शादी नहीं, बोझ बना दी हमने परंपरा को!
रिपोर्ट शैलेश सिंह।
कर्ज लेकर की गई महंगी शादी—चमकदार टेंट, डीजे, ढोल-ताशे और 20 गाड़ियों की बारात—यह सब सिर्फ एक दिन की तालियों के लिए होता है। अगले दिन वही व्यक्ति कर्ज़ की किस्तों के नीचे दबा मिलता है।
एक दिन का राजा बनने के लिए ज़िंदगी भर मजदूर बनना क्या समझदारी है?

शेरवानी में राजा, ज़िंदगी में मज़दूर
घोड़े पर बैठना आसान है, कर्ज उतारना मुश्किल!
एक दिन शेरवानी पहनकर घोड़े पर बैठा दूल्हा फोटो में शान दिखाता है, लेकिन उसी फोटो की कीमत वह सालों तक चुकाता है।
नकली शान के पीछे असली परेशानियां छिपी होती हैं—तनाव, झगड़े और टूटा हुआ आत्मविश्वास।
‘लोग क्या कहेंगे’ की बीमारी
लोग नहीं, आपकी ज़िंदगी चलेगी!
शादी आज खुशी नहीं, मुकाबला बन चुकी है।
“उसकी शादी में इतना हुआ था, हमें भी करना पड़ेगा”—यही सोच कर्ज़ की जननी है।
समाज का दबाव आपकी आर्थिक आज़ादी नहीं छीन सकता, अगर आप खुद मना करना सीख लें।
दहेज: संस्कार नहीं, अभिशाप
दहेज नहीं, दानव है ये!
दहेज लेना और देना—दोनों अपराध हैं।
बेटी को बोझ समझने की मानसिकता ने कितने घरों की खुशियां जला दीं, इसका हिसाब कोई नहीं रखता।
सम्मान पैसों से नहीं, सोच से मिलता है।

कर्ज लेकर ‘घी’ पीने की आदत छोड़िए
आज का दिखावा, कल की बर्बादी!
जो पैसा बच्चों की पढ़ाई, घर या भविष्य में लग सकता है, वही पैसा एक दिन की शादी में उड़ा दिया जाता है।
यही कर्ज़ बाद में पारिवारिक कलह, अवसाद और टूटते रिश्तों की वजह बनता है।
सादगी ही असली शान
कम खर्च, ज़्यादा सुख!
सिंपल शादी—कम मेहमान, सीमित खर्च, बिना दिखावा—यही समझदारी है।
सादगी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की पहचान है।
युवाओं से सीधी बात
हिम्मत दिखाओ, दिखावा नहीं!
युवा तय करें कि वे कर्ज़ में डूबी शादी नहीं करेंगे।
मां-बाप पर सामाजिक दबाव नहीं डालेंगे और खुद भी फिजूलखर्ची का विरोध करेंगे।
आज का युवा चाहे तो समाज की दिशा बदल सकता है।

समाज से एक संकल्प
न कर्ज़ वाली बहु, न कर्ज़ वाली बेटी!
आइए, मिलकर संकल्प लें—
न दहेज लेंगे, न देंगे
न कर्ज़ लेकर शादी करेंगे
न किसी को दिखावे के लिए मजबूर करेंगे
असली अमीरी क्या है?
सुकून ही सबसे बड़ा स्टेटस है!
महंगी शादी अमीरी नहीं, सुकून अमीरी है।
जिस घर में कर्ज़ नहीं, वहीं असली खुशहाली है।
शादी को आसान बनाइए,
समाज में जागृति लाइए,
और आने वाली पीढ़ी को कर्ज़ नहीं—सम्मान दीजिए।












