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सिविल कोर्ट शिफ्टिंग का जोरदार विरोध

On: September 20, 2025 3:37 PM
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“यह सरायकेला की अस्मिता बचाने की लड़ाई है, किसी भी कीमत पर कोर्ट का शिफ्टिंग स्वीकार नहीं होगा” – मनोज कुमार चौधरी

रिपोर्ट : शैलेश सिंह


मनोज कुमार चौधरी का ऐलान

सरायकेला नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और सक्रिय समाजसेवी मनोज कुमार चौधरी ने सिविल कोर्ट शिफ्टिंग के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ कोर्ट को इधर-उधर करने का मामला नहीं, बल्कि सरायकेला की अस्मिता और पहचान से सीधा खिलवाड़ है।

“यहां के अधिवक्ता, स्टांप वेंडर, टाइपिस्ट, मोहरी, स्टेशनरी विक्रेता, जेरॉक्स संचालक, चाय-पान और होटल व्यवसायी – कुल मिलाकर लगभग 500 परिवारों की रोजी-रोटी सिविल कोर्ट से जुड़ी हुई है। कोर्ट शिफ्टिंग उनके जीवन पर सीधा हमला है।”


सरायकेला का गौरवशाली इतिहास

चौधरी ने कहा कि सरायकेला जिला मुख्यालय का अतीत बेहद गौरवशाली रहा है।

  • राजा-रजवाड़ों द्वारा बसाया गया यह नगर अपनी संस्कृति और उत्कृष्ट परंपराओं के लिए जाना जाता है।
  • यहां की विश्वप्रसिद्ध छऊ कला ने भारत को सात राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाए हैं।
  • वर्ष 2001 में जब सरायकेला को जिला का दर्जा मिला, तब लोगों को उम्मीद थी कि यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, लेकिन इसके विपरीत जिले के अस्तित्व को मिटाने की साजिशें की जाती रही हैं।

पहले भी हो चुका है शिफ्टिंग का खेल

पूर्व उपाध्यक्ष ने याद दिलाया कि प्रशासन पहले भी कई दफ्तरों को बिना वजह अन्यत्र शिफ्ट करता रहा है –

  • उपायुक्त कार्यालय
  • जिला परिषद कार्यालय
  • रजिस्ट्री कार्यालय
  • वाहन कार्यालय
  • जिला उपभोक्ता फोरम

“अब जलजमाव का बहाना बनाकर सिविल कोर्ट को हटाने की योजना बनाई जा रही है। जबकि वर्तमान स्थल पर कोर्ट अच्छी तरह से कार्यरत है। पहले ही इस जगह पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, अब फिर नई जगह शिफ्टिंग की बात जनता की गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ है।”


जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

चौधरी ने सवाल उठाया कि यदि वर्तमान भूखंड अनुपयुक्त था तो वहीं पर करोड़ों की लागत से भवन निर्माण क्यों किया गया?

  • उन्होंने मांग की कि इस स्थल का चयन करने वाले अभियंता और तकनीकी अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
  • क्योंकि टैक्स के पैसे से जनता की कमाई को इस तरह से बर्बाद करना गंभीर अपराध है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

चौधरी ने साफ कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने कोर्ट शिफ्टिंग का निर्णय वापस नहीं लिया तो जनता और बार एसोसिएशन के साथ मिलकर और भी बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

उन्होंने 2019 का जिक्र करते हुए कहा कि जब अनुमंडल कार्यालय को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना बनी थी, तब उन्होंने ठंड के मौसम में 5 दिन का आमरण अनशन किया था और अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा था। आज अनुमंडल कार्यालय शहर के बीचोंबीच है, जो उस संघर्ष का परिणाम है।


सरकार को चेतावनी

  • मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अन्य आला अधिकारियों को पत्र भेजकर इस विरोध से अवगत कराया जाएगा।
  • यदि उसके बाद भी सिविल कोर्ट शिफ्टिंग का प्रयास जारी रहा तो जनता के साथ मिलकर किसी भी हद तक जाने की चेतावनी दी गई।

हाल ही में हुआ करोड़ों का खर्च

पूर्व उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि हाल ही में सरकार ने कोर्ट परिसर को जलजमाव से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।

“यदि जमीन ही अनुपयुक्त थी तो उस पर करोड़ों रुपए क्यों खर्च किए गए? अब जब परिसर विकसित हो चुका है और जल निकासी की समस्या भी काफी हद तक दूर हो गई है, तो शिफ्टिंग का कोई औचित्य नहीं बनता।”


“अस्मिता की रक्षा तक संघर्ष जारी रहेगा”

मनोज कुमार चौधरी ने अंत में कहा –
“यह सिर्फ एक भवन का सवाल नहीं है, यह सरायकेला की अस्मिता और सम्मान का सवाल है। हम किसी भी कीमत पर सिविल कोर्ट का शिफ्टिंग स्वीकार नहीं करेंगे। जनता के साथ मिलकर हर मोर्चे पर संघर्ष करेंगे और पीछे नहीं हटेंगे।”

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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