मजदूरों को हटाने पर अधिकारियों को लगाई फटकार, 5 मई को निर्णायक बैठक का ऐलान
गुवा संवाददाता
गुवा क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गया, जब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने यहां पहुंचकर बेरोजगारी और ठेका मजदूरों की समस्याओं पर खुलकर मंथन किया।
उनका यह दौरा महज औपचारिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मजदूरों के हक की लड़ाई का संकेत देता नजर आया।

भाजपा कार्यालय में बैठक, जमीनी हकीकत आई सामने
गुवा रेलवे मार्केट स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में स्थानीय समस्याओं का पिटारा खुल गया।
बेरोजगारी, ठेका प्रथा और स्थानीय मजदूरों की अनदेखी जैसे मुद्दों ने पूरे माहौल को गंभीर बना दिया।
बैठक में मौजूद मजदूरों ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी—
उन्होंने बताया कि गुवा सेल खदान में कार्यरत ठेका कंपनियों, विशेषकर राकेश पांडे और मां सरला कंस्ट्रक्शन के अधीन काम करने वाले मजदूरों को अचानक काम से बैठा दिया गया है।
“रोजी-रोटी पर सीधा वार”
मजदूरों की मानें तो:
* बिना किसी ठोस कारण के काम से हटाया गया
* कई परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति
* बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता देने का आरोप
यह सिर्फ रोजगार का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय अस्तित्व पर संकट के रूप में उभरता दिखा।
फोन पर ही अधिकारियों को निर्देश, तुरंत कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मधु कोड़ा ने बैठक के दौरान ही संबंधित अधिकारियों से फोन पर बातचीत की।
साफ संदेश: अन्याय बर्दाश्त नहीं
उन्होंने दो टूक कहा—
* हटाए गए मजदूरों को तुरंत काम पर वापस लिया जाए
* स्थानीय लोगों के साथ भेदभाव बंद हो
* रोजगार में प्राथमिकता स्थानीय युवाओं को मिले
उनका यह रुख साफ तौर पर आक्रामक और दबाव बनाने वाला था।
5 मई को बड़ी बैठक: कंपनियों पर कसने वाली है नकेल
पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 5 मई को सेल के अधीन काम कर रही सभी निजी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के मालिकों के साथ बैठक बुलाई जाएगी।
बैठक के मुख्य एजेंडे
* स्थानीय बनाम बाहरी मजदूरों का संतुलन
* बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता
* ठेका व्यवस्था में पारदर्शिता
* मजदूरों की सुरक्षा और स्थायित्व
यह बैठक आने वाले समय में गुवा के रोजगार ढांचे को बदल सकती है।

स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा फिर गरमाया
गुवा क्षेत्र में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी कर बाहरी मजदूरों को रोजगार दिया जाता है।
मधु कोड़ा ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर उठाते हुए कहा—
“जब क्षेत्र के लोग बेरोजगार हैं, तो बाहर के लोगों को प्राथमिकता देना अन्याय है।”
यह बयान सीधे तौर पर कंपनियों की नीति पर सवाल खड़ा करता है।
भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी, बढ़ा राजनीतिक तापमान
बैठक में भाजपा सारंडा मंडल उपाध्यक्ष जय किशन गुप्ता समेत कैलाश दास, सुदीप दास, राजू चौबे, उदय सिंह और पीयूष साव जैसे कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इससे यह साफ है कि यह मुद्दा अब सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
जनता की मांग: आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए
स्थानीय लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के सामने साफ शब्दों में कहा—
* क्षेत्र में स्थायी रोजगार की व्यवस्था हो
* ठेका कंपनियों की मनमानी पर रोक लगे
* युवाओं के लिए रोजगार नीति बनाई जाए
लोगों का मानना है कि अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव जरूरी है।













