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बाल संरक्षण को लेकर पुलिस हुई और संवेदनशील

On: December 27, 2025 5:27 PM
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एसजेपीयू सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत बाल मनोविज्ञान पर विशेष कार्यशाला

रिपोर्ट शैलेश सिंह
बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। जिला समाहरणालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में “बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: बाल मनोविज्ञान और संचार” विषय पर एकदिवसीय सशक्तिकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) को और अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने की दिशा में आयोजित किया गया।

यह कार्यशाला पश्चिमी सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से तथा सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के तकनीकी सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न थानों से आए कुल 26 बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (CWPO) शामिल हुए।


हर थाना बने ‘बाल मित्र थाना’ : एसपी अमित रेनू

कार्यशाला को संबोधित करते हुए पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेनू ने सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक थाना “बाल मित्र थाना” के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने इस दिशा में तीन दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट साझा करने का भी निर्देश दिया।

एसपी ने बताया कि यूनिसेफ, CCR एवं NUSRL के सहयोग से बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों के लिए सात चरणों में संवेदनशीलता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका यह दूसरा चरण है। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि संरक्षण, संवेदना और विश्वास कायम करने की भी है।


बाल मनोविज्ञान की गहराई से समझ

कार्यक्रम की शुरुआत CCR-NUSRL के श्री अनिरुद्ध सरकार के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद श्री नरेंद्र शर्मा ने पूर्व प्रशिक्षणों के अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को विषय की गंभीरता से अवगत कराया।

रांची से आए बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार ने बच्चों के विकासात्मक चरणों, उनके व्यवहारिक पैटर्न तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CICL) की भावनात्मक जरूरतों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने भूमिका-निर्वाह, केस स्टडी और उत्तेजनात्मक अभ्यासों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को किशोर मामलों से मानवीय दृष्टिकोण से निपटने का प्रशिक्षण दिया।


बाल विवाह, लैंगिक शोषण और CCL मामलों पर अभ्यास

कार्यशाला के मुख्य सत्रों में बाल विवाह, लैंगिक शोषण तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से जुड़े मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराए गए। इन सत्रों का संचालन डॉ. राजीव कुमार ने किया, जिसमें वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित उदाहरणों के माध्यम से पुलिस की भूमिका को स्पष्ट किया गया।

इसी क्रम में श्री नरेंद्र शर्मा ने समूह चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों की क्षमता का आकलन किया तथा भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श कराया। साथ ही, केस आधारित प्रक्रियाओं में छूटने वाली कड़ियों को विस्तार से समझाया गया।


पालक देखभाल और आफ्टर-केयर योजनाओं पर जोर

सत्र के दौरान श्री अनिरुद्ध सरकार ने पालक देखभाल (फॉस्टर केयर) तथा आफ्टर-केयर योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि संरक्षण के बाद बच्चों के पुनर्वास और भविष्य की योजना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहम्मद शमीम और पीसीआई इंडिया के सलाहकार श्री हिमांशु जेना ने भी बाल संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए।


बाल संरक्षण में पुलिस की भूमिका निर्णायक

कार्यक्रम का समापन एसजेपीयू नोडल अधिकारी, चाईबासा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में पुलिस की भूमिका अत्यंत निर्णायक है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस को संवेदनशील, जिम्मेदार और बाल-हितैषी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यह सशक्तिकरण कार्यक्रम न केवल बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पश्चिमी सिंहभूम पुलिस बच्चों के प्रति संवेदनशील पुलिसिंग को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है।

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