झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सीजीएम (खान) आर.पी. सेलवम को दी गरिमामय विदाई
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में रविवार को एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा मेघाहातुबुरू, सेल (SAIL) के मुख्य महाप्रबंधक (खान) श्री आर.पी. सेलवम को भव्य विदाई दी गई। यह विदाई समारोह केवल एक अधिकारी की सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस नेतृत्व के सम्मान का प्रतीक था, जिसने 36 वर्षों तक मेघाहातुबुरु खदान को न सिर्फ उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत किया, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, कर्मचारियों की भलाई और आम जनता के साथ बेहतर संबंधों की मिसाल कायम की।

एक ही खदान से सेवा की शुरुआत और वहीं से सेवानिवृत्ति: इतिहास रचने वाला सफर
झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश कुमार ने स्वागत भाषण में कहा कि यह दिन हम सभी के लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय है। श्री सेलवम लगभग 36 वर्षों से मेघाहातुबुरु खदान से जुड़े रहे। उन्होंने यहीं मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपना करियर शुरू किया और आज मुख्य महाप्रबंधक (खान) के पद से 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेघाहातुबुरु खदान के इतिहास में श्री सेलवम पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने एक ही खदान में नियुक्ति लेकर उसी खदान से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। यह उपलब्धि अपने आप में अनुकरणीय है और उनके समर्पण व निष्ठा को दर्शाती है।

बेहतर मैनेजमेंट की मिसाल बने श्री सेलवम
श्री सेलवम को एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी प्रबंधनकर्ता के रूप में जाना जाता है। उनके कार्यकाल में खदान प्रबंधन में पारदर्शिता, अनुशासन और टीमवर्क को विशेष महत्व दिया गया। उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया कि खदान केवल उत्पादन का केंद्र न होकर कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित और बेहतर जीवनशैली का स्थान बने।
उनकी कार्यशैली में सख्ती के साथ संवेदनशीलता का संतुलन था। वे अधिकारियों और कर्मियों की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से सुनते थे और समाधान निकालने का प्रयास करते थे। यही कारण रहा कि वे केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक अभिभावक के रूप में पहचाने गए।
सेल कर्मियों और आम जनता से मजबूत संबंध
श्री सेलवम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने खदान और स्थानीय समाज के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया। कॉलोनी में रहने वाले कर्मियों, उनके परिवारों और आसपास के ग्रामीणों के साथ उनका व्यवहार अत्यंत सरल, सहज और मानवीय रहा।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, आवासीय सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की। कॉलोनी के घरों के रख-रखाव, पानी-बिजली की सुविधा और सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर उन्होंने हमेशा प्राथमिकता दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि स्थानीय लोगों को रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिले।
यही वजह है कि मेघाहातुबुरु में उन्हें एक अधिकारी नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह देखा जाता है।
अवधेश कुमार का संबोधन: ‘आपकी कमी हर रोज महसूस होगी’
एसोसिएशन अध्यक्ष अवधेश कुमार ने कहा,
“सेलवम साहब बहुत ही सरल, सहज, भावुक और मधुर व्यवहार वाले व्यक्ति हैं। वे सदैव अधिकारियों और कर्मियों के लिए सुविधाएं मुहैया कराने के लिए तत्पर रहते थे। आपकी कमी हमें हर रोज महसूस होगी, लेकिन हम आपकी अगली यात्रा के लिए बहुत उत्साहित हैं और आपको ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि श्री सेलवम का योगदान मेघाहातुबुरु खदान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
पी.एम. सिर्पुरकर का संदेश: सकारात्मक सोच और विनम्रता की पहचान
किरीबुरु खदान के मुख्य महाप्रबंधक (खान) श्री पी.एम. सिर्पुरकर ने एसोसिएशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अल्पकालिक मुलाकातों में ही यह स्पष्ट हो गया कि श्री सेलवम अत्यंत सकारात्मक सोच और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं। उन्होंने काम के साथ-साथ मानवीय संबंधों को भी बराबर महत्व दिया।
उन्होंने कामना की कि श्री सेलवम जहां भी रहें, अपने परिवार के साथ स्वस्थ और सुखी जीवन व्यतीत करें।
सेलवम का भावुक संस्मरण: ‘मेघाहातुबुरु हमेशा दिल में रहेगा’
श्री आर.पी. सेलवम ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने हमेशा प्रयास किया कि मेघाहातुबुरु खदान कैसे और बेहतर बने। उन्होंने कॉलोनी के घरों, स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम किया।
उन्होंने कहा,
“आज का दिन मेरे लिए बहुत भावनात्मक है। मेघाहातुबुरु में बिताए गए 36 वर्षों को पीछे छोड़ते हुए बहुत सी यादें सामने आ रही हैं। यह सफर अद्भुत रहा है। मुझे यहां जो मार्गदर्शन और सहयोग मिला, उसने मुझे पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों रूपों में निखारा।”
उन्होंने कहा कि खट्टी-मीठी यादें, कठिन लक्ष्य हासिल करने की दौड़ और टीम के साथ बिताया गया हर पल हमेशा उनके दिल के करीब रहेगा।

टीमवर्क और अनुशासन की प्रेरणा
महाप्रबंधक (असैनिक) के.बी. थापा ने कहा कि श्री सेलवम ने न केवल अपने कार्य में उत्कृष्टता दिखाई, बल्कि दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहे। उनके द्वारा सिखाए गए अनुशासन और कार्य के प्रति समर्पण को कोई नहीं भूल सकता।
महाप्रबंधक (विद्युत) सुरेश लकड़ा ने कहा कि उनके मार्गदर्शन में कार्य का माहौल सकारात्मक बना रहा। चाहे तनावपूर्ण बैठकें हों या हंसी-मजाक के छोटे पल, हर क्षण अब सुनहरी याद बन चुका है।
मेघाहातुबुरु खदान का सामाजिक चेहरा
श्री सेलवम के कार्यकाल में मेघाहातुबुरु खदान केवल औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने वाला संस्थान बना। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में विशेष भूमिका निभाई। स्थानीय युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिला और खदान प्रबंधन व समाज के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत हुआ।
उनकी नीति थी कि विकास तभी सार्थक है जब उसमें इंसानियत और सहभागिता हो।

भव्य समारोह में बड़ी संख्या में अधिकारी उपस्थित
इस अवसर पर किरीबुरु–मेघाहातुबुरु खदान के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें श्री बनर्जी, डॉ. मधुसूदन दास, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. रायडू, संदीप कुमार भारद्वाज, प्रवीण कुमार, कपिल तोमर, अविनाश शर्मा, दिलीप कुमार, सिताराम महतो, आलोक कुमार वर्मा, रोहित टोपो, अनुपम कुमार, अशोक नागरु, समीर, राजू कुमार, राकेश रोशन, विकास कुमार, अनूप अकेला, ज्ञानेंद्र, आदिल, अफजल, जैकी अहमद, अजय कुमार, सर्वेश कुमार, शशि भूषण, आर.आर. सवाईं, राहुल यादव सहित अनेक अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

सम्मान नहीं, एक युग का समापन
यह विदाई समारोह केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसे युग का समापन था, जिसमें मेघाहातुबुरु खदान ने बेहतर प्रबंधन, मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक सहभागिता की नई पहचान बनाई।
श्री आर.पी. सेलवम का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। उनका जीवन यह संदेश देता है कि नेतृत्व केवल आदेश देने से नहीं, बल्कि लोगों के दिल जीतने से बनता है।
मेघाहातुबुरु खदान को एक मजबूत औद्योगिक इकाई के साथ-साथ एक परिवार जैसा माहौल देने वाले श्री आर.पी. सेलवम की विदाई पूरे क्षेत्र के लिए भावनात्मक क्षण रही। उनका बेहतर मैनेजमेंट, कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और आम जनता से मधुर संबंध उन्हें एक आदर्श अधिकारी के रूप में स्थापित करता है।
आज भले ही वे सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हों, लेकिन मेघाहातुबुरु खदान और वहां के हर कर्मचारी के दिल में उनका नाम हमेशा जीवित रहेगा।














