सप्ताह में दो दिन ओपीडी चलाने, चार दिन कर्मियों की सेवा जगन्नाथपुर में लेने और एड्स जागरूकता अभियान चलाने की उठी मांग
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
जैतगढ़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता आमीर हिंदुस्तानी ने चिकित्सा प्रभारी जगन्नाथपुर डॉ. जोसेफ मेलगांडी से मुलाकात कर एक मांग पत्र सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने वर्षों से बिना डॉक्टर के संचालित हो रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैतगढ़ में कम से कम सप्ताह के दो दिन डॉक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित करने और नियमित ओपीडी सेवा शुरू करने की मांग की है।
आमीर हिंदुस्तानी ने कहा कि प्रस्तावित प्रखंड जैतगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में परेशान है। अस्पताल भवन तो बना हुआ है, लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण गरीब ग्रामीणों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अस्पताल में डॉक्टर को छोड़कर बाकी चिकित्सा कर्मी तैनात हैं और सरकार हर माह उन्हें वेतन दे रही है, तो फिर ग्रामीणों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जैतगढ़ क्षेत्र के गरीब और मजदूर वर्ग के लोग पूरी तरह निजी केमिस्ट दुकानों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि कोई दैनिक मजदूरी करने वाला व्यक्ति बीमार पड़ता है, तो उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक दयनीय हो जाती है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की उपलब्धता से गरीबों को राहत मिल सकती है।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि सप्ताह के चार दिन जैतगढ़ स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा कर्मियों की सेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगन्नाथपुर में ली जाए, ताकि उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग हो सके और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा सके।
आमीर हिंदुस्तानी ने क्षेत्र में एड्स जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की भी मांग उठाई। उन्होंने हाल ही में सदर अस्पताल चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एड्स संक्रमित ब्लड चढ़ाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि एड्स और अन्य गंभीर बीमारियों को लेकर गांव-गांव में बैनर, पोस्टर, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को सचेत किया जाए, ताकि समय रहते लोग सावधानी बरत सकें और बीमारी के खतरे को कम किया जा सके।
जैतगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की नियमित तैनाती हो जाए तो उन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मांग पर कितना गंभीर कदम उठाता है।













