रिपोर्ट: शैलेश सिंह
छोटानगरा पंचायत के बाइहातु गांव में करीब 8 से 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी आसन जलापूर्ति योजना आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की शर्मनाक मिसाल बन चुकी है। सरकारी फाइलों में यह योजना भले ही सफल दिखाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत के दसों गांवों में पिछले दो महीनों से एक बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है।

कोइना नदी के किनारे जोजोगुटू गांव के पास बनाया गया इंटेक कुआं मिट्टी से पूरी तरह जाम हो चुका है। नतीजा? पूरे पंचायत क्षेत्र के हज़ारों लोग गंदा, लाल और संक्रमित पानी पीने को मजबूर हैं। यह केवल जल संकट नहीं, बल्कि एक मानवता का संकट बन चुका है।
जनता त्राहिमाम कर रही, अधिकारी और ठेकेदार बेखबर!
ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी और ठेकेदार कुंभकर्णी नींद में डूबे हैं। कोई सुनवाई नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। क्या 10 करोड़ की योजना सिर्फ कागजों पर सफल थी?

आज मजदूरों से इंटेक कुएं की सफाई की शुरुआत तो हुई है, लेकिन यह महज दिखावा लगता है। क्योंकि इस सफाई में कितना वक्त लगेगा या यह कामयाब होगी भी या नहीं — इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है।
शुरुआत से था घोटाले का अड्डा!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह योजना शुरुआत से ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी थी। घटिया निर्माण, बिना निगरानी के ठेकेदारों की मनमानी और सरकारी लापरवाही ने मिलकर इसे एक और सफेद हाथी योजना बना दिया।
सरकार की यह विफलता आज सैकड़ों परिवारों के जीवन पर सीधा हमला बन चुकी है। सवाल यह है — क्या इन लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या 10 करोड़ खर्च करने के बाद भी साफ पानी केवल सपना ही रहेगा?












