बरायबुरू वन विश्राम गृह में आयोजित हुआ समापन समारोह — पौधारोपण, प्रभात फेरी और बच्चों में पर्यावरण जागरूकता से गूंजा पूरा क्षेत्र
गुवा संवाददाता।
सारंडा के हरे-भरे अंचल में मंगलवार को वन्य प्राणी सप्ताह का समापन समारोह बरायबुरू वन विश्राम गृह में बड़े ही उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम सारंडा वन प्रमंडल और विजय-II लौह अयस्क खदान (टाटा स्टील लिमिटेड) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण और वन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देते हुए कई शैक्षणिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों की सक्रिय भागीदारी रही।

बच्चों में जगाई वन्य जीवों के संरक्षण की चेतना
टाटा स्टील के सामाजिक दायित्व प्रकोष्ठ (CSR) के सहयोग से सप्ताहभर तक आस-पास के गाँवों के बच्चों के बीच वन्य जीव संरक्षण विषयक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। चित्रकला, निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि “प्रकृति हमारी पहचान है, इसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।”
मुख्य अतिथि ने दिया संदेश — “वन्य जीवों के बिना वन अधूरा है”
समारोह के मुख्य अतिथि रेंज अधिकारी परमानंद रजक ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का अस्तित्व तभी तक है जब तक जंगल और वन्य जीव सुरक्षित हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आस-पास के पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
“हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पर्यावरण सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत तंत्र है — जिसमें हर प्राणी का अपना योगदान है,” — परमानंद रजक, रेंज अफसर।
टाटा स्टील ने किया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
खदान प्रमुख राजीव कुमार ने वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चले इस सप्ताह में टाटा स्टील और वन विभाग ने मिलकर कई सार्थक पहल कीं —
- ग्रामीण क्षेत्रों में पौधारोपण और पौधों का वितरण किया गया।
- बच्चों और ग्रामीणों के बीच प्रभात फेरी निकालकर पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाया गया।
- बच्चों को चाईबासा स्थित नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर (NIC) का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, ताकि वे जैव विविधता और पारिस्थितिकी को करीब से समझ सकें।
राजीव कुमार ने कहा कि टाटा स्टील “सिर्फ स्टील नहीं बनाती, बल्कि सतत विकास (Sustainable Development) की सोच को भी मजबूत करती है।”
“जंगल और जानवर सुरक्षित रहेंगे, तभी मानव सुरक्षित रहेगा”
खान प्रबंधक विवेक कुमार अग्रवाल ने वन्य प्राणी सप्ताह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज वनों की अंधाधुंध कटाई, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने पृथ्वी के जैव संतुलन को खतरे में डाल दिया है। कई दुर्लभ वन्य प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं।
“यह सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि जब तक जंगल और जानवर सुरक्षित रहेंगे, तब तक मानव सभ्यता भी सुरक्षित है।”
“टाटा स्टील अपने संस्थापक जमशेदजी टाटा के इस सिद्धांत पर चलती है — ‘समाज जो हमें देता है, उसे लौटाना हमारा कर्तव्य है।’”
स्थानीय समुदाय ने भी बढ़ाया सहयोग
बरायबुरू के मुंडा जुनु पूर्ति ने ग्रामीणों को अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और वन्य प्राणियों की रक्षा का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि जंगल ही आदिवासी समाज की संस्कृति, आस्था और आजीविका का आधार हैं।
उन्होंने ग्रामीण युवाओं से अपील की कि वे अपने गाँवों को “हरित ग्राम – सुरक्षित ग्राम” बनाने में सहयोग दें।
कार्यक्रम में रही टाटा स्टील की सक्रिय उपस्थिति
इस अवसर पर टाटा स्टील की ओर से अंशुमान बेहरा, सुब्रत महापात्रा, संजय पाठक, अरुण कुमार सिंह, अमूल्य निसंक रे, हर्ष कुमार और रमेन्द्र कुमार सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
सभी ने मिलकर वृक्षारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।
सारंडा के जंगलों में गूंजी हरियाली की प्रतिज्ञा
कार्यक्रम का समापन सामूहिक शपथ ग्रहण के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने कहा —
“हम न वन को नुकसान पहुंचाएंगे, न वन्य जीवों को कष्ट देंगे।
हम हर पेड़ को जीवन का प्रतीक मानेंगे और पर्यावरण की रक्षा करेंगे।”













