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झारखंड की सियासत में भूचाल! कांग्रेस में बगावत, JMM की “ऑपरेशन विस्तार” रणनीति तेज

On: April 3, 2026 11:36 PM
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दीपक बिरुआ के संपर्क में 7 विधायक! असम चुनाव के बाद टूटकर गिर सकती है कांग्रेस—सत्ता समीकरण बदलने के संकेत

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

झारखंड की राजनीति में इन दिनों अंदरूनी हलचल ने सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। महागठबंधन सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस अब अपने ही घर में बगावत की आग से जूझती नजर आ रही है। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबर निकलकर सामने आ रही है, वह न सिर्फ कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि झारखंड की सत्ता की तस्वीर बदलने का संकेत भी दे रही है।

“ऑपरेशन कांग्रेस” पर JMM की नजर, 7 विधायक संपर्क में!

सूत्रों के मुताबिक, हेमन्त सोरेन सरकार के करीबी और कैबिनेट मंत्री दीपक बिरुआ के संपर्क में कांग्रेस के कम से कम 7 विधायक हैं। ये सभी विधायक पार्टी से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का दामन थामने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि असम चुनाव के बाद यह संख्या 12 तक पहुंच सकती है। यानी अगर यह समीकरण सच साबित हुआ तो कांग्रेस के लिए यह सीधा राजनीतिक अस्तित्व का संकट बन सकता है।

महागठबंधन में दरार नहीं, अब “खाई” बन चुकी है दूरी

झामुमो और कांग्रेस के बीच रिश्ते अब सिर्फ औपचारिकता तक सिमटते नजर आ रहे हैं। अंदरखाने की खबरें बताती हैं कि दोनों दलों के बीच समन्वय लगभग खत्म हो चुका है।
राजनीतिक दिग्गजों का मानना है कि—
* कांग्रेस के कई विधायक नेतृत्व से नाराज हैं
* सरकार में उनकी भूमिका सीमित हो गई है
* और वे हेमन्त सोरेन के नेतृत्व को ज्यादा मजबूत विकल्प मान रहे हैं
यही कारण है कि पार्टी के भीतर असंतोष अब खुली बगावत का रूप लेने लगा है।

असम चुनाव बना “टर्निंग पॉइंट”

असम चुनाव को इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि—
*कांग्रेस द्वारा झामुमो को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है
* चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं
* और कांग्रेस में टूट लगभग तय मानी जा रही है
झामुमो इस चुनाव को सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि इसे अपने राष्ट्रीय विस्तार के अवसर के रूप में ले रही है।

दीपक बिरुआ की सक्रियता से बढ़ी हलचल !

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मंत्री दीपक बिरुआ इस पूरे घटनाक्रम के “केंद्रीय खिलाड़ी” बनकर उभरे हैं।
उन्हें हेमन्त सोरेन का “यस मैन” माना जाता है और वे लगातार पार्टी के लिए संख्या बल मजबूत करने में जुटे हैं।
सूत्रों की मानें तो—
* मंत्री बिरुआ लगातार कांग्रेस विधायकों के संपर्क में हैं
* दलबदल कानून को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जा रही है
* और सही समय का इंतजार किया जा रहा है

कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप से सरकार की छवि धूमिल

झामुमो खेमे में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस कोटे के कुछ मंत्रियों की कार्यशैली ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
खासकर—
* ग्रामीण कार्य विभाग
* स्वास्थ्य विभाग
इन विभागों में कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। इसका सीधा असर हेमन्त सोरेन की छवि पर भी पड़ रहा है, जिसे सुधारने के लिए JMM अब “कांग्रेस मुक्त सरकार” की रणनीति पर काम कर रही है।

“कांग्रेस मुक्त झारखंड” की तैयारी?

सूत्रों के अनुसार, झामुमो अब आने वाले समय में अपने दम पर सरकार बनाने की योजना तैयार कर रही है।
रणनीति के मुख्य बिंदु—
* कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में लाना
* दलबदल कानून के तहत सुरक्षित संख्या जुटाना
* और सही समय पर सत्ता समीकरण बदल देना
अगर यह योजना सफल होती है, तो झारखंड में “कांग्रेस मुक्त सरकार” का रास्ता साफ हो सकता है।

हेमन्त-कल्पना की बढ़ती लोकप्रियता से विपक्ष में बेचैनी

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि—
* हेमन्त सोरेन और कल्पना सोरेन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है
* इसका असर झारखंड ही नहीं, बल्कि असम जैसे राज्यों में भी दिख रहा है
* यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस उभरती ताकत को लेकर सतर्क हैं

भाजपा को मिल सकता है फायदा

झामुमो और कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी का सीधा फायदा भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
असम चुनाव में—
* विपक्षी वोट बंटने का खतरा है
* कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है
* और भाजपा को सत्ता तक पहुंचने का रास्ता आसान हो सकता है

मई 2026—झारखंड की राजनीति का निर्णायक महीना!

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मई 2026 झारखंड की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।
जहां एक तरफ—
* कांग्रेस के लिए यह “अग्नि परीक्षा” होगी
वहीं दूसरी ओर—
* झामुमो अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है

सत्ता परिवर्तन की आहट या सिर्फ सियासी शिगूफा?

झारखंड में जिस तरह से अंदरखाने राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में बड़ा सियासी उलटफेर हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि—
* क्या कांग्रेस इस बगावत को रोक पाएगी?
* या फिर झामुमो अपने “मास्टर स्ट्रोक” से सत्ता की नई पटकथा लिखेगी?
फिलहाल, झारखंड की सियासत में एक बात तय है—
तूफान आने वाला है, और उसकी आहट साफ सुनाई दे रही है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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