नोआमुंडी और जगन्नाथपुर के नौ गांवों के बच्चों के लिए प्री-एडमिशन बैठक आयोजित, जमशेदपुर के कार्मेल बाल विहार में नामांकन की तैयारी तेज
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
पश्चिमी सिंहभूम के नोआमुंडी क्षेत्र में श्रवण बाधित बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की गई है। Tata Steel Foundation की नोआमुंडी इकाई ने कैंप स्कूल परिसर में पूर्व-प्रवेश (प्री-एडमिशन) बैठक आयोजित कर ऐसे बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, जो अब तक संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण पीछे छूट रहे थे।
इस बैठक में नोआमुंडी और जगन्नाथपुर प्रखंड के कुल नौ गांवों से चिन्हित श्रवण बाधित बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने भाग लिया। नोआमुंडी प्रखंड के कुटिंता, कुमिरता, पेटेता, लखनसाई, सरबिल, लेम्पाहेसा और बड़ाजामदा गांवों के साथ-साथ जगन्नाथपुर प्रखंड के पोखरिया और सियालजोड़ा गांवों से आए प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को सार्थक बनाया।

नामांकन प्रक्रिया की दी गई विस्तृत जानकारी
बैठक का मुख्य उद्देश्य 10 श्रवण बाधित बच्चों के जमशेदपुर स्थित Carmel Bal Vihar में प्रस्तावित नामांकन की प्रक्रिया से अभिभावकों को अवगत कराना था। विद्यालय की टीम ने प्रवेश प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, छात्रावास व्यवस्था, शैक्षणिक माहौल और बच्चों को मिलने वाली विशेष सुविधाओं की जानकारी विस्तारपूर्वक साझा की।
अभिभावकों की जिज्ञासाओं का समाधान
कार्यक्रम के दौरान सिस्टर अमिका और छाया दास ने प्रस्तुति के माध्यम से अभिभावकों को समझाया कि श्रवण बाधित बच्चों की शिक्षा के लिए किस प्रकार विशेष प्रशिक्षण, भाषा कौशल और समावेशी वातावरण जरूरी है। इस दौरान अभिभावकों ने बच्चों के भविष्य, पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक जवाब दिया गया।
दस्तावेजों की कमी बनी चुनौती
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ बच्चों के पास जन्म प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए संबंधित टीम ने यह निर्णय लिया कि दस्तावेज तैयार कराने में परिवारों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा ताकि प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
शिक्षा से भविष्य संवारने का संदेश
इस मौके पर टाटा स्टील नोआमुंडी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के अधिकारी उदय प्रकाश सिंह और टीएसएफ नोआमुंडी यूनिट लीड संदीप कुमार केसरवानी ने बच्चों और अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने की अपील की।
सांकेतिक भाषा से संवाद बना आसान
बैठक का संचालन टाटा स्टील फाउंडेशन के संतू दास ने किया, जबकि सुश्री कोनिका ने भारतीय सांकेतिक भाषा के माध्यम से पूरी चर्चा का प्रभावी अनुवाद किया। इससे श्रवण बाधित बच्चे बैठक की हर जानकारी को बेहतर ढंग से समझ सके और कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभा सके।

समावेशी शिक्षा की दिशा में मजबूत कदम
यह पहल केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक बड़ी कोशिश है, जो अक्सर अपनी शारीरिक चुनौतियों के कारण उपेक्षित रह जाते हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन की यह पहल समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में इन बच्चों का भविष्य नई उम्मीदों के साथ आकार ले सकेगा।














