यूनियन ने लगाई सीबीआई जांच की मांग, कहा—“सेल प्रबंधन और ठेकेदारों की मिलीभगत से खतरे में मजदूरों की जान”
गुवा संवाददाता।
गुवा स्थित सेल लौह अयस्क खदान में सुरक्षा और श्रम नियमों की खुली अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने आरोप लगाया है कि खदान क्षेत्र में ठेकेदारों के माध्यम से ऐसे मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है, जिनकी कोई औपचारिक जांच या वैध अनुमति नहीं है।

बिना VT परीक्षण और गेट पास के कराया जा रहा कार्य
संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने आरोप लगाया कि सेल खदान में करीब 20 से 22 मजदूरों से काम कराया जा रहा है, जिनका VT परीक्षण, गेट पास जारी या A/B रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं है। इन मजदूरों का मेडिकल परीक्षण तक नहीं हुआ है, जो कंपनी के सुरक्षा प्रावधानों और खनन अधिनियम के सख्त उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि यह पूरा कार्य बंकर क्षेत्र में कराया जा रहा है, जहां सुरक्षा जोखिम सर्वाधिक रहता है। “प्रबंधन की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण मजदूरों की जान हर पल जोखिम में है,” श्री पांडे ने कहा।
पहले भी हो चुकी हैं दुर्घटनाएं, प्रबंधन खामोश
संघ ने बताया कि ऐसे ही असुरक्षित कार्य की वजह से पिछले दो वर्षों में दो गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें मजदूर घायल हुए थे। बावजूद इसके, प्रबंधन ने न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की, न ही ठेकेदारों की जवाबदेही तय की।
रामा पांडे ने आरोप लगाया कि “सेल प्रबंधन और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह पूरा सिस्टम चल रहा है। मजदूरों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं की जा रही। यह सीधा-सीधा श्रम सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है।”

सीबीआई जांच और उच्चस्तरीय कार्रवाई की मांग
संघ ने कहा है कि अब वे इस मामले को लेकर सेल के उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और विजिलेंस विभाग को लिखित शिकायत भेजेंगे। इसके अलावा, यूनियन ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है ताकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
“अगर खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ तो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। हम मजदूरों की सुरक्षा से समझौता नहीं होने देंगे,” — रामा पांडे, केंद्रीय अध्यक्ष, झारखंड मजदूर संघर्ष संघ
मजदूरों में आक्रोश, बोले — ‘हम इंसान हैं, मशीन नहीं’
खदान में कार्यरत मजदूरों ने भी यूनियन के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करने पर मजबूर किया जा रहा है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे सामूहिक हड़ताल पर जा सकते हैं।

प्रबंधन की चुप्पी से बढ़े सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खदान प्रशासन ने अभी तक इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यूनियन का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन को राज्य स्तर तक ले जाएंगे।














