समय सीमा, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर; खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को मिली नई दिशा
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। जिला समाहरणालय सभागार में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) एवं अनावद्ध मद से संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक विलंब अथवा गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी सविता टोपनो सहित एनआरईपी, लघु सिंचाई, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, विशेष प्रमंडल तथा अन्य तकनीकी विभागों के कार्यपालक अभियंता उपस्थित थे।

पीएमकेकेकेवाई/डीएमएफटी गाइडलाइन के अनुसार ही होगी योजना स्वीकृति
समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) एवं डीएमएफटी की गाइडलाइन के अनुरूप ही योजनाओं का चयन एवं स्वीकृति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 60 से 80 प्रतिशत राशि व्यय की जाएगी, जबकि शेष योजनाओं का चयन भी निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि डीएमएफटी की मूल भावना खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसलिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अनावश्यक पुलिया और गार्डवाल निर्माण पर रोक का संकेत
बैठक में उपायुक्त ने तकनीकी विभागों और कार्यकारी एजेंसियों को साफ शब्दों में कहा कि योजनाओं को उपयोगी बनाने पर ध्यान दिया जाए। केवल प्राक्कलन बढ़ाने के उद्देश्य से अनावश्यक पुलिया, गार्डवाल अथवा अन्य अतिरिक्त संरचनाओं का प्रावधान नहीं किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हर योजना का औचित्य और उपयोगिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। जनहित से सीधे जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी और संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया में देरी पर जताई नाराजगी
उपायुक्त मनीष कुमार निविदा प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर भी नाराज दिखे। उन्होंने लंबित टेंडरों की समीक्षा करते हुए कहा कि योजनाओं की स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि योजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी। समय पर टेंडर निष्पादन और गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाली एजेंसियों को भविष्य में प्राथमिकता दिए जाने के संकेत भी उन्होंने दिए।
गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं, स्वयं करेंगे निरीक्षण
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर रहा। उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं की गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमएफटी योजनाओं में से 10 से 20 प्रतिशत योजनाओं का निरीक्षण वह स्वयं करेंगे। उप विकास आयुक्त भी नियमित निरीक्षण करेंगे। इससे कार्यस्थलों पर जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं के निष्पादन में पारदर्शिता आएगी।

जियो टैग फोटो और डिजिटल मॉनिटरिंग होगी अनिवार्य
उपायुक्त ने अभियंताओं को निर्देश दिया कि प्रत्येक योजना के प्रारंभ से लेकर पूर्णता तक सभी चरणों की जियो टैग आधारित फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए।
उन्होंने कहा कि कार्य प्रारंभ, प्रगति और पूर्णता के प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए। सूत्रों के अनुसार राशि विमुक्ति से पूर्व प्रत्येक सौ मीटर पर कम से कम तीन फोटो अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि कार्य की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
पेयजल योजनाओं पर विशेष फोकस
बैठक में पेयजलापूर्ति योजनाओं की विशेष समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़ी है, इसलिए इन योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने संबंधित विभागों को मॉडल एस्टीमेट के अनुरूप कार्य करने तथा गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। आने वाले समय में पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्रों में डीएमएफटी की अधिक राशि निवेश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
भौतिक निरीक्षण के बाद ही मिलेगी अंतिम स्वीकृति
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि किसी भी योजना को अंतिम स्वीकृति देने से पहले संबंधित स्थल का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रस्तावित योजना वास्तव में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप है या नहीं।
प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से अनुपयोगी योजनाओं पर रोक लगेगी तथा जनता की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन हो सकेगा।
डीएमएफटी सेल और तकनीकी विभाग हुए अलर्ट
सूत्रों के अनुसार उपायुक्त द्वारा गाइडलाइन आधारित योजना चयन, समयबद्ध निष्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण पर स्पष्ट रुख अपनाने के बाद डीएमएफटी सेल तथा तकनीकी विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं।
विभिन्न विभागों के अभियंता अब लंबित योजनाओं को गति देने, निविदा प्रक्रिया पूरी करने तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर संवेदकों पर सख्ती बरत रहे हैं।
45 दिन बाद तकनीकी विभागों के साथ पहली बड़ी समीक्षा
जिले में पदभार ग्रहण करने के बाद प्रशासनिक तंत्र, प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों को सक्रिय करने के लगभग 45 दिन बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने तकनीकी विभागों के साथ डीएमएफटी की पहली व्यापक समीक्षा बैठक की।
इस दौरान उन्होंने संचिकाओं के समय पर निष्पादन, विभागीय समन्वय और योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष बल दिया। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

जिले में दिखने लगा प्रशासनिक सक्रियता का असर
पश्चिमी सिंहभूम में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर मनीष कुमार की अलग पहचान बनती दिखाई दे रही है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड एवं अंचल स्तर तक अधिकारी-कर्मचारी अपने कार्यों के प्रति अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं।
आम लोगों का कहना है कि राजस्व, प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों और विकास योजनाओं के निष्पादन में पहले की तुलना में तेजी दिखाई दे रही है। वहीं तकनीकी विभागों में भी योजनाओं को समय पर पूरा करने की प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि आने वाले समय में डीएमएफटी निधि का उपयोग खनन प्रभावित गांवों के समग्र विकास के लिए किया जाएगा। पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में व्यापक निवेश की तैयारी है।
उपायुक्त का संदेश साफ है—डीएमएफटी की राशि जनता के कल्याण के लिए है और इसका उपयोग केवल नियमों, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ ही किया जाएगा। ऐसे में जिले में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है।














