फूलों से सजी पालकी, सड़कों की सेवा और संगत की भावभीनी विदाई ने बनाया माहौल आध्यात्मिक
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
वैसाखी पर्व के समापन के बाद किरीबुरू स्थित कलगीधर गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को पूरे सिख परंपरा और श्रद्धा के साथ जमशेदपुर के लिए रवाना किया गया।
फूलों से सजी पालकी में हुआ पावन स्वरूप का प्रस्थान

पावन स्वरूप को विशेष पालकी (वाहन) में सुसज्जित किया गया, जिसे आकर्षक फूलों से सजाया गया था। इस दौरान पूरा वातावरण गुरबाणी और “वाहेगुरु” के जयकारों से गूंज उठा।
सेवा भाव की मिसाल: सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव
विदाई से पूर्व श्रद्धालुओं ने सेवा भावना का अद्भुत परिचय दिया। गुरुद्वारा परिसर से लेकर शहर के मार्ग तक:
* टैंकर से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया
* महिलाओं द्वारा झाड़ू लगाकर रास्तों की साफ-सफाई की गई
* पूरे मार्ग को फूलों से पवित्र और स्वच्छ बनाया गया

यह दृश्य सिख धर्म की सेवा और समर्पण की भावना को जीवंत करता नजर आया।

श्रद्धालुओं की भावभीनी विदाई
संगत ने नम आंखों और गहरी आस्था के साथ पावन स्वरूप को विदाई दी। कई श्रद्धालु रास्ते भर साथ चलते रहे और हाथ जोड़कर नमन करते रहे।

आस्था और परंपरा का अनुपम उदाहरण
किरीबुरू से जमशेदपुर तक पावन स्वरूप की यह विदाई न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन थी, बल्कि यह सिख धर्म की सेवा, अनुशासन और श्रद्धा का जीवंत उदाहरण भी बन गई।
यह विदाई सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम थी।












