सैकड़ों स्वयंसेवक गणवेश में शामिल, पुष्पवर्षा कर स्वागत, बौद्धिक कार्यक्रम में शताब्दी वर्ष की रूपरेखा प्रस्तुत
गुवा संवाददाता।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को नोआमुंडी में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक पूरे गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में कदम से कदम मिलाते हुए शामिल हुए। बैंड-बाजे की गूंज और संघगीतों की धुनों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

शिव मंदिर से काली मंदिर तक अनुशासन का प्रदर्शन
पथ संचलन का शुभारंभ नोआमुंडी थाना स्थित शिव मंदिर प्रांगण से हुआ। मार्ग में स्वयंसेवकों का अनुशासित और आकर्षक प्रदर्शन लोगों का ध्यान खींचता रहा। जुलूस बाजार मुख्य चौक से होते हुए डीवीसी काली मंदिर परिसर तक पहुंचा।
दुर्गा वाहिनी ने किया पुष्पवर्षा से स्वागत
रास्ते भर स्थानीय नागरिकों और विशेषकर दुर्गा वाहिनी की बहनों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। बाजार क्षेत्र में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति और उत्साह का संचार दिखा।

सभी मंडलों की उत्साही भागीदारी
इस कार्यक्रम में नोआमुंडी खंड के सभी मंडलों से स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बच्चे, युवा और वयोवृद्ध स्वयंसेवकों की अनुशासित उपस्थिति ने पथ संचलन को और अधिक गरिमामय बना दिया।
काली मंदिर परिसर में हुआ बौद्धिक
पथ संचलन के उपरांत डीवीसी काली मंदिर परिसर में सभा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए संघ के जिला प्रचारक श्री आकाश जी ने संघ के उद्देश्यों, उसकी कार्यपद्धति और विजयादशमी पर्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन और समाज के प्रति दायित्व को पुनः स्मरण करने का अवसर है।

शताब्दी वर्ष की रूपरेखा प्रस्तुत
जिला प्रचारक ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वर्षभर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सेवा कार्य, वृक्षारोपण, संस्कार वर्ग, खेल प्रतियोगिता और सांस्कृतिक आयोजन शामिल होंगे।
गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर शिशु मंदिर नोआमुंडी की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा पालित, श्री नीलेश ठक्कर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अनुशासन और उत्साह का संगम
पूरा कार्यक्रम अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और हर्षोल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। स्वयंसेवकों का यह अनुशासित संचलन न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी भी साबित हुआ।













