रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा के करमपदा और मेघाहातुबुरु लोडिंग साइडिंग के बीच स्थित टेकअप प्वाइंट के समीप रेलवे द्वारा लगभग 1100 वर्गफीट क्षेत्र में एक भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इस निर्माण को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि इससे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकता है।

ग्रामीणों को राहत की उम्मीद, आवागमन होगा सुगम
सारंडा के ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस भवन में रेलकर्मियों की नियुक्ति होती है और नई प्रणाली लागू की जाती है, तो इससे मालगाड़ियों के अनावश्यक ठहराव में कमी आएगी और आवागमन सुचारु होगा। वर्तमान में इस टेकअप प्वाइंट पर ट्रेनों के घंटों खड़े रहने से ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
लौह अयस्क ढुलाई के दौरान बनती है समस्या
गौरतलब है कि सेल की मेघाहातुबुरु और किरीबुरू खदानों से रेलवे के माध्यम से लौह अयस्क की ढुलाई की जाती है। लेकिन जब मेघाहातुबुरु से लोड मालगाड़ी करमपदा की ओर रवाना होती है, तो उसे इसी टेकअप प्वाइंट पर घंटों खड़ा कर दिया जाता है।
स्थिति यह होती है कि करमपदा स्टेशन से रेलकर्मियों को मोटरसाइकिल या पैदल इस स्थान तक भेजा जाता है, जहां वे आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर मालगाड़ी को आगे बढ़ाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है, जिससे जनता की आवाजाही बाधित होती है।

ग्रामीण सड़क और फॉरेस्ट मार्ग होते हैं जाम
यह टेकअप प्वाइंट सारंडा के कई गांवों को जोड़ने वाला एक मात्र महत्वपूर्ण मार्ग भी है। यहां से फॉरेस्ट और ग्रामीण सड़कें गुजरती हैं, जो गांवों के लिए जीवनरेखा हैं। जब मालगाड़ी खड़ी रहती है, तो घंटों तक रास्ता बंद हो जाता है, जिससे:
* ग्रामीणों का आवागमन ठप हो जाता है
* मरीजों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है
* पर्यटकों को भी इंतजार करना पड़ता है
* नक्सल विरोधी अभियान में जुटी पुलिस को बाधा होती है
* वन विभाग के अधिकारियों को भी आवाजाही में कठिनाई होती है
वर्षों पुरानी मांग पर अब दिखी पहल
सारंडा के ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे। अब रेलवे द्वारा इस निर्माण कार्य को शुरू किए जाने से उम्मीद जताई जा रही है कि स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया गया है।

रेलवे अधिकारियों में भी स्पष्टता का अभाव
इस पूरे मामले पर जब करमपदा स्टेशन मास्टर संजय दास से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस निर्माण के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
उन्होंने बताया,
“यह सही है कि वहां कुछ निर्माण कार्य हो रहा है, लेकिन क्या बन रहा है इसकी स्पष्ट जानकारी विभाग की ओर से नहीं दी गई है। कोई इसे सिग्नल रूम बता रहा है तो कोई ऑपरेटिंग रूम की बात कर रहा है।”
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यदि यह सुविधा विकसित होती है तो इससे रेलवे और आम लोगों दोनों को फायदा हो सकता है।













