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गैस संकट से ठप हुआ शहर: किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में रसोई बंद, होटल वीरान, रोज़गार पर संकट

On: March 20, 2026 1:55 PM
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इंडेन गैस की आपूर्ति ठप, हजारों लोग प्रभावित — अब चूल्हे की आग से सारंडा जंगल पर मंडरा रहा खतरा

एक सप्ताह से नहीं पहुंचा गैस सिलेंडर, शहर की रफ्तार थमी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

किरीबुरू और मेघाहातुबुरु जैसे औद्योगिक और श्रमिक बहुल शहर इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। इंडेन रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
पिछले एक सप्ताह से गैस सिलेंडर की आपूर्ति ठप है, जिससे घरों की रसोई से लेकर बाजार की दुकानें तक बंद हो गई हैं।
सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ा है जो रोजाना होटल और ढाबों पर निर्भर रहते थे। अब उन्हें न तो सुबह की चाय मिल रही है और न ही दिन का भोजन।

होटल और चाय दुकानों पर ताला, मजदूरों की रोजी छिनी

गैस की कमी ने शहर के छोटे-बड़े होटल, फास्ट फूड सेंटर और चाय दुकानों की रीढ़ तोड़ दी है।
जहां पहले सुबह से रात तक चहल-पहल रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
मेघाहातुबुरु के जेना होटल संचालक नव किशोर जेना बताते हैं:

“पिछले 4-5 दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण होटल पूरी तरह बंद है। हमारे 5 स्टाफ बेरोजगार हो गए हैं। ग्राहक भूखे लौट रहे हैं और हम खुद आर्थिक संकट में फंस गए हैं।”
होटलों में काम करने वाले कारीगर, रसोइए और मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए हैं।
दैनिक आय पर निर्भर इन लोगों के सामने अब परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।

सेल कर्मी और बाहरी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित

किरीबुरू और मेघाहातुबुरु में बड़ी संख्या में सेल कर्मी, ठेका मजदूर और बाहरी कामगार होटल और ढाबों पर निर्भर रहते हैं।
गैस संकट के कारण जब ये होटल बंद हुए, तो इन लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।
कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें अब सूखा खाना या बिस्कुट से काम चलाना पड़ रहा है।
इस संकट ने न सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर असर डाला है, बल्कि काम की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है।

आपूर्ति ठप: कृष्ण गैस एजेंसी ने बताई मजबूरी

मनोहरपुर स्थित कृष्ण गैस एजेंसी के माध्यम से यहां इंडियन गैस की आपूर्ति होती है।
एजेंसी के संचालक महेश जी के अनुसार:
“पिछले एक सप्ताह से गैस उपलब्ध नहीं है, इसलिए किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में सप्लाई नहीं हो पा रही है। यह समस्या कितने दिन चलेगी, कहना मुश्किल है।”
इस बयान ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि समस्या के जल्द समाधान की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है।

घरों की रसोई भी ठंडी, महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान

गैस संकट का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-घर में इसका असर दिख रहा है।
महिलाओं को मजबूरी में फिर से चूल्हे पर लौटना पड़ रहा है।
धुएं और लकड़ी के चूल्हे के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं, खासकर महिलाओं और बच्चों में।

सारंडा जंगल पर संकट: बढ़ सकती है अवैध कटाई

इस गैस संकट का सबसे खतरनाक असर सारंडा जंगल पर पड़ने की आशंका है।
गैस की अनुपलब्धता के कारण लोग तेजी से लकड़ी के चूल्हे की ओर लौट रहे हैं।
इसके चलते जंगलों से जलावन लकड़ी की कटाई बढ़ सकती है।
गरीब ग्रामीण पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ऐसे में वे जंगल से लकड़ी काटकर शहर में बेचने को मजबूर हो सकते हैं।
यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि सारंडा जैसे विश्व प्रसिद्ध जंगल के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा कर सकती है।

जनसमस्या बनी गैस किल्लत, प्रशासन मौन

इतनी बड़ी जनसमस्या के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और जल्द समाधान की मांग तेज हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द गैस आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है —
रोजगार, भोजन और पर्यावरण — तीनों पर एक साथ संकट गहराता जा रहा है।

सरकार से मांग: तुरंत बहाल हो गैस आपूर्ति

शहर के उपभोक्ता, दुकानदार और मजदूर एक सुर में मांग कर रहे हैं कि:
* तत्काल गैस की आपूर्ति बहाल की जाए
* वैकल्पिक व्यवस्था (अतिरिक्त सिलेंडर/आपात आपूर्ति) की जाए
* भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए

एक गैस संकट, तीन बड़े खतरे

यह संकट सिर्फ गैस की कमी नहीं है, बल्कि
👉 रोजगार पर चोट
👉 जनजीवन पर असर
👉 पर्यावरण पर खतरा
तीनों को एक साथ सामने ला रहा है।
अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह समस्या एक बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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