यूनियन, जनप्रतिनिधि, मुंडा और मजदूरों की एकजुट हुंकार — “अब नहीं चलेगा अन्याय”
गुवा संवाददाता।
गुवा में बुधवार देर शाम मजदूर आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा। गुवा रामनगर स्थित एसबीआई बैंक के पीछे वर्कर्स क्लब में संयुक्त यूनियन, जनप्रतिनिधि, विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और मजदूर एकजुट होकर सेल प्रबंधन के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए।

मजदूरों की ताकत दिखाने का ऐलान
सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त यूनियनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अब समय आ गया है जब गुवा सेल प्रबंधन को मजदूरों की ताकत दिखाई जाएगी। सभी ने संकल्प लिया कि आने वाले दिनों में आंदोलन को वृहद रूप दिया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर मजदूरों और ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा, ताकि संघर्ष एक जनांदोलन बने।
19 बाहरी लोगों की नियुक्ति रद्द करने की मांग
प्रबंधन के खिलाफ मुख्य आक्रोश 19 बाहरी लोगों की प्रस्तावित बहाली को लेकर फूटा। यूनियनों ने मांग की कि यह नियुक्ति तुरंत रद्द की जाए और स्थानीय युवाओं को रोजगार का अवसर दिया जाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि “जब संसाधन हमारे इलाके के हैं, तो रोजगार भी हमारे लोगों का अधिकार है।”

सफाई कर्मियों का रविवारीकरण और ठेका मजदूरों की छुट्टियाँ बढ़ाने की मांग
संयुक्त यूनियन की प्रमुख मांगों में सफाई कर्मियों का रविवारीकरण (Regularization) शामिल है। इसके अलावा जिन विभागों में रविवारी कार्य बंद है, उन्हें पुनः चालू करने की मांग की गई।
मजदूरों ने ठेका कर्मियों की वार्षिक छुट्टी 5 दिन से बढ़ाकर 10 दिन करने की मांग रखी। रात्रि भत्ता 45 रुपए से बढ़ाकर 90 रुपए, और फाइन्स डिस्पैच माह में मिलने वाली राशि 1000 से 1500 रुपए करने की मांग भी रखी गई।
आवास और कुशलता आधारित अपग्रेडेशन की मांग
यूनियनों ने जोर देकर कहा कि जिन ठेका कर्मियों ने अपने आश्रितों को कार्य सौंप दिया है, उनके आवास उनके आश्रितों के नाम आवंटित किए जाएं।
साथ ही, कुशलता आधारित अपग्रेडेशन — यानी अकुशल से अर्धकुशल और अर्धकुशल से कुशल श्रेणी में शीघ्र प्रोन्नति लागू करने की भी पुरजोर मांग की गई।
मेडिकल, PF, ग्रेचुएटी और पेंशन भुगतान को लेकर नाराजगी
सभा में कई वक्ताओं ने कहा कि आज भी कई ठेका कर्मियों को Retrenchment Benefit, AWA राशि और मेडिकल बुक उपलब्ध नहीं कराई गई है। यूनियनों ने चेतावनी दी कि यदि लंबित मेडिकल बिलों, पेंशन भुगतान, और PF व ग्रेचुएटी का निपटारा शीघ्र नहीं किया गया तो आंदोलन तेज़ होगा।
उन्होंने यह भी मांग रखी कि पेंशन भुगतान 58 वर्ष की आयु से लागू किया जाए और रेफरल चिकित्सा के यात्रा भत्ता का भुगतान तत्काल किया जाए।

गांव-गांव में फैलेगी आंदोलन की लहर
संयुक्त यूनियन ने कहा कि यह सिर्फ गुवा सेल का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के श्रमिकों का संघर्ष है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन गांव-गांव, टोले-टोले तक ले जाया जाएगा। मजदूरों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जाएगा ताकि हर व्यक्ति इस लड़ाई का हिस्सा बने।
“अब निर्णय का वक्त है” — यूनियन नेताओं की चेतावनी
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ यूनियन, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (इंटक), झारखंड मजदूर मोर्चा यूनियन के नेताओं ने एक सुर में कहा कि अगर प्रबंधन ने जल्द मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो मजदूर सड़कों पर उतरकर कार्य बंदी करेंगे।
नेताओं ने कहा —
“यह लड़ाई सिर्फ मजदूरी की नहीं, सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। अब कोई पीछे नहीं हटेगा।”
बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति ने दिखाई एकता
सभा में पांच गांवों के मुंडा-मानकी, जनप्रतिनिधि, और सैकड़ों की संख्या में मजदूरों की भागीदारी रही।
सभा स्थल “वर्कर्स क्लब” मजदूर एकता के नारों से गूंज उठा —
“मजदूर एकता जिंदाबाद!”
“स्थानीयों का हक नहीं छीनने देंगे!”
“सेल प्रबंधन होश में आओ!”
अब आंदोलन तय करेगा दिशा
संयुक्त यूनियन ने स्पष्ट कहा कि यदि आने वाले दिनों में ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो अगली रणनीति “जन आंदोलन” के रूप में होगी।
मजदूर नेताओं का कहना है कि अब समझौते नहीं, सत्ता और सिस्टम से सीधा संवाद होगा — मजदूरों के हक की लड़ाई हर हाल में लड़ी जाएगी।















