जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल, छात्राओं को मिला शिक्षा और अधिकारों का संदेश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) के तत्वावधान में आज दिनांक 24 जनवरी 2026 को उत्क्रमित उच्च विद्यालय प्रोस्पेक्टिंग, किरीबुरू में “राष्ट्रीय बालिका दिवस” के अवसर पर एक भव्य विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर एवं प्राधिकार के सचिव श्री रवि चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

“बाल विवाह नहीं, शिक्षा ही पहचान”
कार्यक्रम में अधिकार मित्र विनीता सांडिल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए नारी शक्ति की महत्ता पर प्रकाश डाला और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सशक्त संदेश दिया।
उन्होंने बालिकाओं को स्पष्ट शब्दों में समझाया—
“पहले पढ़ाई पूरी करो, आत्मनिर्भर बनो, फिर विवाह का निर्णय लो।”
बालिकाओं को यह भी शपथ दिलाई गई कि वे
✔ स्वयं बाल विवाह नहीं करेंगी
✔ अपने आसपास भी बाल विवाह होने नहीं देंगी
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का बुलंद नारा
शिविर में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे के साथ बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया।
छात्राओं को बताया गया कि शिक्षा ही उन्हें
👉 आत्मनिर्भर बनाएगी
👉 अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी
👉 समाज में सम्मान दिलाएगी
विधिक जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
विद्यालय परिवार की सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे—
प्रधानाध्यापक अभीजीत सरकार
सहायक शिक्षक वरुण
मनीता कुदादा
हरजीत कौर
नीशी मूंडू
सभी शिक्षकों ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज की बालिका ही कल की सशक्त नारी बनेगी।

सामाजिक बदलाव की मजबूत पहल
इस कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता का संचार हुआ।
ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को यह समझाया गया कि
कानून उनके साथ है, शिक्षा उनका हथियार है और समाज उनका मंच है।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि
सामाजिक क्रांति की शुरुआत
बाल विवाह के खिलाफ चेतना अभियान
नारी सशक्तिकरण की मजबूत नींव साबित हुआ।
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित यह विधिक जागरूकता शिविर यह संदेश देता है कि—
बेटी बोझ नहीं, शक्ति है
शिक्षा ही उसका अधिकार है
बाल विवाह अपराध है
जागरूकता ही समाधान है
किरीबुरू की धरती से उठा यह संदेश अब समाज के हर कोने तक पहुंचे, यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।














