32वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, जल-जंगल-जमीन और झारखंड की पहचान की रक्षा का संकल्प
सरकार से शहीद का दर्जा देने की मांग, आंदोलनकारियों ने कहा—बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरू। झारखंड आंदोलन के महान संघर्षशील व्यक्तित्व शहीद देवेंद्र माझी की 32वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अधूरे सपनों को पूरा करने और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। शहीद देवेंद्र माझी फाउंडेशन एवं आंदोलनकारी महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्ष, बलिदान और झारखंड आंदोलन में दिए गए योगदान को याद किया। सभा में झारखंड की अस्मिता, आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया गया।

शहीद के संघर्ष और बलिदान को किया नमन
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान शहीद देवेंद्र माझी का संघर्ष बेमिसाल रहा। उन्होंने झारखंड की पहचान और जल-जंगल की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका बलिदान झारखंड के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि शहीद देवेंद्र माझी ने जिस उद्देश्य के लिए संघर्ष किया, उसे पूरा करना आज झारखंड की जनता की जिम्मेदारी है। उनके विचारों और संघर्ष की गूंज जन-जन तक पहुंचाने के साथ उनके अधूरे सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा।
‘सपनों को पूरा करके ही दम लेगी जनता’
राजू महतो ने जोर देकर कहा कि झारखंड की जनता शहीद देवेंद्र माझी के सपनों को साकार करके ही दम लेगी। उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर राज्य की पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और जनाधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलनकारी एवं आम जनता एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके विचारों और उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए भी ठोस प्रयास होने चाहिए।
सरकार से शहीद का दर्जा देने की मांग
आंदोलनकारी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो ने झारखंड सरकार से शहीद देवेंद्र माझी को अविलंब शहीद का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन में उनके योगदान और सर्वोच्च बलिदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। सरकार को इस दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए, ताकि उनके संघर्ष और कुर्बानी को वह सम्मान मिल सके जिसके वे हकदार हैं।

बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे: प्रवीण केरकेट्टा
शहीद देवेंद्र माझी फाउंडेशन के सचिव प्रवीण केरकेट्टा ने कहा कि शहीद देवेंद्र माझी की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उनके सपनों को आगे बढ़ाने और उनके विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी रहेगा। उन्होंने शहीद के संघर्ष और विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
आदिवासी-मूलवासी समाज से एकजुटता का आह्वान
वहीं, किशोर किस्कु ने कहा कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज के लोगों को शहीद देवेंद्र माझी के संघर्ष, विचारों और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्य की पहचान, अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट रहना समय की मांग है। उन्होंने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके सपनों को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में शामिल हुए आंदोलनकारी एवं गणमान्य लोग
श्रद्धांजलि सभा में आंदोलनकारी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष राजू महतो, शहीद देवेंद्र माझी फाउंडेशन के सचिव प्रवीण केरकेट्टा, किशोर किस्कु, विजय शंकर नायक, अरुण कुमार दुबे, गुमदा उरांव, बिरसा मुंडा, दोते प्रधान, बिरसा उरांव, बिशु उरांव, सूरज मोहन लकड़ा, गणेश प्रसाद, मोहम्मद अशफाक, श्रद्धा उरांव, लक्ष्मी देवी, सीता उरांव, आशुतोष कुमार, एरेन कच्छप, रुदन उरांव और डीएन राम सहित कई लोग उपस्थित थे।
सभा में उपस्थित लोगों ने शहीद देवेंद्र माझी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया तथा झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और जनाधिकारों की रक्षा के लिए उनके विचारों पर चलने का संकल्प लिया।










