छोटानागरा पंचायत के 10 गांवों में पेयजल संकट, विभागीय लापरवाही पर ग्रामीणों में आक्रोश
रिपोर्ट — शैलेश सिंह
झारखंड का सबसे घना वन क्षेत्र सारंडा… जहां पहाड़, जंगल और जलस्रोतों का प्राकृतिक खजाना है, लेकिन irony यह है कि यहां के गांव आज भी एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। छोटानागरा पंचायत अंतर्गत जोजोपी, बढ़ुइया सहित आसपास के कई गांवों में वर्षों से सोलर चलित जालमीनार खराब पड़ा है और स्थिति इतनी दयनीय है कि लोग चापाकल व झरनों पर निर्भर होकर बीमारियों के खतरे के साथ जीने मजबूर हैं।

खराब जालमीनार से ग्रामीण बेहाल
ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत में स्थापित सोलर जालमीनार कई साल से कार्यरत नहीं है।
- ना मोटर काम कर रहा
- ना टंकी में पानी चढ़ता है
- ना पाइपलाइन में पानी पहुँचता है
गांव के लोग बताते हैं कि गर्मी ही नहीं, बरसात व ठंड—तीनों मौसम में पानी की मार झेलनी पड़ती है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक पानी ढोना पड़ता है।
“अधिकारियों को कई बार शिकायत किया, जांच भी हुआ, आश्वासन भी मिला, पर पानी नहीं मिला” — ग्रामीण
करोड़ों की योजना बनी सफेद हाथी
छोटानागरा पंचायत के लगभग 10 गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए बाईहातू गांव में करोड़ों रुपये खर्च कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) लगाया गया।
लेकिन विडंबना यह है कि—
- बरसात भर प्लांट बंद रहा
- अब चालू हुआ तो कई जगह पाइप फट चुके हैं
- पाइपलाइन से पानी बहता है, पर घरों तक नहीं पहुंचता
योजना से पानी की एक बूंद भी नहीं मिलने से गांवों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण इसे सरकारी पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार का नमूना बता रहे हैं।
स्थानीय प्रतिनिधि भी बेबस?
छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम ने स्वीकार किया कि इलाके में पेयजल संकट गहरा गया है और विभागीय उदासीनता खत्म नहीं हो रही।
वहीं, जाेजोगुटू गांव के मुंडा कानू राम देवगम ने कहा—
“सरकार कहती है हर गांव में पानी, लेकिन यहां लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। विभाग सिर्फ कागजी काम कर रहा है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

बीमारियों का खतरा बढ़ा
ग्रामीण झरनों और खुले जल स्रोतों से पानी ला रहे हैं। इससे डायरिया, टाइफाइड और त्वचा रोग का खतरा बढ़ रहा है।
फिलहाल कोई मेडिकल कैंप या स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम भी नहीं हुआ है।
जिम्मेदारी किसकी?
- जलस्रोत विभाग की उदासीनता
- पंचायत और तकनीकी विभाग की कमी
- सिस्टम की लंबी फाइल और धीमी कार्रवाई
इन सबका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
ग्रामीणों का सवाल
- करोड़ों की योजना का ऑडिट कब होगा?
- निरीक्षण और मेंटेनेंस कौन करेगा?
- अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों ने मांग की है कि—
✔ जालमीनार का तुरंत मरम्मत
✔ WTP पाइपलाइन दुरुस्ती
✔ नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित
✔ तकनीकी टीम की जवाबदेही तय हो
प्रशासन के नाम खुला संदेश
सारंडा के ये गांव विकास के नाम पर सिर्फ फाइलों में चमकते हैं, ज़मीन पर समस्याएं जस की तस।
पानी जीवन है, लेकिन यहां पानी संघर्ष बन गया है।
सरकार और विभाग अगर अब भी नहीं जागे तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

ग्रामीणों की आवाज़
- “पाइप फटा है, पानी घर तक नहीं पहुंचता”
- “दिन-दिन भर पानी ढोते हैं”
- “अधिकारी आते हैं, फोटो लेते हैं, चले जाते हैं”
- “दफ्तर में सिर्फ आश्वासन मिलता है”













