सम्मानित व्यवसायी फहीम को बदनाम करने की साजिश बेनकाब, बड़ाजामदा में केवल श्री राम मेटालिक क्रेशर के पास वैध सीटीओ
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड–उड़ीसा की सीमा पर स्थित लौहांचल क्षेत्र में हाल के दिनों में अवैध लौह अयस्क तस्करी को लेकर फैली चर्चाओं और आरोपों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। नोवामुंडी पुलिस द्वारा रोके गए लौह अयस्क से लदे ट्रेलर के मामले में खनन विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि न तो अयस्क अवैध था और न ही उसका परिवहन।
खनन विभाग के खान निरीक्षक द्वारा दिए गए आधिकारिक प्रतिवेदन में यह साफ कहा गया है कि संबंधित वाहन और उसमें लदा लौह अयस्क पूरी तरह वैध था तथा खनिज का उठाव विधिवत अनुज्ञप्तिधारी इकाई श्री राम मेटालिक से किया गया था। जांच के बाद यह भी सामने आया कि बड़ाजामदा क्षेत्र में संचालित श्री राम मेटालिक क्रेशर के पास आवश्यक सरकारी अनुमतियां और सीटीओ (Consent to Operate) सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह भी चर्चा तेज हो गई है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर समाज के सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यवसायी फहीम की छवि खराब करने के लिए उन्हें माफिया बताकर बदनाम करने की साजिश रची थी।

पुलिस कार्रवाई के बाद शुरू हुई थी चर्चाओं की आंधी
कुछ दिन पहले नोवामुंडी पुलिस द्वारा नियमित वाहन जांच के दौरान लौह अयस्क से लदे एक ट्रेलर को रोका गया था। प्रारंभिक स्तर पर यह आशंका जताई गई कि ट्रेलर में लदा अयस्क अवैध हो सकता है।
जैसे ही यह खबर क्षेत्र में फैली, लौहांचल के प्रमुख खनन क्षेत्र—बड़ाजामदा, नोवामुंडी और उड़ीसा के बड़बिल—में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई जगह इस घटना को बड़े माफिया नेटवर्क से जोड़कर भी प्रस्तुत किया गया।
हालांकि उस समय पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि वाहन को नियमित जांच के तहत रोका गया है और अंतिम निर्णय खनन विभाग की तकनीकी जांच के आधार पर ही लिया जाएगा।
अब जब खनन विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो गई है।
JIMMS पोर्टल पर हुई चालान की तकनीकी जांच
खनन विभाग ने मामले की जांच झारखंड सरकार के JIMMS (Jharkhand Integrated Mines and Minerals Management System) पोर्टल के माध्यम से की।
जांच के दौरान वाहन संख्या JH02BV-6118 से संबंधित परिवहन चालान क्रम संख्या F22602393/5 की पुष्टि की गई।
जांच में निम्न तथ्य सामने आए:
* परिवहन चालान क्रम संख्या F22602393/5 विधिवत जारी किया गया था
* वाहन संख्या JH02BV-6118 उसी चालान के अंतर्गत पंजीकृत था
* लौह अयस्क का उठाव अनुज्ञप्तिधारी इकाई श्री राम मेटालिक से किया गया था
* खनिज का परिवहन खनन नियमावली के अनुरूप किया जा रहा था
इस प्रकार जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि अयस्क और परिवहन दस्तावेज दोनों वैध हैं।
खनन विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट टिप्पणी
खनन विभाग के खान निरीक्षक द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में साफ शब्दों में उल्लेख किया गया है:
“वाहन संख्या JH02BV-6118 से संबंधित परिवहन चालान क्रम संख्या F22602393/5 की जांच JIMMS पोर्टल पर की गई। चालान सही पाया गया है तथा खनिज का उठाव अनुज्ञप्तिधारी श्री राम मेटालिक से किया गया है। खनिज का उठाव या परिवहन अवैध तरीके से होने का कोई साक्ष्य परीक्षित नहीं होता है। अतः खनन नियमावली के तहत कार्रवाई अपेक्षित नहीं है।”
इस स्पष्ट टिप्पणी के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि मामला अवैध खनन या तस्करी का नहीं था।

बड़ाजामदा में केवल श्री राम मेटालिक क्रेशर के पास वैध सीटीओ
जांच के दौरान बड़ाजामदा क्षेत्र में संचालित क्रेशर इकाइयों के दस्तावेजों की भी समीक्षा की गई।
खनन और संबंधित विभागों की जांच में यह तथ्य सामने आया कि बड़ाजामदा क्षेत्र में केवल श्री राम मेटालिक क्रेशर के पास ही सीटीओ (Consent to Operate) समेत सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि:
* क्रेशर के पास प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित वैध अनुमति है
* संचालन से जुड़े सभी सरकारी कागजात मौजूद हैं
* खनिज प्रसंस्करण और परिवहन नियमानुसार किया जा रहा है
इस रिपोर्ट के बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि जिस क्रेशर इकाई पर सवाल उठाए जा रहे थे, वह वास्तव में वैध रूप से संचालित हो रही है।
फहीम को बदनाम करने की साजिश उजागर
पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि कुछ लोगों ने समाज के प्रतिष्ठित व्यवसायी फहीम का नाम उछालकर उन्हें माफिया बताने की कोशिश की।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में फहीम, राजा साहू, नन्हे कुरैशी और प्रेम जी जैसे नामों को जोड़कर यह प्रचारित किया गया कि ये लोग अवैध खनन और तस्करी में शामिल हैं।
लेकिन खनन विभाग की जांच में ऐसा कोई भी प्रमाण सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि ये लोग अवैध गतिविधियों में शामिल थे।
स्थानीय स्तर पर कई लोगों का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसके तहत प्रतिष्ठित व्यवसायियों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
वैध कारोबारियों की छवि को लगा आघात
इस पूरे घटनाक्रम के कारण लौहांचल क्षेत्र में खनिज से जुड़े वैध कारोबार करने वाले कई व्यवसायियों की छवि को भी नुकसान पहुंचा।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बिना जांच के किसी को माफिया कहना या आरोप लगाना न केवल गलत है बल्कि इससे क्षेत्र के व्यावसायिक माहौल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उनका कहना है कि खनिज परिवहन और व्यापार पहले से ही कड़े नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत होता है। ऐसे में बिना प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
पुलिस और खनन विभाग की समन्वित प्रक्रिया
इस मामले ने यह भी दिखाया कि पुलिस और खनन विभाग किस तरह समन्वय के साथ कार्य करते हैं।
पुलिस ने नियमित जांच के दौरान वाहन को रोका और उसके दस्तावेजों को तकनीकी जांच के लिए खनन विभाग को भेज दिया।
इसके बाद खनन विभाग ने JIMMS पोर्टल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच की और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस समन्वित प्रक्रिया के कारण ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकी।
लौहांचल क्षेत्र में निगरानी जारी
बड़ाजामदा, नोवामुंडी और उड़ीसा के बड़बिल क्षेत्र को लौहांचल कहा जाता है, जहां बड़ी मात्रा में लौह अयस्क का खनन और परिवहन होता है।
प्रशासन का कहना है कि इस क्षेत्र में खनिज परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
यदि कहीं भी अवैध खनन या परिवहन की शिकायत मिलती है तो तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाती है।
लेकिन अधिकारियों ने यह भी कहा है कि वैध कारोबार करने वालों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
अफवाहों से बचने की अपील
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी घटना को लेकर बिना पुष्टि के अफवाहें न फैलाएं।
खनन से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय तकनीकी जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाता है।
इसलिए किसी भी व्यक्ति या संस्था के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों का सामने आना आवश्यक है।
जांच के बाद साफ हुआ पूरा सच
खनन विभाग की रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो गई है। जांच में यह सामने आया कि:
* जब्त ट्रेलर का परिवहन चालान वैध था
* लौह अयस्क का उठाव अनुज्ञप्तिधारी इकाई से किया गया था
* परिवहन खनन नियमावली के अनुरूप था
* श्री राम मेटालिक क्रेशर के सभी दस्तावेज सही पाए गए
* बड़ाजामदा क्षेत्र में सीटीओ सहित वैध संचालन करने वाली प्रमुख इकाई यही है
इन तथ्यों के सामने आने के बाद यह माना जा रहा है कि मामला अवैध खनन का नहीं बल्कि नियमित जांच के दौरान उत्पन्न हुई एक स्थिति का था।
निष्कर्ष: सच सामने आया, अफवाहों का अंत
नोवामुंडी पुलिस द्वारा रोके गए लौह अयस्क से लदे ट्रेलर के मामले में खनन विभाग की जांच रिपोर्ट ने पूरे विवाद को समाप्त कर दिया है।
जांच में न केवल अयस्क और चालान वैध पाए गए, बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया कि जिन लोगों को इस मामले में माफिया बताकर प्रचारित किया जा रहा था, उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
इसके साथ ही समाज के सम्मानित व्यवसायी फहीम को बदनाम करने की साजिश भी अब उजागर हो चुकी है।
अब उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति या संस्था के बारे में आरोप लगाने से पहले तथ्यों और आधिकारिक जांच का इंतजार किया जाएगा, ताकि लौहांचल क्षेत्र में वैध कारोबार और सामाजिक विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकें।













