किरिबुरू से शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय अंग्रेज़ी पत्रिका अब भुवनेश्वर से प्रकाशित, दुनिया भर के लेखक और कवि जुड़े
2005 में हुई थी शुरुआत, संघर्षों के बीच खड़ा हुआ एक सपना
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
साल 2005 में झारखंड के छोटे से शहर किरिबुरू से एक अनोखी पहल की शुरुआत हुई। ‘Eternity’ नामक अंतरराष्ट्रीय अंग्रेज़ी पत्रिका का प्रकाशन बेहद सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में शुरू किया गया। उस समय न तो तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त थीं और न ही संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध थे, फिर भी एक मजबूत संकल्प ने इस पत्रिका को जन्म दिया।

इंटरनेट के लिए रात 3 बजे उठकर करनी पड़ती थी यात्रा
पत्रिका के संपादन और प्रकाशन की प्रक्रिया आसान नहीं थी। इंटरनेट की सुविधा के लिए संपादक को रात 3 बजे उठकर ट्रेन से किरिबुरू से जमशेदपुर जाना पड़ता था और सुबह 6 बजे वापस लौटना पड़ता था। यह संघर्ष केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक दृढ़ता की भी परीक्षा थी।
विदेशी लेखकों से पत्राचार, एक-एक महीने का इंतजार
उस दौर में अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के लेखकों और कवियों से संपर्क साधने के लिए पत्र भेजे जाते थे, जिनका जवाब आने में एक महीने तक का समय लगता था। इसके बावजूद ‘Eternity’ ने अपने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को बनाए रखा और लगातार आगे बढ़ती रही।
विश्व के नामचीन साहित्यकारों का मिला मार्गदर्शन
शुरुआती दौर में अमेरिका की लेखिका रूथ शूलर और नजवा ब्रैक्स जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने ‘Eternity’ को दिशा और समर्थन दिया। इसके साथ ही ग्रीस की नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित कवि मरीना ज़ोग्राफौ, ऑस्ट्रिया के प्रो. कर्ट एफ. स्वाटेक, एथेंस की ‘Kelaino’ पत्रिका की संपादिका डॉ. पानागियोटा ज़ालोनी और चीन के डॉ. झांग झी जैसे अंतरराष्ट्रीय कवियों ने पत्रिका के आध्यात्म, विश्व शांति, विनम्रता और सत्यनिष्ठा के विचारों की सराहना की।
एक पत्रिका से जन्मा वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन
‘Eternity’ केवल एक पत्रिका नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से दुनिया भर के कवि और लेखक जुड़ते गए। धीरे-धीरे यह एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन का रूप लेता गया, जिसमें शांति, मानवता और आध्यात्म के संदेश को प्रमुखता दी गई।

अब भुवनेश्वर से हो रहा प्रकाशन, बना त्रैमासिक जर्नल
वर्तमान समय में ‘Eternity’ का प्रकाशन भुवनेश्वर से ‘Eternity International Organisation’ द्वारा किया जा रहा है। अब यह पत्रिका त्रैमासिक (Quarterly) रूप में प्रकाशित हो रही है, जिससे इसकी पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़े हैं।
विश्व शांति के दूतों का जुड़ाव, बढ़ रही वैश्विक पहचान
इस पत्रिका से अब कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां जुड़ चुकी हैं। अमेरिका की विश्व शांति एंबेसडर स्टेसी मोडिसेट, रोमानिया की संपादक और कवयित्री कोरिना जुंघियातु, तथा अमेरिका की कवयित्री और संपादक जूली माइल्स जैसे नाम ‘Eternity’ के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं।
साहित्य, शांति और आध्यात्म के लिए बड़ा मंच बनने की उम्मीद
‘Eternity’ के संपादक और संस्थापक हरेकृष्ण महंता का मानना है कि यह पत्रिका भविष्य में साहित्य, विश्व शांति और आध्यात्म के क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। उनका विश्वास है कि यदि ईश्वर की कृपा बनी रही, तो यह मंच वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनेगा।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक यात्रा
किरिबुरू जैसे छोटे शहर से शुरू हुई ‘Eternity’ की यात्रा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। यह केवल एक पत्रिका की कहानी नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, संघर्ष और वैश्विक सोच की मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।














