डे-नाइट फुटबॉल महाकुंभ का शानदार समापन, खेल के मैदान से गूंजा एकता और भाईचारे का संदेश
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू-मेघाहातुबुरु की खेल नगरी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सारंडा की धरती केवल लौह अयस्क ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं की भी खदान है। किरीबुरू-मेघाहातुबुरु फुटबॉल क्लब और सेल, किरीबुरू प्रबंधन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रथम “सारंडा चैंपियंस कप डे-नाइट फुटबॉल प्रतियोगिता” का रोमांचक फाइनल मुकाबला खेल प्रेमियों के लिए लंबे समय तक यादगार रहने वाला बन गया। हजारों दर्शकों की गूंजती तालियों और उत्साह के बीच सिंकु ब्रदर्स ने दमदार प्रदर्शन करते हुए किंग एफसी बोलानी को पेनाल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

45 मिनट तक नहीं टूटा गोल का तिलिस्म
फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। सिंकु ब्रदर्स और किंग एफसी के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे पर लगातार हमले किए, लेकिन दोनों टीमों की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपरों की शानदार मुस्तैदी के कारण निर्धारित समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी।
मैदान में हर मिनट रोमांच बढ़ता गया। दर्शकों की निगाहें हर आक्रमण और हर बचाव पर टिकी थीं। जब निर्धारित समय तक मुकाबला गोलरहित रहा तो निर्णय के लिए पेनाल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया।

पेनाल्टी शूटआउट में सिंकु ब्रदर्स ने दिखाया चैंपियन वाला जज्बा
पेनाल्टी शूटआउट में सिंकु ब्रदर्स के खिलाड़ियों ने असाधारण संयम और आत्मविश्वास का परिचय दिया। टीम ने तीन सफल गोल दागे जबकि किंग एफसी केवल दो गोल ही कर सकी।
जैसे ही निर्णायक पेनाल्टी गोलपोस्ट में समाई, पूरा मैदान “सिंकु ब्रदर्स जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा। खिलाड़ियों ने मैदान में दौड़कर जीत का जश्न मनाया और समर्थकों ने आतिशी उत्साह के साथ अपनी टीम का स्वागत किया।

निखिल एफसी तीसरे और हेवेन्स आर्मी चौथे स्थान पर
प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर निखिल एफसी बड़बिल रही जबकि हेवेन्स आर्मी को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीता।


लड़कियों के प्रदर्शनी मैच ने भी लूटी वाहवाही
फाइनल मुकाबले से पहले आयोजित लड़कियों के प्रदर्शनी मैच ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। व्हाइट स्टार और येलो स्टार के बीच खेले गए इस मुकाबले में व्हाइट स्टार की खिलाड़ी लिजा ने शानदार खेल दिखाते हुए दो गोल दागे।
लिजा के दोनों गोलों की बदौलत व्हाइट स्टार ने येलो स्टार को 2-0 से हराकर जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद दोनों टीमों को सहायक महाप्रबंधक रमेश सिन्हा ने ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।


खेल और खेलभावना के बीच हुआ भव्य शुभारंभ
फाइनल मुकाबले का शुभारंभ क्षेत्र के गणमान्य अतिथियों द्वारा खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया गया।
मुख्य अतिथि महाप्रबंधक शुक्रा हो के साथ विशिष्ट अतिथि महाप्रबंधक नवीन कुमार सोनकुश्रे, महाप्रबंधक मनीष राय, उप महाप्रबंधक कल्याण माझी, सहायक महाप्रबंधक रमेश सिन्हा, संतोष कुमार, जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, अंतरराष्ट्रीय आर्चरी कोच चंद्रशेखर लागुरी, आईएसएल के फुटबॉल हेड कोच जयपाल सिंह मुंडा, पूर्णिया क्रिकेट एकेडमी के कोच रमन मंडल, मुखिया पार्वती कीड़ों, मुखिया लिपि मुंडा, मुखिया प्रफुल्लित ग्लोरिया टोपनो, उप मुखिया सुमन मुंडू, हॉकी अंडर-17 इंडिया के चयनकर्ता जगदीप महाराणा तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष हीरालाल सुंडी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पुरस्कारों की बारिश, खिलाड़ियों का हुआ सम्मान
फाइनल मुकाबले के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि शुक्रा हो ने विजेता सिंकु ब्रदर्स को 70 हजार रुपये नगद एवं ट्रॉफी प्रदान की।
महाप्रबंधक मनीष राय ने उपविजेता किंग एफसी बोलानी को 40 हजार रुपये एवं ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
उप महाप्रबंधक कल्याण माझी ने तीसरे स्थान पर रही निखिल एफसी बड़बिल को 11 हजार रुपये एवं ट्रॉफी प्रदान की, जबकि महाप्रबंधक नवीन कुमार सोनकुश्रे ने चौथे स्थान पर रही हेवेन्स आर्मी को 11 हजार रुपये एवं ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
इन सितारों ने पूरे टूर्नामेंट में बिखेरी चमक
प्रतियोगिता के दौरान कई खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से दर्शकों और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।
व्यक्तिगत पुरस्कार विजेता
* बेस्ट स्कोरर – सलमान (किंग एफसी)
* बेस्ट डिफेंडर – राजेंद्र (क्रेटा एफसी)
* मैन ऑफ द मैच एवं बेस्ट गोलकीपर – बासेत मुर्मू (सिंकु ब्रदर्स)
* मैन ऑफ द टूर्नामेंट – हैप्पी हेंब्रम (सिंकु ब्रदर्स)
इन खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने पूरे टूर्नामेंट को नई ऊंचाई प्रदान की।
फुटबॉल से मजबूत होगा भाईचारा, यही है आयोजन का उद्देश्य
इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी विशेषता केवल फुटबॉल नहीं बल्कि सामाजिक एकता का संदेश रहा।
आयोजकों का मानना है कि खेल ही वह माध्यम है जो गांव, पंचायत, शहर और राज्यों के बीच आपसी दूरी को खत्म कर भाईचारे की नई मिसाल कायम कर सकता है।
आयोजन से जुड़े लोगों ने कहा कि आने वाले वर्षों में इससे भी बड़े स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित करने की योजना है ताकि क्षेत्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल सके।

युवाओं को मैदान की ओर मोड़ने की सार्थक पहल
सारंडा क्षेत्र में बढ़ती सामाजिक चुनौतियों के बीच यह प्रतियोगिता युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का भी माध्यम बनी।
आयोजकों का मानना है कि यदि बच्चे और युवा खेल मैदान से जुड़ेंगे तो वे नशा, अपराध और अन्य गलत गतिविधियों से दूर रहेंगे। खेल उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत और मानसिक रूप से अनुशासित बनाएगा।
यही कारण रहा कि पूरे क्षेत्र के लोगों ने इस प्रतियोगिता को अपना कार्यक्रम मानकर सहयोग दिया।
70 से अधिक युवाओं की मेहनत ने रचा इतिहास
पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता की सफलता के पीछे आयोजन समिति के दर्जनों सदस्यों की अथक मेहनत रही।
समिति के अध्यक्ष हीरालाल सुंडी, महासचिव दीपेन लोहार, सचिव जॉन पूर्ति, गोपी लागुरी, उपाध्यक्ष दाउद कीड़ो, बासु हेस्सा, कोषाध्यक्ष विजय गुप्ता, सुचित उर्फ लाली, आकाश, अजय नाग, जॉनसन, राजेंद्र करूआ, प्रवीण केरकेट्टा, बाबू हेस्सा, सोमा नाग, रौशन कुमार, जगदीप महाराणा, नागेश झा, अमर सिंह सुंडी, कुंदन, सूर्या मोहंती, सूरज सिंह, सुमित बेहरा, अभिनाश बहल, कान्हा मुखी, साहिल केराई, राजू कुंटिया, संतोष सिंह विश्वकर्मा, अनमोल बोदरा, लक्ष्मण मुंडू, शुभम सुम्ब्रई, मनोज किंडो, संजय तिग्गा सहित 70 से अधिक युवाओं ने दिन-रात मेहनत कर आयोजन को सफल बनाया।

सारंडा के खेल इतिहास में जुड़ा नया अध्याय
सारंडा चैंपियंस कप का पहला संस्करण केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र की खेल संस्कृति, सामाजिक एकता और युवा शक्ति का उत्सव बन गया। सिंकु ब्रदर्स की ऐतिहासिक जीत, खिलाड़ियों का जोश, दर्शकों का उत्साह और आयोजन समिति की मेहनत ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में यह प्रतियोगिता झारखंड, ओडिशा और पड़ोसी राज्यों की सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिताओं में शामिल हो सकती है।
सिंकु ब्रदर्स की ट्रॉफी जीत के साथ भले ही इस वर्ष का फुटबॉल महाकुंभ समाप्त हो गया हो, लेकिन खेल प्रेमियों के दिलों में अगले सारंडा चैंपियंस कप का इंतजार अभी से शुरू हो गया है।
फुटबॉल के साथ झलकी सारंडा की आदिवासी संस्कृति की अनुपम छटा
सारंडा चैंपियंस कप का फाइनल केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का भी भव्य उत्सव बन गया। प्रतियोगिता के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक आदिवासी नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। मांदर, नगाड़ा और ढोल की थाप पर कलाकारों ने हो, मुंडा एवं अन्य जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे महिला और पुरुष कलाकारों की प्रस्तुति ने खेल मैदान को सांस्कृतिक मंच में तब्दील कर दिया। दूर-दराज से आए खिलाड़ियों और दर्शकों ने भी इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि खेल और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों मिलकर समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।













