रिपोर्ट : शैलेश सिंह
घोर नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल एक बार फिर दहशत के साये में है। पिछले कुछ दिनों से यहां नक्सली गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। एक ओर सरकार वर्षों बाद जंगलों के इन कोने-कोने तक सड़क, पुल-पुलिया, मोबाइल नेटवर्क जैसी विकास योजनाएं पहुंचाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर नक्सली इन्हीं प्रयासों को ध्वस्त करने का टार्गेट बना रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि कहीं दोबारा उन्हें अलगाव और पिछड़ेपन के अंधेरे युग में न धकेल दिया जाए।

विकास पर नक्सलियों का हमला
सारंडा में हालिया घटनाओं ने इस आशंका को और सच साबित किया है।
- मोबाइल टावरों को आग के हवाले करना
- सड़कों को बम से उड़ाना
- IED विस्फोट कर सुरक्षा बलों को निशाना बनाना
कुछ दिन पहले हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के एक पदाधिकारी शहादत को प्राप्त हुए थे और कई जवान घायल भी हुए। इन घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि नक्सली फिर से बड़े हमलों की तैयारी में हैं।
जंगलों में हथियारबंद दस्ता सक्रिय
ग्रामीण सूत्रों के अनुसार 15-20 नक्सलियों का एक हथियारबंद दस्ता लगातार इधर-उधर घूम रहा है। बताया जा रहा है कि यह दस्ता
तितलीघाट के दुआरगई जंगल,
बहदा,
झारबेड़ा,
टोंटोगड़ा,
कुमडीह,
कारिया,
कुदलीबाद,
और हतनाबुरू गांव के जंगलों में निरंतर मूवमेंट में है।
इन इलाकों में नक्सलियों की मौजूदगी ने स्थानीय समुदाय के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है।
पुलिस कैंप पर हमले की आशंका
सूत्र बताते हैं कि 22 अक्टूबर की रात यह दस्ता झारबेड़ा और टोंटोगड़ा के बीच के जंगलों में मौजूद था। यह स्थान सैंडल गेट स्थित पुलिस कैंप से काफी करीब बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि नक्सली रात के अंधेरे में पुलिस कैंप पर हमला बोल सकते हैं।
इसके मद्देनजर सुरक्षाबल भी पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं और जंगल में सर्च अभियान तेज कर दिया गया है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता – “फिर से सब न छिन जाए!”
ग्रामीणों का कहना है कि सालों के इंतजार के बाद अब जाकर
- उनके गांव तक सड़क पहुंची
- एंबुलेंस, मेडिकल सुविधाओं तक रास्ता आसान हुआ
- मोबाइल नेटवर्क से दुनिया से जुड़ने का रास्ता खुला
- रोजगार और आर्थिक उम्मीदें बढ़ी हैं
ऐसे में अगर नक्सली इन विकास कार्यों को फिर से निशाना बनाते हैं, तो ग्रामीणों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
लोगों की जुबान पर एक ही बात —
“अगर विकास खत्म कर देंगे, तो हम फिर वहीं पहुंच जाएंगे जहां से चले थे।”

सुरक्षा बल बनाम नक्सली : निर्णायक मोड़ पर जंग
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह वक्त सबसे बड़ी चुनौती की तरह है।
- नक्सली एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं
- सरकार और सुरक्षा बल विकास व शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं
यह संघर्ष अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां
शांति और दहशत में से कौन जीतेगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा।
ग्रामीणों की मांग: “हमारे सपनों को मत उजाड़ने दो”
सारंडा के ग्रामीण प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से यही अपील कर रहे हैं:
“हमारी रक्षा करो… ताकि विकास की रोशनी हमारे गांवों में जलती रहे।”
सारंडा फिर उसी पुराने दौर में न लौटे —
यही है यहां के हर एक नागरिक की सबसे बड़ी इच्छा और सबसे बड़ी चिंता।















