10 सीएसआर गांवों की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने महाप्रबंधक को सौंपा मांगपत्र, रोजगार और प्रदूषण के मुद्दे पर फूटा गुस्सा
रिपोर्ट शैलेश सिंह |
सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के अध्यक्ष सह गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल के नेतृत्व में बुधवार (23 जुलाई) को 10 सीएसआर गांवों के मुंडा, मानकी एवं समिति के पदाधिकारियों ने सेल, मनोहरपुर अयस्क समूह (चिरिया) के महाप्रबंधक से मुलाकात कर मुख्य महाप्रबंधक के नाम मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि 15 दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।

लाल पानी और खनन मलबे से खेती तबाह होने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सेल चिरिया लौह अयस्क खदान से निकलने वाला लाल रंग का दूषित पानी, मिट्टी, मुरूम और पत्थर प्राकृतिक नदी-नालों में बहाए जा रहे हैं। इससे आसपास की कृषि भूमि बंजर होती जा रही है और किसानों की आजीविका पर संकट गहरा गया है।
बीमारियों और पलायन का मुद्दा भी उठाया
मांगपत्र में कहा गया कि दूषित पानी के उपयोग से ग्रामीणों, मवेशियों और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है तथा विभिन्न बीमारियां फैल रही हैं। वहीं, खदान के समीप रहने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने से उन्हें बेंगलुरु, गुजरात, तमिलनाडु, केरल, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पलायन करना पड़ रहा है, जहां वे शोषण का शिकार हो रहे हैं।
रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की प्रमुख मांग
समिति ने मांग की कि चिरिया सेल के 10 सीएसआर गांवों के बेरोजगार युवक-युवतियों को खतियान के आधार पर, संबंधित मुंडा या मानकी की अनुशंसा के बाद प्रत्येक गांव से पांच यानी कुल 50 लोगों को रोजगार दिया जाए।
इसके अलावा सभी 10 सीएसआर गांवों में चौक-चौराहों पर बिजली की व्यवस्था, डीएवी स्कूल में निःशुल्क शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तथा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
प्राइवेट मालवाहक वाहनों पर भी उठाए सवाल
मुखिया राजू सांडिल ने महाप्रबंधक से खदान में संचालित निजी मालवाहक वाहनों में किसी विशेष क्षेत्र के लोगों को प्राथमिकता दिए जाने के संबंध में भी सवाल उठाया। इस पर महाप्रबंधक ने ऐसे किसी भी प्रकार की अनिवार्यता या विशेष व्यवस्था से इनकार किया।
इन गांवों के प्रतिनिधि रहे शामिल
प्रतिनिधिमंडल में छोटानागरा, कुम्बिया, दुईया, सलाई, ममार, चिड़िया, हिनुआ, तीनसीमान, रोडुवा और चुर्गी गांव के मुंडा, मानकी एवं सारंडा विकास समिति के पदाधिकारी शामिल थे।

आंदोलन की चेतावनी
राजू सांडिल ने कहा कि यदि **15 दिनों के भीतर रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की होगी।














