कलगीधर गुरुद्वारा में अखंड पाठ, अरदास और छबील सेवा का आयोजन, राहगीरों को पिलाया गया मीठा शीतल जल
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
किरीबुरू स्थित कलगीधर गुरुद्वारा में शुक्रवार 6 जून को सिख धर्म के पांचवें गुरु एवं प्रथम सिख शहीद श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मानव सेवा के विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु जी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस सिख इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो सत्य, धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। वर्ष 1606 में मुगल सम्राट जहांगीर के आदेश पर उन्होंने असीम यातनाएं सहते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, लेकिन अपने सिद्धांतों और आस्था से कभी समझौता नहीं किया।

11 दिनों तक चला अखंड पाठ और विशेष प्रार्थनाएं
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के तत्वावधान में पिछले 11 दिनों से विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। इस दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखंड पाठ, कीर्तन और विशेष अरदास का आयोजन हुआ, जिसमें संगत ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शहीदी दिवस के अवसर पर गुरुद्वारा में श्रद्धालुओं ने गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, त्याग और मानवता के लिए उनके संदेशों को स्मरण करते हुए देश और समाज की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
छबील सेवा के माध्यम से दिया मानवता का संदेश
भीषण गर्मी को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी की ओर से बैंकमोड़ क्षेत्र में छबील सेवा का आयोजन किया गया। इस दौरान राहगीरों और स्थानीय लोगों को ठंडा मीठा पानी पिलाया गया। साथ ही हलुआ और चने की घुघनी का वितरण कर सेवा और परोपकार की सिख परंपरा को जीवंत किया गया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने मानवता, प्रेम, सहनशीलता और सेवा का जो संदेश दिया, छबील उसी भावना का प्रतीक है। प्यासे को पानी पिलाना और जरूरतमंद की सेवा करना सिख धर्म की महान परंपरा रही है।
त्याग और धैर्य की मिसाल हैं गुरु अर्जुन देव जी
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े रहने, सत्य के मार्ग पर चलने और मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस का परिचय देकर पूरी दुनिया को धार्मिक सहिष्णुता और बलिदान का अद्भुत संदेश दिया।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दी श्रद्धांजलि
इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान निर्मल सिंह, सचिव संतोष सिंह, मुख्तार सिंह, ज्ञान सिंह, मुलबुल, रीमा कौर, त्रिलोचन सिंह, निंदू, तोशी, राजे, रानी, ऋषि सिंह, बिट्टू, सन्नी सिंह, मनप्रीत, आयुषी, गुरमीत सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुरु अर्जुन देव जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सेवा, समर्पण और सद्भाव का संदेश
शहीदी दिवस का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में भाईचारा, सेवा और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी बना। गुरुद्वारा परिसर से लेकर छबील सेवा तक हर जगह श्रद्धा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने लोगों को गुरु अर्जुन देव जी के त्यागमय जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।














