सारंडा के जंगल से राउरकेला तक—एक लड़की, कई बयान और गहराता रहस्य
ग्राउंड रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड के अत्यंत नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र से जुड़ा मुगदी होनहागा सरेंडर मामला अब सिर्फ एक साधारण पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और प्रशासनिक विश्वसनीयता का सवाल बनता जा रहा है।

छोटानागरा थाना अंतर्गत होलोंगउली गांव के दोलाईगाड़ा (मसूरीकुदर) टोला की 19 वर्षीय युवती मुगदी होनहागा को ओड़िशा के राउरकेला में नक्सली बताकर आत्मसमर्पण कराने की घटना ने कई चौंकाने वाले विरोधाभास सामने ला दिए हैं।
एक तरफ राउरकेला पुलिस और वीडियो बयान में मुगदी खुद को नक्सली बताती है, तो दूसरी तरफ उसके पिता, बहन, रिश्तेदार और गांव के लोग इसे पूरी तरह से फर्जी कहानी बता रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी सक्रिय हो चुकी है और 4 अप्रैल को सारंडा पहुंचकर ग्रामीणों से पूछताछ कर चुकी है।
क्या है पूरा मामला? घटनाक्रम की टाइमलाइन
मामले को समझने के लिए जरूरी है कि घटनाओं को क्रमवार देखा जाए—
📌 30 मार्च 2026 – सरेंडर की खबर
राउरकेला पुलिस ने मुगदी होनहागा की फोटो और बयान जारी कर उसे “नक्सली” घोषित करते हुए आत्मसमर्पण की पुष्टि की।
📌 नक्सली कनेक्शन का दावा
पुलिस के अनुसार—
*मुगदी का संपर्क कुख्यात नक्सली अनमोल उर्फ सुशांत (मृत) से था
* वह सारंडा क्षेत्र में सक्रिय थी
* कई बैठकों और गतिविधियों में शामिल रही
📌 22 जनवरी 2026 – कुमडीह मुठभेड़
राउरकेला पुलिस का दावा—
* मुगदी इस मुठभेड़ में मौजूद थी
* 17 नक्सली मारे गए थे
* मुगदी फरार हो गई थी
📌 परिवार का पहला बयान
मुगदी के पिता मंगल होनहागा ने साफ कहा—
👉 “मेरी बेटी कभी नक्सली नहीं थी”
📌 वीडियो में मुगदी का कबूलनामा
राउरकेला पुलिस द्वारा जारी वीडियो में—
👉 मुगदी खुद को 1 साल से नक्सली बताती है
📌 अचानक पलटा पिता का बयान
* पिता और मां गांव से गायब
* उसी दिन वीडियो जारी
👉 “मेरी बेटी 2 साल से नक्सली थी”
📌 4 अप्रैल – NIA की एंट्री
* टीम छोटानागरा थाना पहुंची
* मानकी, मुंडा, ग्रामीणों से पूछताछ

सबसे बड़ा विरोधाभास: एक पिता के दो बयान
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
👉 सच कौन बोल रहा है?
👉 पहला बयान या बाद का वीडियो?
पिता मंगल होनहागा का पहला बयान: “मेरी बेटी निर्दोष है”
मंगल होनहागा ने मीडिया के सामने कहा—
“मेरी बेटी कभी नक्सली संगठन से जुड़ी ही नहीं थी। वह घर और अपनी बहन के यहां रहती थी। किसी भी घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं रही।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया—
* गांव में नक्सल गतिविधि के कारण बेटी को उसकी बड़ी बहन के पास भेजा
* और फिर उड़ीसा पुलिस के सामने फर्जी सरेंडर कराया गया
👉 यह बयान पूरे केस की दिशा बदल देता है।
🎥 पुलिस द्वारा जारी वीडियो में पिता का पलटा बयान: दबाव या सच्चाई?
वीडियो में मंगल होनहागा कहते हैं—
“मेरी बेटी दो साल से नक्सली संगठन में थी। जलवा और मुनिराम उसे ले गए थे। हम डर के कारण पहले गलत बयान दे दिए थे।”
अब सवाल उठता है—
क्या पहला बयान झूठ था?
या दूसरा बयान दबाव में दिया गया?
👉 यही इस केस का सबसे बड़ा रहस्य है।
मुगदी का वीडियो बयान: सच्चाई या स्क्रिप्ट?
वीडियो में मुगदी कहती है—
* वह 1 साल से नक्सली संगठन में थी
* जलवा, मुनिराम, सुनीता के साथ घूमती थी
* कई बैठकों में शामिल हुई
* अनमोल दा, गूंगा जैसे नक्सलियों के साथ रही
👉 कुमडीह मुठभेड़ का जिक्र करते हुए—
“हम खाना खा रहे थे, तभी पुलिस आई और फायरिंग शुरू हो गई।”
लेकिन यहीं से कहानी में सबसे बड़ा टकराव शुरू होता है।
गांव और परिवार का दावा: “वो उस दिन गांव में थी”
परिवार और ग्रामीणों का दावा—
👉 “मुगदी उस दिन गांव में थी, मुठभेड़ में नहीं।”

मामी पीती बहान्दा का बयान: “हमारे घर आती-जाती थी”
मारांगपोंगा गांव की निवासी पीती बहान्दा कहती हैं—
“मुगदी कभी नक्सली नहीं थी। वह अक्सर हमारे घर आती थी और कई दिन रहती थी।”
उन्होंने बताया—
* वह सामान्य जीवन जी रही थी
* बाजार जाती थी
* परिवार के साथ रहती थी
👉 “अगर वह नक्सली होती तो ऐसा खुला जीवन संभव नहीं था।”
मामी इस्रान्ति बहान्दा और सुनीता बहान्दा का संयुक्त बयान
दोनों ने कहा—
“मुगदी एक साल से गांव में थी। वह लगातार घर और रिश्तेदारों के यहां आ-जा रही थी।”
👉 उनका दावा साफ है—
“वह संगठन से जुड़ी नहीं थी”

बड़ी बहन रूइवारी बहान्दा का बयान: “मेरे साथ रहती थी”
रूइवारी बहान्दा कहती हैं—
“मुगदी मेरे पास रहती थी। कुछ महीना ईंट भट्ठे में काम करने गई थी, फिर वापस आई थी।”
उन्होंने बड़ा दावा किया—
👉 “कुमडीह मुठभेड़ के समय वह मेरे साथ गांव में थी।”
👉 यह बयान सीधे पुलिस के दावे को चुनौती देता है।
जीजा बाटे बहान्दा का बयान
“वह हमारे घर और अपने माता-पिता के यहां रहती थी। नक्सली संगठन से उसका कोई संबंध नहीं था।”

छोटी बहन जवानी होनहागा का बयान: बहन नक्सली नहीं थी
जवानी ने बताया—
* मुगदी कभी यहां, कभी बहन के यहां रहती थी
* 3 महीने ईंट भट्ठे में काम किया
👉 सबसे अहम बात—
“कुमडीह मुठभेड़ के समय वह गांव में थी।”
👉 साथ ही एक और बड़ा खुलासा—
“3 अप्रैल को सुनील होनहागा मां-बाप को घर से ले गया था।”
NIA की जांच: क्या खुलेंगे बड़े राज?
4 अप्रैल को NIA की टीम—
* छोटानागरा थाना पहुंची
* मानकी, मुंडा, ग्रामीणों से पूछताछ की
* बयान दर्ज किए
👉 लेकिन—
माता-पिता मौजूद नहीं थे
कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं
सबसे बड़ा सवाल: सारंडा में ओड़िशा पुलिस कैसे सक्रिय?
यह मामला सिर्फ एक लड़की का नहीं है, बल्कि—
👉 दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय पर भी सवाल है
* सारंडा चारों तरफ से सुरक्षा बलों से घिरा है
* फिर भी ओड़िशा पुलिस का नेटवर्क सक्रिय
* लोगों को उठाकर ले जाना
* बयान बदलवाना
👉 और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं
👉 यह स्थिति बेहद गंभीर है।
दो संभावनाएं: सच्चाई क्या हो सकती है?
संभावना 1: मुगदी सच में नक्सली थी
* वीडियो बयान सही
* पुलिस का दावा सही
* परिवार डर के कारण इनकार कर रहा
संभावना 2: फर्जी सरेंडर
* रोजगार के नाम पर ले जाया गया
* दबाव में बयान दिलवाया गया
* केस बनाकर सरेंडर दिखाया गया
👉 अगर यह सच है तो यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है।
अपना दृष्टिकोण: यह मामला क्यों खतरनाक है?
यह केस कई स्तर पर खतरनाक है—
1. न्याय व्यवस्था पर सवाल
अगर फर्जी सरेंडर हुआ—
👉 निर्दोष को अपराधी बनाया गया
2. सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता
👉 पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध हो जाती है
3. आदिवासी समाज में भय
👉 “किसी को भी नक्सली बना दिया जाएगा”

सारंडा में चर्चा: “किस पर भरोसा करें?”
गांवों में अब यही चर्चा—
पुलिस?
परिवार?
या वीडियो?
👉 सच अब भी धुंध में है।
सच सामने आना जरूरी है
मुगदी होनहागा मामला सिर्फ एक घटना नहीं—
👉 यह एक परीक्षा है
* जांच एजेंसियों की
* पुलिस की
* और न्याय व्यवस्था की
👉 अगर मुगदी दोषी है—
तो सख्त कार्रवाई हो
👉 अगर निर्दोष है—
तो दोषियों पर कार्रवाई हो
🚨 अंतिम सवाल
👉 क्या मुगदी नक्सली थी?
👉 या एक साजिश का शिकार?
👉 जवाब अब सिर्फ एक एजेंसी दे सकती है—
NIA की निष्पक्ष जांच
(यह मामला अभी जांच के अधीन है। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, यह रिपोर्ट और भी बड़े खुलासे कर सकती है।)














