माओवादियों ने पांच राज्यों में 24 घंटे बंद का ऐलान किया है, ग्रामीणों में दहशत का माहौल
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा जंगल में धमाका, सड़क ध्वस्त
सारंडा जंगल के छोटानागरा थाना अंतर्गत कुदलीबाद से करिया जाने वाली सड़क को नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी हिंसक गतिविधि का निशाना बनाया। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, 14 और 15 अक्टूबर की मध्य रात्रि में नक्सलियों ने सड़क के बीच लैंडमाइन विस्फोट कर दिया, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि सड़क पर गहर गड्ढा बन गया। इस बात की भी चर्चा या अफवाहें है कि नक्सली कुदलीबाद में स्थित बीएसएनएल का मोबाइल टावर को भी जला दिया है और कुछ वाहन भी जलाए हैं। लेकिन इन दोनों घटनाओं की कही से कोई भी अधिकारी पुष्टि नहीं किए हैं।

रात के अंधेरे में दी गई नक्सली चेतावनी
विस्फोट के कुछ ही घंटे पहले नक्सलियों ने पोस्टर और बैनर लगाकर 24 घंटे के बंद का ऐलान किया था। यह बंद झारखंड, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में लागू बताया गया है। सूत्रों के अनुसार, माओवादी संगठन ने अपने पर्चों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए बंद का आह्वान किया है।
ग्रामीणों में बढ़ा डर और असहजता
घटना की जानकारी देते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार सुबह जब वे इस सड़क से गुजर रहे थे, तो बीच सड़क में एक बड़ा गड्ढा देखा, जो लैंडमाइन विस्फोट से बना था। विस्फोट के कारण इस मार्ग से अब केवल मोटरसाइकिल ही मुश्किल से गुजर सकती है, जबकि किसी भी चार पहिया वाहन या मालवाहक ट्रक का आवागमन पूरी तरह ठप है।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सारंडा क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां फिर से तेज हो गई हैं। लगातार हो रहे धमाकों और घटनाओं से ग्रामीण भयभीत हैं और शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते हैं।
सुरक्षा बलों की चौकसी बेअसर
सारंडा जंगल में दर्जनों पुलिस कैंप और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बावजूद नक्सलियों का इस तरह घटना को अंजाम देना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नक्सलियों की गतिविधियां पहले की तरह सक्रिय होती दिख रही हैं, और पुलिस को उनकी रणनीति समझने में देरी हो रही है।
सड़क संपर्क हुआ बाधित, ग्रामीण परेशान
विस्फोट के बाद कुदलीबाद से करिया जाने वाली सड़क पूरी तरह खंडित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, इस रास्ते से होकर आसपास के गांवों तक खाद्य सामग्री, दवा और जरूरी सामानों की आपूर्ति होती है। सड़क ध्वस्त होने के कारण अब ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय कर दूसरे मार्ग से जाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द सड़क मरम्मत और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
नक्सलियों की रणनीति में फिर सक्रियता
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में सारंडा के जंगलों में माओवादियों की छोटे समूहों में सक्रियता बढ़ी है।
पिछले एक सप्ताह में यह तीसरी बड़ी घटना है जब नक्सलियों ने किसी विकास या संचार तंत्र को निशाना बनाया है।
पहले मोबाइल टावर को जलाने और अब सड़क को उड़ाने की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि नक्सली एक बार फिर सुरक्षा बलों को चुनौती देने की कोशिश में हैं।
ग्रामीण बोले – रात में अब डर का साया
ग्रामीणों ने बताया कि रात में अब कोई सड़क से गुजरने की हिम्मत नहीं करता।
एक ग्रामीण ने कहा, “धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि पूरा इलाका हिल गया। हमलोगों को लगा कोई बड़ा हादसा हो गया है। अब तो हर रात डर लगता है कि न जाने कब कौन-सी जगह पर धमाका हो जाए।”
पुलिस ने सघन तलाशी अभियान शुरू किया
घटना के बाद सारंडा, छोटानागरा, मनोहरपुर के सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
पुलिस को संदेह है कि घटना को अंजाम देने के बाद नक्सली सारंडा के भीतरी इलाकों में छिप गए हैं।
अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को भी जंगलों में सर्च और पैट्रोलिंग बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
सारंडा फिर बारूद के साये में
सारंडा जंगल, जो कभी माओवादियों का गढ़ रहा है, एक बार फिर बारूद के साये में लौटता नजर आ रहा है।
हाल के दिनों में बढ़ती घटनाओं से स्पष्ट है कि नक्सली संगठन फिर से संगठित होकर सक्रियता दिखा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस चुनौती का कितनी तेजी और मजबूती से जवाब देते हैं।















