सुरक्षा रणनीति में बड़ा फेरबदल, संसाधनों का होगा टारगेटेड इस्तेमाल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
नई दिल्ली से जारी एक अहम आदेश में भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Left Wing Extremism Division) ने देशभर में नक्सल प्रभावित जिलों के वर्गीकरण में बड़ा बदलाव किया है। 27 मार्च 2026 को जारी इस अधिसूचना में झारखंड समेत कई राज्यों के जिलों को नई श्रेणियों में रखा गया है, जिससे साफ है कि सरकार अब नक्सलवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और ज्यादा केंद्रित और प्रभावी बनाने जा रही है।

तीन कैटेगरी में बांटे गए जिले
केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों को अब तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा है—
LWE Affected Districts (अत्यधिक प्रभावित जिले)
Districts of Concern (चिंता के जिले)
Legacy & Thrust (L&T) Districts (पुराने प्रभाव वाले लेकिन फोकस वाले जिले)
इस नए वर्गीकरण का मकसद सुरक्षा बलों की तैनाती, विकास योजनाओं और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
झारखंड: सिर्फ पश्चिम सिंहभूम ‘अत्यधिक प्रभावित’
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि झारखंड जैसे नक्सल प्रभावित राज्य में अब केवल पश्चिम सिंहभूम को ही “LWE Affected District” यानी अत्यधिक प्रभावित जिले की श्रेणी में रखा गया है। इसके पीछे पोलित ब्यूरो सदस्य एक करोड़ से अधिक के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और उसकी टीम की सारंडा में मौजूदगी है।
👉 पहले जहां कई जिले इस सूची में आते थे, वहीं अब सिर्फ एक जिला बचना यह दर्शाता है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास योजनाओं का असर जमीन पर दिख रहा है।

‘चिंता के जिले’ में सिर्फ कांकेर
“Districts of Concern” श्रेणी में केवल छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला शामिल किया गया है। यह वह क्षेत्र है जहां नक्सल गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है।
Legacy & Thrust जिलों में झारखंड के 3 जिले
इस श्रेणी में उन जिलों को रखा गया है जहां नक्सल प्रभाव कम हुआ है, लेकिन अभी भी निगरानी और विकास की जरूरत है।
👉 झारखंड के जिन तीन जिलों को इसमें शामिल किया गया है—
* बोकारो
* चतरा
* लातेहार
यह संकेत देता है कि इन क्षेत्रों में नक्सलवाद का प्रभाव घटा जरूर है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

(A) अत्यधिक प्रभावित जिले (LWE Affected Districts)
👉 देश में अब सिर्फ 2 जिले ही इस श्रेणी में बचे हैं:
छत्तीसगढ़ – बीजापुर
झारखंड – पश्चिम सिंहभूम
➡️ यह संकेत है कि नक्सलवाद का दायरा काफी सिमट चुका है, लेकिन इन क्षेत्रों में अभी भी स्थिति गंभीर मानी जा रही है।
(B) चिंता के जिले (Districts of Concern)
👉 इस श्रेणी में सिर्फ 1 जिला शामिल है:
छत्तीसगढ़ – कांकेर
➡️ यहां स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही।
(C) Legacy & Thrust (L&T) जिले – कुल 35 जिले
यह वे जिले हैं जहां पहले नक्सल प्रभाव था, लेकिन अब स्थिति काफी हद तक सुधरी है। फिर भी यहां विकास और निगरानी जारी रखी जाएगी।
🟢 आंध्र प्रदेश (1 जिला)
* अल्लूरी सीताराम राजू
🟢 बिहार (4 जिले)
* औरंगाबाद
* गया
* जमुई
* लखीसराय
🟢 छत्तीसगढ़ (11 जिले)
* बस्तर
* नारायणपुर
* दंतेवाड़ा
* कबीरधाम
* खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
* गरियाबंद
* कोंडागांव
* राजनांदगांव
* मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
* सरगुजा
* बलरामपुर
🟢 झारखंड (3 जिले)
* बोकारो
* चतरा
* लातेहार
🟢 मध्य प्रदेश (2 जिले)
* बालाघाट
* मंडला
🟢 महाराष्ट्र (2 जिले)
* गढ़चिरौली
* गोंदिया
🟢 ओडिशा (9 जिले)
* बौध
* सुंदरगढ़ (राउरकेला पुलिस जिला सहित)
* कालाहांडी
* कोरापुट
* मलकानगिरी
* नबरंगपुर
* नुआपाड़ा
* रायगड़ा
* कंधमाल
🟢 तेलंगाना (2 जिले)
* भद्राद्री-कोठागुडेम
* मुलुगु
🟢 पश्चिम बंगाल (1 जिला)
* झाड़ग्राम
देशभर में कुल 38 जिले निगरानी में
02 जिले – अत्यधिक प्रभावित
01 जिला – चिंता श्रेणी
35 जिले – Legacy & Thrust
इस तरह कुल 38 जिले अब केंद्र की विशेष निगरानी और योजनाओं के तहत रहेंगे।
क्या है इस फैसले का मतलब?
इस नए वर्गीकरण से कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे—
✔️ सुरक्षा बलों की तैनाती अब ज्यादा फोकस्ड होगी
✔️ विकास योजनाएं सीधे प्रभावित इलाकों में लागू होंगी
✔️ फंड का इस्तेमाल टारगेटेड और प्रभावी तरीके से होगा
✔️ नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम चरण की लड़ाई तेज होगी

सरकार का संदेश: नक्सलवाद अब अंतिम दौर में
गृह मंत्रालय के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लगातार चल रहे ऑपरेशन, सड़कों का निर्माण, शिक्षा और रोजगार के अवसरों ने नक्सलियों की पकड़ को कमजोर किया है।
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र के लिए क्या मायने?
पश्चिम सिंहभूम जिले का इस सूची में बने रहना यह बताता है कि सारंडा और आसपास के इलाकों में अभी भी सतर्कता जरूरी है। हालांकि, अन्य जिलों के बाहर होने से यह उम्मीद भी जगी है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र भी पूरी तरह नक्सल मुक्त हो सकता है।
रणनीति बदली, लक्ष्य वही—नक्सल मुक्त भारत
केंद्र सरकार की यह नई सूची सिर्फ आंकड़ों का फेरबदल नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट रणनीतिक बदलाव है। अब सरकार नक्सलवाद के खिलाफ चुनिंदा और निर्णायक वार करने की तैयारी में है।
👉 अगर यही रफ्तार बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब झारखंड समेत पूरा देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होगा।













