150 की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरसी, हंसागाढ़ा नदी बनी मजबूरी
गुवा संवाददाता।
बिनुवा गांव के 15 से 20 घरों वाले अंकुआ टोले में स्थापित सरकारी सोलर जलमीनार से शुक्रवार देर रात टाइमर की चोरी हो जाने के बाद पूरे टोले में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। इस एक घटना ने करीब 150 ग्रामीणों की जीवनरेखा को ठप कर दिया है। जलमीनार से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों को मजबूरी में हंसागाढ़ा नदी से पानी लाना पड़ रहा है।

आधी रात की वारदात, सुबह खुला राज
ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार की आधी रात को अज्ञात शरारती तत्वों ने जलमीनार से टाइमर खोलकर चोरी कर लिया। शनिवार सुबह जब महिलाएं रोज़ की तरह पानी लेने पहुंचीं, तो जलमीनार से एक बूंद भी पानी नहीं निकला। जांच करने पर पता चला कि टाइमर पूरी तरह गायब है।
ग्रामीण प्रकाश सिद्धू और राजकुमार लोहार ने बताया कि जलमीनार ही टोले की एकमात्र भरोसेमंद पेयजल व्यवस्था थी। इसके बंद होते ही पूरा टोला संकट में आ गया है।
महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
जलमीनार बंद होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है। कई सौ मीटर दूर स्थित नदी से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। गर्मी और दैनिक कामकाज के बीच यह अतिरिक्त बोझ ग्रामीण महिलाओं के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी स्वच्छ नहीं है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
सरकारी योजना पर सवाल
सोलर जलमीनार जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और नियमित पेयजल के लिए लगाई जाती हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में इस तरह की चोरी यह सवाल खड़ा करती है कि
क्या इन योजनाओं की निगरानी सही तरीके से हो रही है?
क्या जिम्मेदार विभाग समय पर रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने इस घटना की जानकारी संबंधित विभाग को देने का निर्णय लिया है। साथ ही मांग की है कि
चोरी हुआ टाइमर अविलंब पुनः लगाया जाए,
जलमीनार को तत्काल चालू किया जाए,
और चोरी में शामिल दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पेयजल संकट बना प्रशासन की अग्निपरीक्षा
अंकुआ टोले में उत्पन्न यह संकट अब प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन गया है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह छोटा सा मामला बड़े जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है।
ग्रामीणों की एक ही मांग है—
“जलमीनार चालू हो, पानी मिले और दोषियों को सजा।”












