सेल प्रबंधन की नोटिस कार्रवाई नाकाम, बच्चों की नारेबाजी से प्रशासन को लौटना पड़ा खाली हाथ
गुवा संवाददाता।
गुवा सेल प्रबंधन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत नोटिस चिपकाने पहुंचे सेल अधिकारी, गुवा पुलिस एवं केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों को जाटा हाटिंग के विस्थापितों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। विस्थापितों ने सड़क जाम कर बस्ती में प्रशासनिक टीम के प्रवेश को रोक दिया। यह जाम सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला, जिससे इलाके में आवागमन ठप रहा।

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सड़कों पर
विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों के साथ-साथ छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी शामिल रहे। बच्चों ने “बस्ती बचाओ” और “न्याय दो” जैसे नारे लगाकर अपना आक्रोश जताया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन ने प्रशासन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया।
नोटिस चिपकाए बिना लौटी टीम
विस्थापितों की एकजुटता और आक्रामक विरोध को देखते हुए सेल अधिकारी, पुलिस प्रशासन और सीआईएसएफ के जवान बिना नोटिस चिपकाए वापस लौट गए। मौके पर किसी तरह की झड़प की स्थिति नहीं बनी, लेकिन माहौल तनावपूर्ण रहा।
रेल परियोजना विस्तार बना विवाद की जड़
उल्लेखनीय है कि गुवा सेल प्रबंधन जाटा हाटिंग, नानक नगर, डिपासाई, डीवीसी एवं स्टेशन कॉलोनी क्षेत्रों में रेल परियोजना के विस्तार की योजना पर कार्य कर रहा है। इसी के तहत इन बस्तियों को खाली कराने के लिए निष्कासन नोटिस जारी किए गए हैं।
पुनर्वास पर दोहरी बातों का आरोप
सेल प्रबंधन का दावा है कि प्रभावित परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं विस्थापितों का आरोप है कि एक ही मकान में रह रहे चार-चार परिवारों के बदले केवल एक छोटा आवास दिया जा रहा है, जो न तो परिवारों की संख्या के अनुसार है और न ही सम्मानजनक जीवन के योग्य।

सांसद जोबा मांझी का कड़ा रुख
इस मुद्दे पर पश्चिमी सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी ने गुवा सेल प्रबंधन के साथ बैठक कर स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक जाटा हाटिंग के प्रत्येक परिवार को अलग-अलग आवास नहीं दिया जाता, तब तक बस्ती खाली नहीं होगी। सांसद के इस बयान से विस्थापितों का मनोबल और मजबूत हुआ है।
चेतावनी: दोबारा आए तो होगा और उग्र विरोध
विस्थापितों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में बिना समाधान के दोबारा नोटिस चिपकाने या बस्ती में प्रवेश का प्रयास किया गया, तो वे और उग्र आंदोलन करेंगे। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
संघर्ष अभी खत्म नहीं
जाटा हाटिंग में हुआ यह विरोध केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि पुनर्वास और विस्थापन के सवाल पर गहराते असंतोष का संकेत है। अब देखना होगा कि सेल प्रबंधन संवाद और न्यायपूर्ण पुनर्वास का रास्ता चुनता है या फिर टकराव की स्थिति और गंभीर होती है।












