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श्रद्धा, सेवा और संगत का संगम: किरीबुरू में पहुँचा गुरु ग्रंथ साहिब का पावन स्वरूप

On: April 17, 2026 3:10 PM
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“वाहेगुरु” की गूंज के बीच सजी भव्य पालकी, जगजीत सिंह गिल बने गुरुद्वारा प्रमुख

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

लौह नगरी किरीबुरू में आज का दिन आस्था, अनुशासन और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक बन गया। गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के आगमन ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया। किरीबुरू स्थित गुरु नानक देव सिंह साहिब गुरुद्वारा में यह ऐतिहासिक क्षण पूरी सिख परंपरा, रीति-रिवाज और गहरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।

फूलों से सजी पालकी, “वाहेगुरु” से गूंजा आसमान

पावन स्वरूप को जमशेदपुर से किरीबुरू तक विशेष रूप से सजी पालकी में लाया गया। पालकी को ताजे फूलों से इस तरह सजाया गया था कि वह भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रतीत हो रही थी।
जैसे ही पावन स्वरूप किरीबुरू पहुँचा, वातावरण गुरबाणी की मधुर ध्वनि और “वाहेगुरु” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने रास्ते भर मत्था टेककर और हाथ जोड़कर दर्शन किए।
यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा की चलती-फिरती धारा थी।

निष्काम सेवा की जीवंत मिसाल—सड़कों से दिल तक सफाई

इस आयोजन की सबसे खास बात रही ‘सेवा भाव’, जो सिख धर्म की आत्मा है।
श्रद्धालुओं ने बिना किसी स्वार्थ के पूरे मार्ग को पवित्र बनाने का जिम्मा उठाया—
* टैंकरों से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया
* महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर रास्तों की झाड़ू लगाई
* पूरे मार्ग को फूलों और रंगोलियों से सजाया गया
यह दृश्य केवल साफ-सफाई का नहीं, बल्कि आत्मिक समर्पण का प्रतीक था।
हर व्यक्ति सेवा में लीन था—न कोई बड़ा, न कोई छोटा।

जगजीत सिंह गिल ने निभाई अगुवाई—शीश पर उठाया पावन स्वरूप

इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा के नवनियुक्त प्रमुख जगजीत सिंह गिल ने अपनी जिम्मेदारी को पूरे श्रद्धा भाव से निभाया।
उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को अपने शीश पर धारण कर ससम्मान गुरुद्वारा साहिब के भीतर स्थापित किया।
इस दौरान पंज प्यारे की अगुवाई में सभी धार्मिक परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन किया गया।
यह दृश्य हर श्रद्धालु के लिए भावुक और प्रेरणादायक था।

संगत का उमड़ा सैलाब—हर कदम पर श्रद्धा

इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संगत शामिल हुई।
लोग दूर-दूर से इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने पहुंचे। पालकी के साथ-साथ चलते हुए श्रद्धालु पूरे मार्ग में नमन करते रहे।
कलगींधर गुरुद्वारा चर्च रोड के सदस्यों सहित अन्य क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
हर चेहरे पर आस्था थी, हर कदम में समर्पण।

तीन वर्षों के लिए नई जिम्मेदारी—जगजीत सिंह गिल चुने गए प्रमुख

धार्मिक आयोजन के साथ-साथ गुरुद्वारा प्रबंधन की नई जिम्मेदारी भी तय की गई।
जगजीत सिंह गिल की सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और समर्पण को देखते हुए उन्हें सर्वसम्मति से अगले तीन वर्षों के लिए गुरुद्वारा का प्रमुख चुना गया।
यह चयन केवल एक पद नहीं, बल्कि संगत के विश्वास और आस्था का प्रतीक है।

आस्था से आगे—एकता और अनुशासन का संदेश

जमशेदपुर से किरीबुरू तक की यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं थी।
यह एक संदेश था—
👉 सेवा का
👉 अनुशासन का
👉 और सामुदायिक एकता का
जहां हर व्यक्ति ने बिना किसी भेदभाव के मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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