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“आधार कार्ड में लोकल एड्रेस नहीं? नौकरी से निकाल देंगे?”

On: November 5, 2025 4:11 PM
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मेघाहातुबुरु–किरीबुरु में ठेका मजदूरों पर बढ़ा दबाव, विधायक सोनाराम सिंकु बोले – मजदूरों को डराना बंद करो, नहीं तो कार्रवाई होगी”

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

मेघाहातुबुरु–किरीबुरु सेल क्षेत्र में ठेका मजदूरों के साथ एक बार फिर मनमानी और शोषण का आरोप सामने आया है। प्रबंधन और ठेकेदारों द्वारा “आधार कार्ड में स्थानीय पता” जोड़ने की जबरन शर्त थोपने और ऐसा न करने पर नौकरी से हटाने की धमकी के खिलाफ बुधवार को ठेका श्रमिकों का गुस्सा फूटा।

विधायक कार्यालय, जगन्नाथपुर में दर्जनों मजदूर एकजुट हुए और माधव चंद्र कोड़ा के नेतृत्व में क्षेत्र के विधायक एवं सत्तारूढ़ दल के उप मुख्य सचेतक श्री सोनाराम सिंकु को ज्ञापन सौंपा।


विधायक का कड़ा संदेश — “मजदूरों को धमकाने की हिम्मत मत करना”

ज्ञापन लेने के बाद विधायक श्री सोनाराम सिंकु ने कहा:

“आधार कार्ड राष्ट्रीय पहचान पत्र है, किसी का निवास पहचानने का हथियार नहीं।
मजदूरों को धमकाना बंद करो, नहीं तो सख्त कार्रवाई होगी।”

उन्होंने साफ कहा कि अगर प्रबंधन किसी भी मजदूर को आधार एड्रेस अपडेट के नाम पर हटाने या परेशान करने की कोशिश करता है तो वो सीधे हस्तक्षेप करेंगे।

“ये गरीबों की रोज़ी-रोटी का मामला है। मजदूरों को परेशान करने की अनुमति किसी को नहीं है।”


मजदूरों की पीड़ा — “यह हमारी रोटी पर हमला है”

मजदूरों ने विधायक को बताया:

  • वे किरीबुरु–मेघाहातुबुरु क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे हैं
  • कई लोग किराये पर रहते हैं
  • आधार कार्ड में मूल गांव या जिला का पता है — जो कानूनन मान्य है
  • लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन और ठेकेदार दबाव बना रहे हैं:
    “लोकल एड्रेस अपडेट करो, नहीं तो काम से हटा देंगे”

श्रमिकों ने कहा:

“आधार एड्रेस अपडेट कराना बाध्यकारी नहीं है। हमें बिना कारण धमकाया और परेशान किया जा रहा है। यह रोजी-रोटी छीनने की साजिश है।”


आधार कार्ड कानून का हवाला

मजदूरों ने साफ कहा —
आधार राष्ट्रीय पहचान पत्र है, स्थायी पता प्रमाण नहीं
मानवाधिकार और श्रम कानून किसी को मजबूर नहीं करते कि वह निवास पता बदले।

इस प्रकार का दबाव

  • अवैध
  • श्रम अधिकारों का उल्लंघन
  • और मजदूरों के साथ सीधी ज्यादती है।

मजदूरों को आश्वासन — “तुरंत प्रबंधन से मिलूंगा”

विधायक श्री सोनाराम सिंकु ने कहा:

“मैं सेल प्रबंधन से तुरंत मिलकर इस ग़लत रवैये को बंद करवाऊंगा।
जो मजदूर वर्षों से खून-पसीना बहा रहे हैं, उन्हें डराकर भगाने का प्रयास कतई बर्दाश्त नहीं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार श्रमिक हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार का दमन सहन नहीं होगा।


कौन उपस्थित थे?

  • पूर्व मंत्री माधव चंद्र कोड़ा
  • कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी
  • बड़ी संख्या में ठेका मजदूर
  • क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता

प्रश्न उठता है – किसके इशारे पर मजदूरों को धमकाया जा रहा?

  • क्या ठेकेदार मजदूरों की जगह बाहरी लोगों को लाने की तैयारी में हैं?
  • क्या प्रबंधन स्थानीय श्रमिकों को कमजोर कर ठेका नीति बदलना चाहता है?
  • या फिर यह मजदूर यूनियनों को डराने की रणनीति है?

इन सवालों का जवाब प्रबंधन को देना होगा।


अगर आवाज़ नहीं उठती, तो चुप्पी शोषण बन जाती है

मेघाहातुबुरु–किरीबुरु में मजदूरों की आवाज़ गूंज चुकी है। अब गेंद प्रबंधन और जिला प्रशासन के पाले में है।

विधायक ने साफ कह दिया —

“मजदूरों को नौकरी से हटाया तो आन्दोलन होगा।”


समाप्ति — यह मजदूरों की लड़ाई है… अब सड़कों तक भी जा सकती है

आज ज्ञापन दिया गया है,
कल आंदोलन भी हो सकता है।

यह सिर्फ आधार एड्रेस का मामला नहीं —
यह सम्मान, रोजगार और जीने के अधिकार की लड़ाई है।

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