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सारंडा में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, विकास योजनाओं पर भ्रष्टाचार के आरोप; अब हक के लिए उठेगी ग्रामीणों की आवाज!

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थोलकोबाद की ग्रामसभा में शिक्षा और सर्वांगीण विकास पर गहरी चिंता, 10 दिसंबर को सरकार व जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन

BAP जिलाध्यक्ष सुशील बारला बोले—आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना सारंडावासियों के साथ अन्याय

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

सारंडा/थोलकोबाद। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले सारंडा के गांवों में आज भी शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और विकास की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच रहने वाले ग्रामीणों के सामने बच्चों की बेहतर शिक्षा, सरकारी योजनाओं का लाभ और समुचित विकास आज भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसी को लेकर थोलकोबाद गांव में आयोजित ग्रामसभा एवं वनाधिकार समितियों की महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र की गिरती शिक्षा व्यवस्था और विकास योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

जोगेन जातरमा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों ने सारंडा के भविष्य, बच्चों की शिक्षा और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी सह BAP के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने सरकार और जिला प्रशासन से सारंडा की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस एवं सकारात्मक पहल करने की मांग की।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बिना सारंडा का विकास अधूरा

बैठक में शिक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा गया कि किसी भी समाज के विकास की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होती है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षण व्यवस्था, पर्याप्त शिक्षक, नियमित पढ़ाई और जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो उनके लिए भविष्य में आगे बढ़ने के अवसर सीमित हो जाएंगे।

सारंडा जैसे दुर्गम वन क्षेत्र में शिक्षा का महत्व और भी अधिक है। यहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा के अभाव में ग्रामीण बच्चे रोजगार, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसी संभावनाओं से पीछे छूट सकते हैं।

सुशील बारला ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को सारंडा के विद्यालयों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित कक्षाओं का संचालन, बच्चों की उपस्थिति और आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सारंडा के बच्चों को भी शहरों के बच्चों की तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का समान अवसर मिलना चाहिए। जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां किसी बच्चे के भविष्य की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए।

‘आजादी के दशकों बाद भी मौलिक सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण’

बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी एवं BAP जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने कहा कि आजादी के 76 वर्ष और झारखंड अलग राज्य बनने के 26 वर्ष बाद भी सारंडा के लोगों को संविधान प्रदत्त बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। यह सारंडावासियों के साथ घोर अन्याय है।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर वर्षों से घोषणाएं होती रही हैं, योजनाएं बनाई जाती रही हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक किस हद तक पहुंचा है, इसकी गंभीर समीक्षा जरूरी है। विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल कागजों पर आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

सुशील बारला के अनुसार, सारंडा के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। क्षेत्र के विकास के लिए ऐसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए, जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों और जिनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से अपील की कि सारंडा की समस्याओं को सामान्य प्रशासनिक मुद्दा समझकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

विकास योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

बैठक में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। ग्रामीणों का कहना था कि विकास का लाभ तभी दिखाई देगा, जब योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से हो और निर्धारित सुविधाएं वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचें।

सुशील बारला ने विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने मांग की कि सारंडा में संचालित योजनाओं की समीक्षा की जाए, उनकी जमीनी स्थिति का आकलन हो तथा जहां भी अनियमितताएं सामने आएं, वहां नियमानुसार जांच और कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को विकास योजनाओं की जानकारी मिलनी चाहिए और ग्रामसभा की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं के चयन से लेकर उनके क्रियान्वयन तक स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

ग्रामसभा और वनाधिकार समितियों की भूमिका अहम

थोलकोबाद में आयोजित इस बैठक में ग्रामसभा और वनाधिकार समितियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया। सारंडा जैसे वन क्षेत्र में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बिना विकास की योजनाओं को प्रभावी बनाना मुश्किल है।

ग्रामसभा ग्रामीणों की समस्याओं को सामूहिक रूप से सामने रखने, प्राथमिकताएं निर्धारित करने और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक मांग पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वहीं, वनाधिकार से जुड़े विषयों पर नियमानुसार अधिकारों और प्रक्रियाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाना भी आवश्यक है।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि क्षेत्र की समस्याओं को अलग-अलग उठाने के बजाय सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष रखा जाए, ताकि शिक्षा और विकास से संबंधित मांगों पर ठोस कार्रवाई हो सके।

10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस पर सौंपेंगे ज्ञापन

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 10 दिसंबर 2026 को मानवाधिकार दिवस के अवसर पर सारंडा क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की मांग को लेकर राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

ज्ञापन के माध्यम से सारंडा के गांवों में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने और विकास योजनाओं को प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से लागू करने की मांग उठाई जाएगी।

ग्रामीणों का यह सामूहिक निर्णय इस बात का संकेत है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए अब संगठित प्रयासों को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मानवाधिकार दिवस के अवसर पर ज्ञापन सौंपने का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान उन बुनियादी सवालों की ओर आकर्षित करना है, जिनका सीधा संबंध ग्रामीणों के सम्मानजनक जीवन और बच्चों के भविष्य से है।

बच्चों का भविष्य बने प्राथमिकता, तभी बदलेगी सारंडा की तस्वीर

सुशील बारला ने सरकार और जिला प्रशासन से सारंडा के सर्वांगीण विकास के लिए सकारात्मक पहल करने की मांग की। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र ग्रामीणों तक पहुंचाने और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को उन्होंने क्षेत्र की प्रमुख जरूरतों से जोड़कर देखा।

बैठक में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे। शिक्षा, विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा ने सारंडा की जमीनी समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

सारंडा के विकास की असली कसौटी केवल योजनाओं की संख्या या सरकारी घोषणाएं नहीं, बल्कि यह होगी कि गांवों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलती है या नहीं, ग्रामीणों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचती हैं या नहीं और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है या नहीं।

अब देखना यह है कि 10 दिसंबर को सौंपे जाने वाले ज्ञापन पर सरकार और जिला प्रशासन कितनी गंभीरता से पहल करते हैं। सारंडा के ग्रामीणों की अपेक्षा स्पष्ट है—शिक्षा को प्राथमिकता मिले, विकास योजनाओं में पारदर्शिता आए और जंगलों के बीच बसे गांवों के बच्चों को भी बेहतर भविष्य का समान अवसर मिले।

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