भ्रष्टाचार नक्सल खदान
अपराध राजनीति खेल समस्या स्वास्थ्य कार्यक्रम शिक्षा दुर्घटना सांस्कृतिक मनोरंजन मौसम कृषि ज्योतिष काम

सरकारी आदेश की खुलेआम अवहेलना!

On: February 17, 2026 5:13 PM
Follow Us:
---Advertisement---

जिला परिषद के अभियंता ने पंचायती राज व्यवस्था को दी चुनौती, कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस का विस्फोटक पत्र, प्रशासनिक तंत्र पर सीधा वार

रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम जिला परिषद में अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने पंचायती राज विभाग झारखंड सरकार के निदेशक को तीखा पत्र लिखते हुए जिला अभियंता पश्चिमी सिंहभूम पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जिला अभियंता ने ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार के आदेश दिनांक 10.06.2024 का उल्लंघन करते हुए बोर्ड के अनुमोदन के बिना अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति कर दी, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि पंचायती राज व्यवस्था की सीधी अवहेलना भी है।

सरकार के आदेश को कूड़ेदान में फेंका गया?

कांग्रेस का आरोप है कि जिला परिषद चाईबासा कार्यालय द्वारा दिनांक 19.01.2026 को जारी पत्रांक 03/जि०परि० के माध्यम से अभियंताओं का कार्यक्षेत्र आवंटन एवं प्रतिनियुक्ति की गई।
यह कार्रवाई ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार के पत्रांक 11-01(DRDA)/2021/2078/ग्रा०वी० दिनांक 10.06.2024 के स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध है।
इस आदेश में साफ लिखा है कि—
* जिला परिषद में कार्यरत नियमित या अस्थायी कर्मियों की सेवा केवल विलयन के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकती।
* पूर्व से प्रतिनियुक्त कर्मियों को हटाने या बनाए रखने का अधिकार केवल उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को है।
* तकनीकी और विशेषज्ञ पदों पर बिना पंचायती राज विभाग की पूर्व अनुमति के अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति नहीं की जा सकती।
इसके बावजूद जिला अभियंता ने इन सभी निर्देशों को ताक पर रख दिया।

पंचायती राज व्यवस्था पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने इसे पंचायती राज व्यवस्था को चुनौती देने वाला कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि—
“ऐसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा अधिकारी अगर सरकार के आदेशों को नहीं मानेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्या भविष्य होगा?”
यह सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी मनमानी कार्रवाई मानी जा रही है।

बिना बोर्ड की मंजूरी कैसे हुआ फैसला?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला परिषद बोर्ड की मंजूरी के बिना अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति कैसे कर दी गई?
क्या जिला अभियंता खुद को सरकार से ऊपर समझने लगा है?
या फिर उसे किसी राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का भरोसा है?
यदि यह फैसला बोर्ड से पारित नहीं हुआ, तो यह जिला परिषद अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

कांग्रेस का आरोप: अफसरशाही बेलगाम

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को “बेलगाम अफसरशाही” का उदाहरण बताया है।
उनका कहना है कि जिला परिषद जैसी संवैधानिक संस्था को दरकिनार कर एक अधिकारी द्वारा मनमानी करना बेहद खतरनाक परंपरा है।
यह सिर्फ अभियंताओं की पोस्टिंग का मामला नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था की आत्मा पर हमला है।

ग्रामीण विकास योजनाओं पर संकट

इस अवैध प्रतिनियुक्ति का सीधा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ रहा है।
* मनरेगा
* सड़क निर्माण
* जलापूर्ति
* भवन निर्माण
* पंचायत स्तर की योजनाएं
इन सभी पर अब प्रशासनिक असमंजस छा गया है।
कौन अधिकारी किस योजना का प्रभारी है—यह तक स्पष्ट नहीं रह गया है।

क्या नियम सिर्फ जनता के लिए हैं?

स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है—
“अगर आम नागरिक नियम तोड़े तो कार्रवाई होती है, लेकिन अधिकारी नियम तोड़े तो चुप्पी क्यों?”
यह दोहरे मापदंड का उदाहरण बनता जा रहा है।

राज्य सरकार की साख दांव पर

यह मामला अब केवल जिला स्तर का नहीं रहा।
ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज विभाग झारखंड सरकार की साख इस विवाद से जुड़ गई है।
यदि इस मामले पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि सरकार के आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

कांग्रेस का अल्टीमेटम

कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि— यदि शीघ्र इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई,
तो जिला कांग्रेस कमिटी आंदोलन करेगी।
सड़क पर उतरकर प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना तय माना जा रहा है।

मंत्री तक पहुंची शिकायत

इस पत्र की प्रतिलिपि माननीय मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार को भी भेजी गई है।
अब सवाल यह है कि मंत्री और विभाग इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
क्या दोषी अधिकारी पर कार्रवाई होगी?
या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?

प्रशासनिक अराजकता की तस्वीर

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिमी सिंहभूम जिला परिषद में प्रशासनिक अराजकता की तस्वीर पेश कर दी है।
एक तरफ सरकार के लिखित आदेश, दूसरी तरफ जिला अभियंता की मनमानी।
यह टकराव आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

जनता पूछ रही है सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पूछ रहे हैं—
* क्या जिला परिषद में अब नियमों का कोई मतलब नहीं?
* क्या अधिकारी मनमर्जी से पोस्टिंग करेंगे?
* क्या पंचायत प्रतिनिधियों की कोई भूमिका नहीं रह गई?
इन सवालों का जवाब प्रशासन को देना ही होगा।

लोकतंत्र बनाम अफसरशाही

यह मामला लोकतंत्र और अफसरशाही के टकराव का प्रतीक बन गया है।
जहां जनप्रतिनिधि और बोर्ड की भूमिका को खत्म कर एक अधिकारी द्वारा फैसले लेना लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है।

अब निगाहें सरकार पर

अब सारी निगाहें झारखंड सरकार और पंचायती राज विभाग पर टिकी हैं।
क्या दोषी जिला अभियंता पर कार्रवाई होगी?
क्या अवैध प्रतिनियुक्ति रद्द की जाएगी?
या फिर कांग्रेस का आरोप सही साबित होगा कि अधिकारी सरकार से ऊपर हो चुके हैं?

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment