मरम्मत नहीं हुई तो बड़ाजामदा-नोवामुंडी मुख्य मार्ग होगा जाम, ग्रामीणों और वाहन चालकों ने दी चेतावनी
गुवा संवाददाता।
बड़ाजामदा से नोवामुंडी को जोड़ने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित सुखचैन मोटर के समीप की पुलिया इन दिनों गंभीर खतरे का कारण बन चुकी है। पुलिया की हालत इतनी जर्जर हो गई है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कभी भी ध्वस्त हो सकती है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

पुलिया के बीच बने बड़े गड्ढे, आर-पार दिख रहे छेद
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पुलिया के बीचों-बीच बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कई स्थानों पर पुलिया की सतह टूटकर नीचे तक खुल गई है, जिससे आर-पार छेद दिखाई देने लगे हैं। पुलिया की लोहे की संरचना भी कई जगहों पर कमजोर पड़ चुकी है। बरसात का मौसम नजदीक होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो भारी बारिश के दौरान पुलिया के बहने या ध्वस्त होने का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा।
क्षेत्र की जीवनरेखा है यह सड़क
बड़ाजामदा-नोवामुंडी सड़क मार्ग पश्चिमी सिंहभूम और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। टाटानगर से किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, बड़बिल और जोड़ा जाने वाली यात्री बसें इसी सड़क से होकर चलती हैं।
इसके अलावा लौह अयस्क खदानों से जुड़े भारी मालवाहक ट्रकों की भी लगातार आवाजाही रहती है। हजारों टन लौह अयस्क लेकर चलने वाले ट्रकों का दबाव पुलिया पर पड़ रहा है, जिससे इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन और खराब होती जा रही है।
हर दिन जोखिम उठाकर गुजर रहे हैं लोग
पुलिया की बदहाल स्थिति के बावजूद रोजाना सैकड़ों यात्री और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय पुलिया और अधिक खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि गड्ढे और टूटे हिस्से स्पष्ट दिखाई नहीं देते।
वाहन चालकों ने बताया कि कई बार छोटे वाहन पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से में फंस चुके हैं। यदि कोई भारी वाहन अचानक संतुलन खो दे तो बड़ा हादसा हो सकता है।
कई बार हुआ आंदोलन, नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पुलिया के निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार आंदोलन, धरना और विरोध-प्रदर्शन किए गए। संबंधित विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
लोगों का आरोप है कि जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक प्रशासन गंभीरता नहीं दिखाता। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने भी कई बार समस्या को उठाया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रशासन की उदासीनता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिया की जर्जर स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग द्वारा कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों का सवाल है कि आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि पुलिया ध्वस्त हो गई तो बड़ाजामदा, नोवामुंडी, किरीबुरू और आसपास के क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित होगा, जिससे आम जनता के साथ-साथ खनन और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा।
मरम्मत नहीं हुई तो होगा सड़क जाम
स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वाहन चालकों ने झारखंड सरकार तथा संबंधित विभागों से तत्काल पुलिया की मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो जनहित और जनसुरक्षा को देखते हुए बड़ाजामदा-नोवामुंडी मुख्य सड़क मार्ग को अनिश्चितकाल के लिए जाम कर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

“हादसे के बाद नहीं, पहले जागे प्रशासन”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि समय रहते पुलिया की मरम्मत करा दी जाए तो संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
अब देखना यह है कि लोगों की लगातार उठ रही मांगों और चेतावनियों के बाद प्रशासन कब जागता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही इस जर्जर पुलिया की ओर ध्यान दिया जाएगा।














