झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने गुवा सेल प्रबंधन को दी चेतावनी, 2026 को बताया निर्णायक संघर्ष का वर्ष
गुवा संवाददाता।
नववर्ष 2026 की शुरुआत गुवा में मजदूरों की एकजुटता और संघर्ष के संकल्प के साथ हुई। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ की ओर से गुवा रेलवे मार्केट स्थित संघ कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला वर्ष मजदूर अधिकारों की निर्णायक लड़ाई का वर्ष होगा। बैठक में ठेका मजदूरों, सेल के स्थाई कर्मियों और सफाई कर्मियों की बड़ी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि अब मजदूर बिखरे नहीं, बल्कि संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

मजदूर एकता का प्रदर्शन
बैठक में बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि गुवा सेल में कार्यरत श्रमिकों के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आ रही है। वर्षों से उपेक्षा, शोषण और भेदभाव झेल रहे मजदूरों ने एक मंच पर आकर यह स्पष्ट संकेत दिया कि अब चुप्पी टूट चुकी है।
केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे का आह्वान
बैठक की अध्यक्षता करते हुए संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने सभी मजदूरों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं, लेकिन उनके शब्दों में केवल शुभेच्छा नहीं, बल्कि संघर्ष का स्पष्ट संदेश था। उन्होंने कहा कि
“नया साल केवल कैलेंडर बदलने का नहीं, बल्कि मजदूरों के अधिकारों को स्थापित करने का वर्ष होगा। जब तक मजदूर एकजुट नहीं होंगे, तब तक शोषण का यह सिलसिला चलता रहेगा।”
उन्होंने मजदूरों से संगठन को मजबूत करने, डर और भ्रम से बाहर निकलने तथा अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
गुवा सेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
बैठक को संबोधित करते हुए संघ के महामंत्री अंतर्यामी महाकुड़ ने गुवा सेल प्रबंधन पर सीधे और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गुवा सेल में वर्षों से मजदूरों का सुनियोजित शोषण किया जा रहा है।
“यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब यह अन्याय अपनी अंतिम सीमा पर पहुंच चुका है, जिसे अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
महामंत्री ने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन स्थानीय मजदूरों को नजरअंदाज कर बाहर से आए लोगों को बहाली दे रहा है, जिससे गुवा और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं और मजदूरों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
स्थानीय बहाली की अनदेखी पर आक्रोश
महामंत्री अंतर्यामी महाकुड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गुवा सेल क्षेत्र के स्थानीय लोग दशकों से खदान और प्लांट के सहारे अपनी आजीविका चलाते आए हैं, लेकिन आज वही लोग रोजगार से वंचित किए जा रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि
“जब संसाधन, जमीन और श्रम स्थानीय लोगों का है, तो रोजगार पर पहला हक भी स्थानीय मजदूरों का ही क्यों नहीं?”
यह मुद्दा बैठक में मौजूद मजदूरों के बीच सबसे ज्यादा गूंजता नजर आया।

2026: आर-पार की लड़ाई का संकेत
बैठक के दौरान महामंत्री ने साफ चेतावनी दी कि यदि गुवा सेल प्रबंधन ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो वर्ष 2026 में मजदूर आंदोलन तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि
“अब सिर्फ ज्ञापन और आश्वासन का दौर खत्म हो चुका है। जरूरत पड़ी तो मजदूर सड़क से लेकर प्रबंधन के दरवाजे तक संघर्ष करेंगे।”
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में एक ठोस रणनीति तैयार की जाएगी, जिसमें सभी वर्गों के मजदूरों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
मजदूरों की समस्याओं पर खुली चर्चा
बैठक के दौरान मजदूरों ने अपनी-अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। ठेका मजदूरों ने कम वेतन, समय पर भुगतान नहीं होने और सामाजिक सुरक्षा के अभाव की बात उठाई। वहीं सफाई कर्मियों ने असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और स्थायीत्व की मांग को प्रमुखता से रखा।
स्थाई कर्मियों ने भी पदोन्नति, कार्यभार और प्रबंधन की कथित मनमानी पर सवाल उठाए।
एक मंच, एक आवाज
बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि ठेका मजदूर, सफाई कर्मी और स्थाई कर्मचारी—तीनों एक मंच पर, एक आवाज में नजर आए। यह दृश्य खुद में गुवा सेल प्रबंधन के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है।
संघ नेताओं ने कहा कि मजदूरों को तोड़कर शोषण करने की नीति अब नहीं चलेगी।
संघ का स्पष्ट संदेश
बैठक के अंत में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने साफ कर दिया कि:
गुवा सेल में स्थानीय बहाली को प्राथमिकता दी जाए
मजदूरों के शोषण पर तत्काल रोक लगे
ठेका मजदूरों और सफाई कर्मियों को सम्मानजनक अधिकार मिलें
अन्यथा मजदूर आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।
नए साल में बदलेगा संघर्ष का स्वर
नववर्ष 2026 की यह बैठक केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाले बड़े संघर्ष का संकेत मानी जा रही है। मजदूरों की बढ़ती एकजुटता ने यह साफ कर दिया है कि गुवा में अब हालात बदलने वाले हैं—या तो मजदूरों को उनका हक मिलेगा, या संघर्ष और तेज होगा।














