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सारंडा में मोबाइल टावर जला, संचार सेवा ठप: नक्सलियों की आगजनी से दहशत में बहदा गांव

On: October 14, 2025 7:56 AM
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ऑपरेशन ‘कगार’ के विरोध में माओवादी हमला, ग्रामीण बोले – “हमारा ही नुकसान कर रहे हैं नक्सली”

रिपोर्ट – शैलेश सिंह


मध्यरात्रि में दहशत का तांडव

चाईबासा। सरायकेला-खरसावां जिला के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की गतिविधियां एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। बीती रात 13/14 अक्टूबर की मध्यरात्रि को भाकपा (माओवादी) नक्सलियों ने छोटानागरा थाना क्षेत्र के बहदा गांव स्थित एयरटेल मोबाइल टावर को आग के हवाले कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दर्जनभर हथियारबंद नक्सली देर रात अचानक गांव पहुंचे। उन्होंने पहले ग्रामीणों को घरों में बंद रहने की चेतावनी दी, फिर टावर पर लगे पैनल और बैटरी उपकरणों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। कुछ ही मिनटों में टावर धधक उठा और पूरे इलाके में लपटें दिखने लगीं।


फटते रहे उपकरण, रातभर गूंजती रही धमाकों की आवाज

आग लगने के बाद टावर के उपकरणों के जलने और फटने से रह-रहकर तेज आवाजें आती रहीं। ग्रामीणों ने बताया कि रात करीब एक बजे तक पूरे क्षेत्र में धमाकों जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। टावर के चारों ओर धुआं फैल गया और बिजली की तारें जलकर टूट गईं।
इस वारदात के बाद ग्रामीण पूरी रात भय के साए में रहे। किसी ने अपने घरों से बाहर झांकने की हिम्मत तक नहीं की।


पोस्टरों के जरिए दी पुलिस को धमकी

घटना स्थल पर नक्सलियों ने कई पोस्टर और पर्चे भी छोड़े हैं, जिनमें उन्होंने अपने मारे गए साथियों का बदला लेने की चेतावनी दी है। पोस्टर में “ऑपरेशन कगार” के विरोध में 8 से 14 अक्टूबर तक प्रतिशोध सप्ताह और 15 अक्टूबर को झारखंड, बिहार, उत्तरी छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में “कांड” करने का आह्वान किया गया है।
पोस्टर में साफ लिखा गया है —

“पुलिस हमारे साथियों का खून बहा रही है, अब बदला उसी अंदाज में लिया जाएगा।”


गांव में पसरा सन्नाटा, लोग बोले – “हमारे जीवन पर संकट”

घटना के बाद बहदा गांव और आसपास के इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों के चेहरों पर डर साफ झलक रहा है। गांव के लोगों ने बताया —

“रात में अचानक तेज आवाज सुनाई दी, फिर आग की लपटें दिखीं। हम सब बच्चे लेकर घर में दुबक गए।”

एक अन्य ग्रामीण ने कहा —

“टावर के जल जाने से अब नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है। मोबाइल से बात नहीं हो पा रही, बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद है, बैंक का काम ठप है, यूपीआई से लेनदेन रुक गया है।”

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि नक्सली पुलिस के खिलाफ लड़ाई को जनता पर न थोपें। “टावर जलाने से हमें ही परेशानी होती है, पुलिस को नहीं,” एक युवक ने कहा।


शिक्षा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर

मोबाइल नेटवर्क बंद होने से ग्रामीण जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

  • ऑनलाइन शिक्षा पूरी तरह ठप हो चुकी है।
  • बैंक, ई-कोमर्स, और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सभी डिजिटल सेवाएं बाधित हैं।
  • कई परिवार जो यूपीआई से लेन-देन करते थे, अब नकद लेनदेन के लिए दूर के बाज़ारों पर निर्भर हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है क्योंकि आपात स्थिति में एंबुलेंस या अस्पताल से संपर्क करना मुश्किल हो गया है।

नक्सलियों की रणनीति – पुलिस संचार को तोड़ना

पुलिस सूत्रों के अनुसार, नक्सली लंबे समय से मोबाइल टावरों को निशाना बना रहे हैं। उनका मानना है कि टावर से मिलने वाली सिग्नल सुविधा पुलिस को नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाने में मदद करती है।
एक जानकार ने बताया —

“नक्सली सोचते हैं कि टावर जलाने से पुलिस की निगरानी कमजोर होगी। पर इससे सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को होता है।”


पुलिस कैंप पास, फिर भी नक्सली बेखौफ

जहां यह घटना हुई, वहां से छोटानागरा थाना और एक सुरक्षा कैंप महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद नक्सली बिना किसी डर के गांव में घुस आए और डेढ़ घंटे तक तांडव मचाते रहे।
पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, उन्होंने सुबह घटनास्थल की ओर रवाना होने की तैयारी शुरू की। हालांकि इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।


ग्रामीणों की नाराज़गी – “हमारा नुकसान, नक्सलियों का नहीं”

सारंडा के कई लोग नक्सलियों के इस कदम से बेहद नाराज़ हैं।
कुछ लोगों ने कहा —

“नक्सलियों को जनता की समस्या समझनी चाहिए। पुलिस से लड़ाई के लिए हमारे बच्चों की शिक्षा, हमारी कमाई और हमारी सुरक्षा क्यों छीनी जा रही है?”

महिलाओं ने कहा कि अब बच्चे स्कूल या ट्यूशन नहीं जा पा रहे क्योंकि इंटरनेट और मोबाइल कनेक्शन बंद है। कुछ ने बताया कि फसल बेचने के लिए जो ऑनलाइन पेमेंट का सिस्टम था, वो भी ठप पड़ा है।


नक्सल गतिविधियों में तेज़ी – सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

सुरक्षा एजेंसियों ने माना है कि हाल के दिनों में नक्सली फिर से सक्रिय हो गए हैं।
पिछले सप्ताह ही सारंडा क्षेत्र में IED ब्लास्ट में एक पुलिस अधिकारी शहीद हुए और दो जवान घायल हुए थे।
अब मोबाइल टावरों को जलाकर नक्सली फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।


‘ऑपरेशन कगार’ से बौखलाए माओवादी

जानकारों के मुताबिक, पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त मुहिम “ऑपरेशन कगार” ने माओवादियों के कई ठिकाने ध्वस्त किए हैं। कई दस्ते कमजोर पड़े हैं और हथियारों की आपूर्ति घट गई है। इसी बौखलाहट में माओवादी अब बुनियादी ढांचे — जैसे मोबाइल टावर, सड़क निर्माण, स्कूल और बिजली के खंभे — को निशाना बना रहे हैं।


सरकार के लिए चुनौती – जनता के बीच भरोसा कायम रखना

यह घटना न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए, बल्कि सरकार के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जब विकास और संचार की सुविधा नष्ट होती है, तो जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है।
अब जरूरत है कि सरकार ऐसे इलाकों में संचार व्यवस्था को शीघ्र बहाल करे और स्थानीय लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाए।


जनता की पुकार

सारंडा के लोगों की एक ही गुहार है —

“हम विकास चाहते हैं, डर नहीं। पुलिस और सरकार हमें सुरक्षा दे, ताकि हम फिर से सामान्य जीवन जी सकें।”

नक्सली जहां अपने आंदोलन को ‘जनता के लिए लड़ाई’ बताते हैं, वहीं अब जनता ही उनके खिलाफ बोलने लगी है।
मोबाइल टावर जलाने की यह वारदात नक्सलवाद की जनविरोधी सोच का ताजा उदाहरण बन गई है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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