।

वार्ता में आमने–सामने हुए यूनियन और प्रबंधन। मजदूरों की ‘बहाली’ बनी सबसे बड़ा मुद्दा
बीते दिनों की अनिश्चितता के बाद मंगलवार की बैठक दोनों पक्षों के लिए निर्णायक थी। वार्ता में सेल प्रबंधन और संयुक्त यूनियनों के शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद थे। मीटिंग की शुरुआत से ही स्पष्ट था कि मजदूरों की बहाली से जुड़े मुद्दों पर यूनियन झुकने को तैयार नहीं है और प्रबंधन के लिए भी इसे नज़रअंदाज करना आसान नहीं।
वार्ता का केंद्र बिंदु था—
निष्कासित, प्रतीक्षारत और विवादित श्रमिकों की पुनर्बहाली।
लंबे वाद-विवाद के बाद अंततः सेल प्रबंधन को समझौते पर सहमत होना पड़ा।
बहाली पर बनी ठोस टाइमलाइन। एक सप्ताह में 18 मजदूर, पाँच महीने में कुल 138 की वापसी
यूनियनों की सबसे बड़ी मांग को स्वीकार करते हुए सेल प्रबंधन ने औपचारिक घोषणा की:
- एक सप्ताह के भीतर 18 मजदूरों की बहाली
- अगले तीन महीनों में 70 और मजदूर
- पाँच महीने के भीतर कुल 50 अतिरिक्त मजदूरों की पुनर्बहाली
इस प्रकार कुल 138 मजदूरों की बहाली पर मुहर लगी। यह निर्णय यूनियन के लिए ऐतिहासिक जीत माना जा रहा है, क्योंकि बहाली का मुद्दा वर्षों से संघर्ष और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बना हुआ था।
यूनियन नेताओं ने कहा कि यह फैसला सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि मजदूरों की गरिमा और अधिकारों की पुनर्स्थापना है।
यूनियनों का दावा—“यह जीत हमारी नहीं, पूरी जनता की जीत है”
आंदोलन समाप्त करते हुए संयुक्त यूनियन के नेताओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि—
“यह जीत सिर्फ यूनियन की नहीं, बल्कि गुवा क्षेत्र के प्रत्येक मजदूर, हर ग्रामीण, मुंडा-मानकी समाज, स्थानीय प्रतिनिधियों और आम जनता की संयुक्त ताकत का परिणाम है। अगर समाज एकजुट न होता तो प्रबंधन झुकता नहीं।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि मजदूरों के हितों के साथ खिलवाड़ हुआ, तो संघर्ष की राह फिर से खुलेगी।
“हम रोजगार, सुरक्षा और सम्मान—तीनों पर किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।”
आंदोलन पर विराम से उद्योग जगत में राहत। कामकाज वापस पटरी पर
कुछ घंटों तक उत्पादन की रफ्तार पर असर पड़ा था। यूनियनों के धरना–प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों के कारण न सिर्फ कार्यस्थल पर माहौल तनावपूर्ण था, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ रहा था।
त्रिपक्षीय वार्ता के सफल निष्कर्ष ने इस तनाव को खत्म किया।
मजदूरों के काम पर लौटते ही—
- प्लांट क्षेत्र में गतिविधियाँ तेज हो गईं
- उत्पादन इकाइयों में आवाजाही बढ़ी
- प्रबंधन और यूनियन के बीच संवाद का रास्ता फिर खुल गया
स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि आंदोलन का असर पूरे बाजार और परिवहन पर भी महसूस किया जा रहा था।
लंबे संघर्ष का फल—बहाली पर सहमति
अभी कई मुद्दे बाकी, लेकिन मजदूरों का मनोबल ऊँचा
हालांकि बहाली को लेकर सहमति बन चुकी है, पर कई अन्य मुद्दे—काम की सुरक्षा, वेतन विसंगति, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और संविदा कर्मियों की स्थिति—अब भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।
लेकिन फिलहाल मजदूरों का उत्साह चरम पर है। यूनियन मानती है कि इस जीत ने आने वाले संघर्षों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है।













