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On: June 24, 2026 9:53 PM
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रिपोर्ट: शैलेश सिंह

पश्चिमी सिंहभूम जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 24 जून बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। सदर अस्पताल, चाईबासा स्थित ब्लड बैंक को करीब 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार लाइसेंस मिल गया। यह लाइसेंस 23 जून 2031 तक वैध रहेगा। इस उपलब्धि को जिले के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे हजारों मरीजों और उनके परिजनों को अब राहत मिलने की उम्मीद है।

अब नहीं भटकेंगे मरीजों के परिजन

अब तक जिले में रक्त की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई थी। दुर्घटना, प्रसव, ऑपरेशन और गंभीर बीमारियों के दौरान मरीजों के परिजनों को रक्त की व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था। कई बार उन्हें जमशेदपुर, रांची या ओडिशा के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब चाईबासा में ही लाइसेंस प्राप्त ब्लड बैंक के संचालन से इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकेगा।

संतोष पांडा बोले— यह सिर्फ लाइसेंस नहीं, हजारों जिंदगियों की सुरक्षा कवच

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसिद्ध समाजसेवी Santosh Panda और रक्त सेवा सदस्य ग्रुप के संस्थापक संतोष पांडा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का मामला नहीं है, बल्कि जिले के हजारों जरूरतमंद मरीजों के जीवन की सुरक्षा का मजबूत आधार है।
उन्होंने कहा—
“रक्त की जरूरत किसी भी वक्त पड़ सकती है। ऐसे में समय पर सुरक्षित रक्त उपलब्ध होना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। चाईबासा ब्लड बैंक को लाइसेंस मिलना जिले के लिए बड़ी राहत है।”

भारतीय मानकों के अनुरूप होगा रक्त संग्रहण और वितरण

ब्लड बैंक को लाइसेंस मिलने के बाद अब यहां रक्त संग्रहण, स्क्रीनिंग, स्टोरेज और वितरण भारतीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार किया जा सकेगा। इससे संक्रमित रक्त के खतरे में कमी आएगी और मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:
* सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल रक्त मिलेगा
* प्रसूति के दौरान मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी
* थैलेसीमिया और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को नियमित रक्त मिल सकेगा
बड़े ऑपरेशन में इलाज की प्रक्रिया आसान होगी

प्रशासनिक प्रयासों की सराहना

संतोष पांडा ने इस सफलता का श्रेय पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार और सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी को दिया। उन्होंने कहा कि जिले में रक्तदान जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में प्रशासन का प्रयास सराहनीय है।
विशेष रूप से उपायुक्त मनीष कुमार द्वारा चलाए गए रक्तदान जागरूकता अभियानों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से यह सफलता संभव हो सकी।

90 हजार युवाओं का बना है रक्त सेवा नेटवर्क

संतोष पांडा ने बताया कि उन्होंने झारखंड और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में रक्तदान को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया है। उनके नेतृत्व में 16 प्रखंडों में 16 रक्त सेवा सदस्य ग्रुप गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 90,000 युवा सदस्य जुड़े हैं।
यह नेटवर्क जरूरतमंद मरीजों के लिए सीधे रक्तदान कर मानव सेवा का बड़ा उदाहरण बन चुका है।

रक्तदान महादान: जनता से अपील

संतोष पांडा ने जिलेवासियों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा—
“एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। रक्तदान केवल दान नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।”

स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

चाईबासा ब्लड बैंक को लाइसेंस मिलने से न केवल पश्चिमी सिंहभूम बल्कि आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के मरीजों को भी फायदा मिलेगा। यह कदम जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
अब उम्मीद यही है कि ब्लड बैंक सिर्फ लाइसेंस तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित और प्रभावी संचालन के जरिए हर जरूरतमंद तक समय पर रक्त पहुंचाए।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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