ठेका कर्मियों की समस्याओं पर मंथन, अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी
गुवा संवाददाता।
रविवार देर शाम झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन कार्यालय, गुवा में ठेका कर्मियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने की। इस दौरान ठेका मजदूरों की भारी उपस्थिति रही। पूरे परिसर में “समान काम का समान वेतन दो” और “मजदूर एकता जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे।

ठेका कर्मियों में बढ़ता असंतोष
गुवा लौह अयस्क खानों में काम करने वाले ठेका कर्मी पिछले कई महीनों से प्रबंधन की नीतियों से असंतुष्ट हैं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि सेल (SAIL) प्रबंधन द्वारा ठेका श्रमिकों की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। मजदूरों ने कहा कि अब सिर्फ निवेदन नहीं, बल्कि निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है।
रामा पांडे ने कहा – अब नहीं चलेगा शोषण का खेल
बैठक में बोलते हुए केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने कहा कि ठेका मजदूरों के साथ वर्षों से अन्याय हो रहा है। “मजदूर खून-पसीना बहा रहे हैं, पर अधिकार से वंचित हैं। अब अगर प्रबंधन ने हमारी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन की राह पर उतरना ही होगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यूनियन अब शांत नहीं बैठेगी — “जब तक ठेका मजदूरों को उनका हक़ नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”
मुख्य मांगें – समान काम का समान वेतन से लेकर मेडिकल सुविधा तक
बैठक में ठेका कर्मियों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यूनियन ने जिन प्रमुख मांगों को सामने रखा, उनमें शामिल हैं:
- A-B रजिस्टर में हस्ताक्षर की व्यवस्था — ताकि मजदूरों की उपस्थिति और कार्य घंटे का सही रिकॉर्ड रहे।
- समान काम का समान वेतन — ठेका मजदूरों को स्थायी कर्मियों के समान वेतनमान देने की मांग।
- ठेका श्रमिकों के घरों में बिजली मीटर लगाने का विरोध — कहा गया कि यह गरीब मजदूरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
- पेंशन योजना का लागू होना — ताकि वृद्धावस्था में मजदूरों को सुरक्षा मिल सके।
- आवास किराए में कमी — मजदूरों के घरों का किराया बढ़ा दिया गया है, जिसे घटाने की मांग की गई।
- मेडिकल सुविधा में सुधार — कहा गया कि ठेका कर्मियों को स्वास्थ्य लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
- सिविल कार्य से जुड़ी परेशानियां — स्थायी और अस्थायी कर्मियों के आवासों में मूलभूत रख-रखाव का अभाव।
मजदूरों ने कहा – हमें अधिकार चाहिए, दया नहीं
बैठक में शामिल मजदूरों ने खुलकर अपनी बातें रखीं। कई कर्मियों ने कहा कि वे रोज खदानों में जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, पर प्रबंधन उनकी सुरक्षा, वेतन और स्वास्थ्य की कोई गारंटी नहीं देता।
एक कर्मी ने कहा – “हम मशीन नहीं हैं। जब खदान चलती है, तो हमारी मेहनत से चलती है। अगर हमने हाथ रोक लिया तो पूरा उत्पादन ठप पड़ जाएगा।”
मजदूरों की आवाज से बैठक स्थल गूंज उठा। सबका कहना था कि अब ‘धैर्य की सीमा पार हो चुकी है।’
सेल प्रबंधन से जल्द वार्ता की तैयारी
रामा पांडे ने घोषणा की कि जल्द ही यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल सेल प्रबंधन से मुलाकात करेगा और सभी मांगों को लिखित रूप में सौंपेगा।
उन्होंने कहा, “हम बातचीत में विश्वास रखते हैं, लेकिन अगर बात नहीं सुनी गई तो हम सड़क पर उतरेंगे। यूनियन हर हाल में अपने साथियों के अधिकारों के लिए लड़ेगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर प्रबंधन ने एक निश्चित समय सीमा तक कोई ठोस पहल नहीं की, तो ‘गुवा बंद आंदोलन’ की घोषणा की जा सकती है।
मजदूर एकजुट – आंदोलन का माहौल बनता दिखा
बैठक में शामिल यूनियन सदस्यों और ठेका कर्मियों में गजब का जोश देखने को मिला। सबने एक स्वर में कहा कि वे अब किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
मजदूरों ने कहा – “हमने वर्षों तक इंतजार किया। अब लड़ाई सिर्फ मजदूरी की नहीं, सम्मान की है।”
रामा पांडे ने सभा के अंत में सभी से अपील की कि वे संगठित रहें और किसी भी भ्रम या दबाव में न आएं। उन्होंने कहा, “जब तक हम एकजुट रहेंगे, कोई हमारी ताकत नहीं तोड़ सकता।”
यूनियन ने प्रबंधन को दी चेतावनी – आंदोलन तय
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि अगर प्रबंधन ने ठेका कर्मियों की समस्याओं को हल करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया, तो यूनियन धरना, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाएगी।
संघ ने साफ शब्दों में कहा – “हम भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं। यह हक अगर नहीं मिला, तो पूरा गुवा बंद कर देंगे।”
मजदूरों के मुद्दे बने जन-आंदोलन का रूप
गुवा, किरीबुरु और मेघाहातुबुरु क्षेत्र में ठेका श्रमिकों की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
कई मजदूरों को न तो सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं, न ही स्वास्थ्य लाभ।
श्रमिकों का कहना है कि उन्हें EPF, ESI और बोनस जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने ठेका मजदूरों की इन पीड़ाओं को जन-आंदोलन में बदलने की रणनीति बनाई है।
“हमारा पसीना है तो हमारा हक भी होगा” – रामा पांडे
बैठक के अंत में अध्यक्ष रामा पांडे ने भावुक अंदाज में कहा,
“हमारा पसीना इस मिट्टी में गिरता है, तो हमारा हक भी इसी मिट्टी से मिलना चाहिए। अब वक्त आ गया है जब मजदूर अपनी ताकत पहचानें। अगर हमारे साथी एक साथ उठ खड़े हुए, तो कोई हमें रोक नहीं पाएगा।”
उन्होंने कहा कि यूनियन की अगली बैठक में आंदोलन की रणनीति और समय-सीमा दोनों तय की जाएंगी।
सैकड़ों कर्मियों की मौजूदगी से गूंजा यूनियन कार्यालय
बैठक में सैकड़ों की संख्या में ठेका कर्मी उपस्थित रहे। पूरे यूनियन परिसर में जोश, आक्रोश और एकता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला।
मजदूरों ने एक स्वर में “मजदूर एकता जिंदाबाद” और “हमारा हक हमें दो” के नारे लगाए।
सभा के बाद यूनियन पदाधिकारियों ने साफ संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में गुवा में मजदूर आंदोलन का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
















