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विकास को मिली नई सांस। ढाई महीने बाद REO को मिला कार्यपालक अभियंता।

On: February 10, 2026 2:44 PM
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प्रशासनिक जड़ता टूटी, विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार

रिपोर्ट: शैलेश सिंह
लगभग ढाई महीने तक ग्रामीण कार्य विभाग (REO) बिना जिला कार्यपालक अभियंता के संचालित होता रहा। इस दौरान जिले में सड़क, पुल-पुलिया, भवन निर्माण और अन्य विकास योजनाएं लगभग ठप हो गई थीं। लेकिन अब जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम द्वारा कार्यपालक अभियंता की नियुक्ति किए जाने से जिले के संवेदकों (ठेकेदारों) और आम जनता में भारी खुशी की लहर देखी जा रही है।
उपायुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार श्री विशाल खलखो, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, चक्रधरपुर को अपने वर्तमान कार्य के अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, चाईबासा का वित्तीय एवं तकनीकी प्रभार सौंपा गया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और अधिसूचित पदाधिकारी के योगदान करने के पश्चात स्वतः समाप्त माना जाएगा।
यह नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उस लंबे ठहराव पर विराम है जिसने पिछले ढाई महीने से जिले के विकास को जकड़ रखा था।

सेवानिवृत्ति के बाद खाली पड़ा था महत्वपूर्ण पद

30 नवंबर 2025 को श्री राधेश्याम माझी, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, चाईबासा के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। इसके बाद न तो स्थायी और न ही अस्थायी रूप से किसी अधिकारी को पूरा प्रभार दिया गया।
परिणाम यह हुआ कि—
नए कार्यों की स्वीकृति रुक गई
पुराने कार्यों का भुगतान अटक गया
तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) नहीं मिल पाई
टेंडर प्रक्रिया ठप हो गई
संवेदक कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण अधर में लटक गया
जिला जैसे पश्चिमी सिंहभूम, जहां पहाड़ी, जंगली और दूरदराज इलाकों में सड़क ही जीवनरेखा है, वहां REO का ठप होना सीधे जनता की परेशानी बन गया।

जनता और संवेदकों में बढ़ता आक्रोश

कार्यपालक अभियंता के नहीं रहने से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए—
ग्रामीण क्षेत्र के लोग
स्थानीय ठेकेदार
मजदूर वर्ग
पंचायत प्रतिनिधि
ग्रामीणों का कहना था कि गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की मरम्मत रुकी हुई है, पुलिया अधूरी पड़ी हैं और बरसात से पहले जिन कार्यों को पूरा होना चाहिए था, वे फाइलों में दबे रह गए।
संवेदकों की स्थिति और भी खराब थी। करोड़ों रुपये के कार्य पूरे होने के बावजूद—
बिल पास नहीं हो पा रहे थे
भुगतान लंबित था
बैंक लोन का ब्याज बढ़ रहा था
मजदूरी का पैसा देने में असमर्थ हो रहे थे
यह स्थिति आर्थिक संकट में बदलने लगी थी।

राजनीतिक और कानूनी दबाव से टूटा प्रशासनिक मौन

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक सह विधायक सोनाराम सिंकु ने प्रधान सचिव और विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर अविलंब कार्यपालक अभियंता की नियुक्ति की मांग की थी।
वहीं सांसद जोबा मांझी ने भी मौखिक रूप से विभागीय स्तर पर दबाव बनाया।
इतना ही नहीं, झारखंड उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता कृष्ण मुरारी ने भी प्रिंसिपल सेक्रेटरी को कानूनी पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि बिना कार्यपालक अभियंता के जिले का विकास कार्य बाधित होना संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर लापरवाही है।
इन तमाम दबावों के बाद आखिरकार जिला प्रशासन ने निर्णय लिया और श्री विशाल खलखो को चाईबासा REO का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

नियुक्ति से किन समस्याओं का होगा समाधान?

अब कार्यपालक अभियंता की नियुक्ति के बाद जिले में कई अटकी हुई समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है—

1. लंबित बिलों का भुगतान शुरू होगा

संवेदकों के महीनों से रुके बिल अब तकनीकी स्वीकृति के बाद पास हो सकेंगे। इससे ठेकेदारों की आर्थिक परेशानी दूर होगी और मजदूरों को भी समय पर मजदूरी मिल सकेगी।

2. नए विकास कार्यों को मिलेगी हरी झंडी

अब ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी भवन और पंचायत स्तरीय योजनाओं को तकनीकी स्वीकृति मिलेगी और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

3. योजनाओं की गुणवत्ता पर निगरानी

कार्यपालक अभियंता के अभाव में कई जगह घटिया निर्माण की शिकायतें आ रही थीं। अब नियमित निरीक्षण से गुणवत्ता में सुधार होगा।

4. प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी

अब फाइलें “अधिकारी नहीं है” कहकर लटकाई नहीं जा सकेंगी। हर कार्य के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहेगा।

5. जनता को मिलेगा सीधा लाभ

ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान होगा, स्कूल-कॉलेज और अस्पताल तक पहुंच बेहतर होगी, और बरसात में रास्ते कटने की समस्या से राहत मिलेगी।

संवेदकों में राहत की सांस

संवेदकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह नियुक्ति बहुत पहले हो जानी चाहिए थी।
एक ठेकेदार ने कहा—
“हमारे लाखों रुपये फंसे हुए थे। बैंक का दबाव था, मजदूर पैसे मांग रहे थे। अब उम्मीद है कि भुगतान प्रक्रिया शुरू होगी और काम दोबारा गति पकड़ेगा।”

जनता में भरोसा लौटा

ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि—
“जब अधिकारी नहीं थे तो कोई सुनने वाला नहीं था। अब काम आगे बढ़ेगा और योजनाएं धरातल पर दिखेंगी।”

चेतावनी: यह केवल अस्थायी व्यवस्था

हालांकि यह नियुक्ति अस्थायी प्रभार के रूप में की गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि अधिसूचित पदाधिकारी के योगदान करते ही यह व्यवस्था स्वतः समाप्त हो जाएगी।
ऐसे में सवाल उठता है कि—
स्थायी कार्यपालक अभियंता की नियुक्ति कब होगी?
क्या फिर से जिला उसी स्थिति में चला जाएगा?
जनता और संवेदकों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द स्थायी कार्यपालक अभियंता की नियुक्ति करे ताकि जिले का विकास दोबारा न रुके।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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