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निर्भय दा का दर्दनाक अंत: सारंडा से नक्सली बनने की राह, गोलियों से हुई विदाई

On: September 15, 2025 3:55 PM
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सुरक्षा बलों ने किया बड़ा कारनामाः एक करोड़ का इनामी नक्सली सहदेव सोरेन ढेर

रिपोर्ट – शैलेश सिंह

झारखंड के हजारीबाग जिले में सुरक्षा बलों ने एक निर्णायक ऑपरेशन के तहत एक बड़े एनकाउंटर में CPI (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य सहदेव सोरेन उर्फ निर्भय जी को ढेर कर दिया। साथ ही दो अन्य नक्सली – रघुनाथ हेम्ब्रम उर्फ निर्भय जी (25 लाख का इनामी) और बीरसेन गंझू (10 लाख का इनामी) भी मारे गए। CRPF की कोबरा बटालियन को मिली खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई हजारीबाग के टाटीझरिया थाना क्षेत्र के करंडी गांव में अंजाम दी गई।


निर्भय का अतीत: जेल ब्रेक से नक्सली बनने तक

निर्भय दा का नाम माओवादी विचारधारा से जुड़ा रहा। 27 जनवरी 2011 को चाईबासा जेल ब्रेक के दौरान संदीप दा, धीरेन उर्फ उत्तम उर्फ गिरीश दा और रघुनाथ हेंब्रम उर्फ निर्भय जी ने जेल की सेल की खिड़की का रॉड काटकर भागने की सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया था। धीरेन को बाद में ओड़िशा पुलिस ने बरगढ़ से गिरफ्तार किया गया। संदीप को चाईबासा पुलिस ने 2 नवंबर 2017 को जेटिया में फुटबॉल मैच के दौरान पकड़ लिया। निर्भय की पहली गिरफ्तारी मनोहरपुर थाना क्षेत्र से हुई थी, जब वह ग्रामीण के घर सो रहा था। उस समय SP सुधीर कुमार झा और प्रशिक्षु आईपीएस अमोल बेनू कांत हाेमकर की पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था।


विश्वासघात और विद्रोह की शुरुआत

निर्भय की गिरफ्तारी के बाद, नक्सलियों ने अनमोल दा के नेतृत्व में एक जांच कमिटी बनाई थी। जांच में यह खुलासा हुआ कि गोइलकेरा थाना क्षेत्र का नक्सली जोहन, जो निर्भय के साथ था, पुलिस से मिलकर मुखबिरी कर रहा था। इसका परिणाम यह हुआ कि नक्सलियों ने जोहन को पकड़कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद निर्भय, संदीप और धीरेन जेल ब्रेक कर भाग कर सारंडा जंगल में समा गए थे। उन्होंने पत्रकार शुभम संदेश के संपादक से इंटरव्यू में यह ऐलान किया था कि कभी सरेंडर नहीं करेंगे और समुद्र रूपी सारंडा जंगल में अपनी अलग पहचान बनाएंगे।


निर्भय की पहचान: एक आंख की पूतली सफेद और पुराने जख्म का निशान

निर्भय का एक आंख की पूतली सफेद थी, जो उसकी फुल्ली बीमारी का संकेत था। इसके अलावा, उसके एक हाथ की कलाई पर पुराने जख्म का बड़ा निशान साफ नजर आता था। संपादक द्वारा बार-बार समझाया गया कि यह रास्ता मौत का है और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं। लेकिन निर्भय अत्याधुनिक हथियार पकड़े अपने आप को बहुत ताकतवर समझ रहा था। उसने माओवादी संगठन के उद्देश्य के लिए हिंसा और आतंक का मार्ग अपनाया।

निर्भय की फाइल तस्वीर

सारंडा में हुआ हिंसक अतीत

सारंडा के निर्भय ने दर्जनों खून-खराबे की घटनाओं में भाग लिया। इनमें प्रमुख घटनाएं शामिल हैं:

  • बालिबा कांड–29 जवान शहीद।
  • बिटकिलसोय कांड– 17 जवान और चालक शहीद।
  • कलैता कांड– 12 जवान शहीद।
  • बड़ाजामदा ओपी लूट कांड।
  • मनोहरपुर, छोटेनागरा, सोनुआ थाना पर हमले।

इन घटनाओं ने नक्सली आतंक का स्वरूप झारखंड के लोगों के लिए एक भयानक मंजर बना दिया था। ग्रामीण जनता का दर्द इस हिंसा के कारण बढ़ता गया, और सुरक्षा बल लगातार इस चुनौती से जूझते रहे।


संघर्ष और प्रेम की खट्टी-मीठी दास्तां

निर्भय की कहानी में एक विडंबना यह भी थी कि सारंडा की हरियाली और उसके शांति भरे जंगल ने उसे अपनाया, मगर उसका रास्ता गलत था। उसने कभी भी विचार नहीं किया कि यह जंगल उसे नष्ट भी कर सकता है। स्थानीय आदिवासी समाज ने उसे एक समय में अपने बीच समेटा था, लेकिन धीरे-धीरे उसका रास्ता अंधकार की ओर मुड़ता गया। लोगों ने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया, मगर वह कट्टरता के साथ हिंसा का सहारा लेता रहा। वो सारंडा से गिरिडीह चला गया।


ऑपरेशन का निर्णायक पल

खुफिया सूचना के आधार पर CRPF की कोबरा बटालियन ने करंडी गांव में छापेमारी की। दोनों पक्षों के बीच लगभग घंटे भर की कड़ी मुठभेड़ हुई। अंततः तीनों नक्सली अपने हथियारों के साथ ढेर हो गए। सहदेव सोरेन पर सरकार ने 1 करोड़ का इनाम घोषित किया था, जबकि रघुनाथ हेम्ब्रम और बीरसेन गंझू पर क्रमशः 25 लाख और 10 लाख का इनाम था। यह ऑपरेशन न केवल सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि ग्रामीण जनता के लिए भी एक राहत की खबर बनी है।


निष्कर्ष: प्रेम का संदेश और गलत राह का दुखद अंत

निर्भय की कहानी एक त्रासदी की तरह है। यह बताती है कि कैसे एक व्यक्ति, जो कभी समाज का हिस्सा था, गलत संगठनों के साथ जुड़कर समाज के खिलाफ हिंसा करने लगा। सारंडा के जंगलों ने उसे अपनी गोद में लिया था, मगर उसने उस प्रेम को समझने की बजाय घृणा का मार्ग चुना। आज सुरक्षा बलों की गोलियों के बीच उसका अंत हुआ। ग्रामीणों के दिल में आज भी यह सवाल गूंज रहा है – क्या निर्भय के इस रास्ते का कोई सही विकल्प नहीं था?

यह घटना हमें यह सिखाती है कि हिंसा का रास्ता कभी सफलता की ओर नहीं ले जाता, बल्कि विनाश की ओर ले जाता है। आज भी सारंडा की हरियाली में शांति चाहती है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस त्रासदी से सबक लेकर सही रास्ते का चयन करें।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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