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दूषित पानी से कासिया–पेचा गांव में हाहाकार

On: September 24, 2025 5:06 PM
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दूषित पानी से कासिया–पेचा गांव में हाहाकार
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65 ग्रामीण बीमार, सरकार और प्रशासन की लापरवाही उजागर – अधूरी जल आपूर्ति योजना पर उठे सवाल

रिपोर्ट : शैलेश सिंह


बीमारी की चपेट में पूरा गांव

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के कासिया–पेचा गांव में दूषित पानी ने ग्रामीणों की जिंदगी संकट में डाल दी है। लगभग 45 परिवारों के करीब 65 लोग दूषित लाल पानी पीने से बीमार हो गए हैं। गांव में बुखार, सर्दी और खांसी ने महामारी का रूप ले लिया है। महिलाओं से लेकर बच्चे और बुजुर्ग तक इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।

दूषित पानी से कासिया–पेचा गांव में हाहाकार

ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग बिस्तर से उठने की स्थिति में नहीं हैं। इलाज और दवाई की सुविधा गांव में उपलब्ध नहीं है। मजबूर होकर लोग घरेलू उपायों और झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर हैं।


दूषित पानी बना बीमारी का मुख्य कारण

कासिया–पेचा गांव की समस्या नई नहीं है। वर्षों से यहां के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सेल (SAIL) की गुवा खदान से निकलने वाला लाल पानी और मिट्टी कुमसुकवा झरना में मिल रही है। यही झरना पूरे नदी–नाले का स्रोत है, और यही पानी गांव में पीने, नहाने, कपड़ा धोने और खाना बनाने तक हर काम में उपयोग होता है।

पानी का रंग लाल हो चुका है। न केवल इसका स्वाद खराब है, बल्कि इसमें लगातार मिट्टी और रासायनिक तत्व भी घुलते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन और खदान प्रबंधन ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।


सरकार की अधूरी योजना, करोड़ों की बर्बादी

ग्रामीणों का आक्रोश सरकार की पेयजल योजनाओं पर भी है। उनका कहना है कि दोदारी पेयजल आपूर्ति योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। गांव में जल मीनार (पानी टंकी) भी बना दिया गया। लेकिन आज तक उससे एक बूंद भी पानी नहीं मिला।

ग्रामीणों का कहना है कि योजना आधी-अधूरी छोड़ दी गई और ठेकेदारों–अधिकारियों ने केवल कागजों पर काम दिखाकर पैसे हजम कर लिए।

“जब करोड़ों खर्च करने के बावजूद साफ पानी नहीं पहुंचा, तो सरकार किस मुंह से विकास की बातें करती है?” – ग्रामीणों का सवाल


स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर सवाल

आज गांव के 65 लोग बीमार हैं, लेकिन न जिला प्रशासन ने सुध ली, न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि स्वास्थ्य शिविर लगेगा, मेडिकल टीम दवाई बांटेगी और जांच होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

बीमार लोग अस्पताल तक नहीं जा पा रहे क्योंकि गांव से शहर की दूरी ज्यादा है और साधन भी उपलब्ध नहीं।

“बीमारी से मर जाएं तो सरकार को फर्क नहीं पड़ता, चुनाव में वोट लेने जरूर आ जाते हैं।” – एक बुजुर्ग महिला का तंज


सेल गुवा हॉस्पिटल की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में

ग्रामीणों का आरोप है कि सेल की खदानों से ही यह प्रदूषण हो रहा है, फिर भी सेल गुवा हॉस्पिटल कोई कदम नहीं उठा रहा। खदान से मुनाफा कमाने वाले प्रबंधन को यहां के गांवों की सेहत की चिंता नहीं है।

यदि खदान से निकलने वाला गंदा पानी नियंत्रित कर दिया जाता, तो यह स्थिति कभी पैदा नहीं होती। लेकिन आज तक खदान प्रबंधन ने न तो कोई शोधन संयंत्र लगाया, न ही ग्रामीणों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया।


जीवन–मौत की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीण

कासिया–पेचा गांव में हालात इतने गंभीर हैं कि लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, महिलाएं बीमार होकर घरों में पड़ी हैं, पुरुष कामकाज छोड़कर बीमार परिजनों की देखभाल कर रहे हैं।

गांव में हर घर से किसी न किसी सदस्य के बीमार होने की खबर मिल रही है। लोगों को डर है कि यदि जल्द उपाय नहीं किया गया तो यह बीमारी महामारी का रूप ले लेगी और कई जानें जा सकती हैं।


अधूरी योजना और भ्रष्टाचार का आईना

यह मामला केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आईना भी है।

  • करोड़ों की लागत से बनी जल आपूर्ति योजना कागजों तक सीमित
  • जल मीनार खड़ा है लेकिन पानी नहीं
  • खदान से निकलता लाल पानी ग्रामीणों की जान ले रहा
  • प्रशासन और विभाग आंखें मूंदे बैठे

ग्रामीणों का कहना है कि यह सब मिलकर भ्रष्टाचार और लापरवाही की काली कहानी बयां करता है।

 


ग्रामीणों की मांग

बीमार ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से साफ तौर पर कुछ मांगे रखी हैं –

  1. तुरंत गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया जाए और सभी बीमारों का इलाज हो।
  2. सेल गुवा खदान प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जाए और गंदे पानी को रोकने का ठोस उपाय किया जाए।
  3. दोदारी पेयजल योजना की जांच हो और अधूरा काम पूरा कर शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू की जाए।
  4. गांव में स्थायी साफ पानी की व्यवस्था की जाए ताकि लोग फिर से दूषित नदी पर निर्भर न रहें।

सवालों के घेरे में सरकार

  • करोड़ों खर्च होने के बावजूद पानी क्यों नहीं पहुंचा?
  • स्वास्थ्य विभाग बीमार ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?
  • खदान प्रबंधन को अब तक नोटिस क्यों नहीं मिला?
  • दूषित पानी रोकने के लिए पर्यावरण विभाग क्या कर रहा है?

ये सवाल आज पूरे जिले ही नहीं, पूरे राज्य में गूंज रहे हैं।

SINGHBHUMHALCHAL NEWS

सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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