10 नक्सलियों के मारे जाने की चर्चा, 50 लाख का इनामी टॉप कमांडर भी चपेट में!
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बहदा–कुमडीह गांव के बीच स्थित दुर्दूरा जंगल गुरुवार, 22 जनवरी की सुबह उस समय गोलियों की गूंज से थर्रा उठा, जब नक्सलियों और सीआरपीएफ–पुलिस की संयुक्त टीम के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। सुबह करीब 6 बजे से शुरू हुई इस मुठभेड़ ने नक्सलियों के उस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया, जिसमें वे सारंडा–कोल्हान के जंगलों को अपना सुरक्षित गढ़ मानते रहे हैं।

सुबह से घंटों चला ऑपरेशन, जंगल बना रणक्षेत्र
ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह दुर्दूरा जंगल से भारी फायरिंग की आवाजें सुनाई देने लगीं। एके-47, इंसास और अन्य ऑटोमैटिक हथियारों से हो रही ताबड़तोड़ गोलीबारी की आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती रहीं। इससे साफ संकेत मिला कि सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की मुठभेड़ चल रही है।
10 नक्सलियों के मारे जाने की चर्चा, इलाके में सनसनी
मुठभेड़ को लेकर सबसे बड़ी और अहम चर्चा यह है कि इस ऑपरेशन में करीब 10 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से जंगल के अंदर लंबे समय तक फायरिंग चली और बाद में नक्सलियों की गतिविधियां पूरी तरह थम गईं, उससे यह माना जा रहा है कि नक्सली संगठन को भारी क्षति पहुंची है।
50 लाख के इनामी नक्सली के मारे जाने की भी चर्चा तेज
सूत्रों की मानें तो मारे गए नक्सलियों में एक कुख्यात टॉप कमांडर भी शामिल हो सकता है, जिस पर करीब 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था। बताया जा रहा है कि यह नक्सली कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में संगठन का अहम रणनीतिकार था और कई बड़ी घटनाओं में उसकी भूमिका रही है। हालांकि, इस संबंध में भी पुलिस और सीआरपीएफ की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

खुफिया इनपुट बना ऑपरेशन की सबसे बड़ी ताकत
इस पूरे ऑपरेशन की नींव मजबूत खुफिया सूचना पर टिकी थी। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि दुर्दूरा जंगल में 20 से 25 की संख्या में हथियारबंद नक्सली लंबे समय से जमा हैं और किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं। इसी सूचना के आधार पर सीआरपीएफ और जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन की योजना बनाई।
सिंहभूम हलचल न्यूज की खबर एक बार फिर सही साबित
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही सिंहभूम हलचल न्यूज ने इस क्षेत्र में नक्सलियों की बड़ी मौजूदगी को लेकर खबर प्रकाशित की थी। उस वक्त इसे सामान्य सूचना माना गया, लेकिन आज की मुठभेड़ ने यह साबित कर दिया कि यह रिपोर्ट न सिर्फ तथ्यपरक थी, बल्कि सुरक्षाबलों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी थी।
चारों ओर से घेराबंदी, नक्सलियों की हर चाल नाकाम
मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों ने जंगल की आड़ लेकर भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने पहले से तय रणनीति के तहत इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। अनुभवी जवानों, बेहतर मैपिंग और स्थानीय भौगोलिक जानकारी ने नक्सलियों की हर कोशिश को नाकाम कर दिया।
सीआरपीएफ–पुलिस का बेहतरीन समन्वय
इस ऑपरेशन में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के बीच जिस स्तर का तालमेल देखने को मिला, वह काबिले-तारीफ है। घने जंगल, संभावित आईईडी खतरे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बावजूद जवानों ने संयम और साहस के साथ मोर्चा संभाले रखा।
नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाने अब इतिहास
दुर्दूरा जंगल की यह मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि अब नक्सलियों के पारंपरिक ठिकाने भी सुरक्षित नहीं बचे हैं। लगातार सर्च ऑपरेशन, कैंपों की मजबूत घेराबंदी और तकनीकी निगरानी ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।
ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा, भय का माहौल टूटा
इस कार्रवाई के बाद आसपास के गांवों में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार उन्हें यह महसूस हो रहा है कि प्रशासन और सुरक्षाबल उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। नक्सलियों का डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।

विकास बनाम नक्सलवाद: पुलिस की दोहरी रणनीति
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि नक्सलवाद का खात्मा सिर्फ मुठभेड़ों से नहीं, बल्कि विकास, संवाद और भरोसे से होगा। यही वजह है कि एक ओर जहां नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।
ऑपरेशन अभी खत्म नहीं, सर्च अभियान जारी
हालांकि मुठभेड़ थम चुकी है, लेकिन इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। संभावना जताई जा रही है कि जंगल से हथियार, विस्फोटक और नक्सली साहित्य बरामद हो सकता है। आधिकारिक पुष्टि के बाद इस ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता माना जाएगा।
स्पष्ट संदेश: अब हिंसा की कोई जगह नहीं
छोटानागरा के दुर्दूरा जंगल में हुई यह मुठभेड़ नक्सलियों के लिए साफ संदेश है—अब हिंसा, डर और बंदूक की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलने वाली। सीआरपीएफ और पुलिस हर चुनौती के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा बलों की जीत, शांति की ओर बढ़ता कोल्हान
10 नक्सलियों के मारे जाने और 50 लाख के इनामी नक्सली की चर्चा ने इस ऑपरेशन को और भी अहम बना दिया है। भले ही आधिकारिक पुष्टि का इंतजार हो, लेकिन इतना तय है कि यह मुठभेड़ कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ साबित होगी।














