तीन दिनों से सक्रिय दो हाथी, ग्रामीणों ने जंगल जाना किया बंद
रिपोर्ट शैलेश सिंह
सारंडा। सारंडा जंगल क्षेत्र के भनगांव के समीप पिछले तीन दिनों से दो जंगली हाथियों के डेरा डालने से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया है। हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीण भयभीत हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों तक सीमित कर चुके हैं।

जंगल जाना बंद, वनोत्पाद पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के डर से वे अब जंगल नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनके रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ रहा है, क्योंकि कई परिवार वनोत्पाद पर ही निर्भर हैं। लकड़ी, पत्ते और अन्य जरूरी संसाधन लाने का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है।
एक से बढ़कर दो हुए हाथी, खतरा बढ़ा
भनगांव निवासी प्रसाद ने बताया कि पहले क्षेत्र में केवल एक हाथी देखा गया था, लेकिन 23 मार्च को दो हाथियों के एक साथ देखे जाने से खतरा और बढ़ गया है। इससे ग्रामीणों की चिंता और गहरा गई है।
गाय घर और बागान को पहुंचाया नुकसान
हाथियों ने गांव के जूरा सुरीन के पुत्र के गाय घर (गोठ) और बागान को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति कभी भी गंभीर हो सकती है।
पुरानी घटनाओं की वजह से डर और ज्यादा
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ माह पहले भी यही हाथी या इसी झुंड के हाथियों ने सारंडा के कई गांवों में भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान कई ग्रामीणों की जान भी गई थी।
इसी वजह से इस बार लोग पहले से ज्यादा डरे हुए हैं और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से सहमे हुए हैं।
वन विभाग से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द हस्तक्षेप करने और हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल के अंदर खदेड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो बड़ी घटना हो सकती है।
खौफ के साये में गांव, हर आहट पर नजर
फिलहाल भनगांव और आसपास के गांवों में लोग खौफ के साये में जी रहे हैं। रात होते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है और हर छोटी-छोटी आहट पर लोग चौकन्ने हो जाते हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन और वन विभाग की सक्रियता अब बेहद जरूरी हो गई है, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा













