26वीं बटालियन का व्यापक वृक्षारोपण अभियान, जंगल और जीवन बचाने का संदेश
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सारंडा के घने जंगलों के बीच आज एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली, जब 26वीं वाहिनी सीआरपीएफ के अधिकारियों और जवानों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि “स्वच्छ सारंडा, हरित सारंडा” के संकल्प के साथ प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का मजबूत संदेश भी दिया गया।

कमांडेंट के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान
इस कार्यक्रम का आयोजन 26वीं बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट श्री राजीव रंजन के दिशा-निर्देशन में किया गया। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में जवानों ने यह संदेश दिया कि सुरक्षा बल केवल देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के प्रहरी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के भी सच्चे सिपाही हैं।
द्वितीय कमान अधिकारी के नेतृत्व में मैदान में उतरे जवान
वृक्षारोपण कार्यक्रम का नेतृत्व द्वितीय कमान अधिकारी श्री प्रकाश चन्द्र वादल ने किया। उनके साथ डैट/26वीं सीआरपीएफ के अधिकारी एवं जवान पूरी सक्रियता और उत्साह के साथ इस अभियान में शामिल हुए।
उन्होंने खुद पौधे लगाकर जवानों और स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।

कई कैंपों में एक साथ चला हरित अभियान
यह वृक्षारोपण कार्यक्रम पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न सीआरपीएफ कैंपों और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ चलाया गया। जिन प्रमुख स्थानों पर पौधारोपण हुआ, उनमें शामिल हैं:
* किरीबुरु परिसर
* एफ/26 जम्बाईबुरु
* ई/26 थालकोबाद
* जी/26 झिरझिरिबुरु
* गुण्डीजोरा और आसपास के क्षेत्र
इन सभी स्थानों पर जवानों ने मिलकर सैकड़ों पौधे लगाए और हरियाली को बढ़ाने का संकल्प लिया।
फलदार, छायादार और औषधीय पौधों पर विशेष जोर
अभियान के दौरान सिर्फ औपचारिक पौधारोपण नहीं हुआ, बल्कि सोच-समझकर ऐसे पौधों का चयन किया गया जो पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए लाभकारी हों। इनमें शामिल थे:
* फलदार पौधे – पोषण और आजीविका के लिए
* छायादार पौधे – गर्मी से राहत और जैव विविधता के लिए
* औषधीय (हर्बल) पौधे – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए
इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि यह अभियान दीर्घकालिक सोच के साथ चलाया गया है।
“पर्यावरण से ही जीवन संभव” – जवानों का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर सीआरपीएफ अधिकारियों और जवानों ने एक स्वर में कहा कि
“पर्यावरण पर ही हमारा जीवन पूरी तरह निर्भर है। स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।”
उन्होंने आम जनता से अपील की कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर पौधारोपण करे और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए।
सारंडा में हरियाली बचाने की मजबूत पहल
सारंडा, जो एशिया के सबसे घने साल वन क्षेत्रों में गिना जाता है, वहां इस तरह का अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के वर्षों में जंगलों पर बढ़ते दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच सीआरपीएफ का यह कदम एक सकारात्मक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता का उदाहरण
जहां एक ओर सीआरपीएफ के जवान नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि वे समाज और प्रकृति दोनों के संरक्षक हैं।
हर पौधा एक सुरक्षा कवच
यह वृक्षारोपण अभियान सिर्फ एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सोच और जिम्मेदारी का प्रतीक है। हर लगाया गया पौधा भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऑक्सीजन, छाया और जीवन का सुरक्षा कवच बनेगा।
“स्वच्छ सारंडा, हरित सारंडा” का यह संदेश अब केवल नारा नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बनने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।














