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दुबिल माइंस पर दूसरे दिन भी ग्रामीणों का कब्जा, उत्पादन पूरी तरह ठप

On: June 27, 2026 2:51 PM
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वार्ता के लिए गेट पर डटे ग्रामीण, प्रबंधन ने बुलाया ऑफिस तो आंदोलनकारियों ने ठुकराया; बारिश, भूख और जंगल में रात काटकर भी नहीं टूटा हौसला

रिपोर्ट: शैलेश सिंह

जल-जंगल-जमीन और अस्तित्व की लड़ाई अब खुली टक्कर में बदल चुकी है। ग्राम सभा दुबिल के बैनर तले “हातु-आबुआ राज, ग्राम स्वराज अभियान” के तहत सेल की चिड़िया-दुबिल माइंस के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन शनिवार 27 जून को दूसरे दिन भी पूरे उग्र तेवर में जारी रहा। भारी बारिश, कीचड़ और कठिन हालात के बावजूद ग्रामीण आंदोलन स्थल पर जमे रहे और खदान का उत्पादन व लौह अयस्क ढुलाई पूरी तरह बाधित रही।
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी चार सूत्री मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

प्रबंधन ने ऑफिस बुलाया, ग्रामीणों ने कहा- अब वार्ता यहीं होगी

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दुलाल आइंद ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे चिड़िया खदान के सहायक महाप्रबंधक रवि रंजन आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि प्रबंधन के कॉन्फ्रेंस हॉल में चलकर वार्ता की जाए।
लेकिन ग्रामीणों ने यह प्रस्ताव सीधे ठुकरा दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन शुरू होने से पहले वे खुद कई बार प्रबंधन कार्यालय वार्ता के लिए पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने प्रबंधन के आदेश पर उन्हें अंदर तक नहीं जाने दिया। ऐसे में अब भरोसे का संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा—
“जब हमारी बात सुननी थी तब दफ्तर का दरवाजा बंद था, अब वार्ता होगी तो जनता के बीच, आंदोलन स्थल पर ही होगी।”

बारिश बनी परीक्षा, प्लास्टिक तंबू में गुजरी रात

शुक्रवार दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच आंदोलनकारियों ने प्लास्टिक का अस्थायी तंबू लगाकर जंगल में ही रात बिताई। वहीं भोजन बनाया, खाया और पूरी रात पहरा देते रहे।
महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी इस आंदोलन में डटे हुए हैं। यह दृश्य बता रहा है कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है।

“सबसे ज्यादा प्रभावित हमारा गांव, लेकिन रोजगार शून्य”

ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को साफ बताया कि इस खदान का सबसे ज्यादा असर दुबिल गांव पर पड़ा है। खेती बर्बाद हुई, जलस्रोत लाल पानी से प्रदूषित हुए, हवा में धूल फैली, लेकिन बदले में गांव के एक भी युवक या युवती को रोजगार नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सेल प्रबंधन गांव की जमीन से करोड़ों का लौह अयस्क निकाल रहा है, लेकिन गांव को सिर्फ बीमारी, बेरोजगारी और उपेक्षा मिली।

सरना और कब्रिस्तान पर कब्जे का आरोप

दुलाल आइंद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि माइंस विस्तार के नाम पर गांव के सरना स्थल, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर अवैध तरीके से पिलर गाड़ दिए गए हैं। इसे ग्रामीण अपनी परंपरा, संस्कृति और धार्मिक आस्था पर हमला मान रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता का सवाल है।

पुलिस पहुंची, स्थिति का लिया जायजा

26 जून को पुलिस पदाधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचे थे और स्थिति का जायजा लिया था। पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत की, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
दूसरे दिन भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है, लेकिन प्रबंधन की चुप्पी आंदोलन को और भड़का रही है।

चार मांगों पर अड़े ग्रामीण

ग्रामसभा ने अपनी मांगों को फिर दोहराया—
* दुबिल गांव के 200 बेरोजगार युवाओं को खतियान आधारित प्राथमिकता के साथ रोजगार मिले
* अधिग्रहित जमीन का उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को नौकरी दी जाए
* सरना, कब्रिस्तान और रैयती जमीन पर गाड़े गए अवैध पिलर हटाए जाएं
* गांव में चार नए चापाकल और आठ जलमीनार लगाए जाएं

“अब वादा नहीं, हक चाहिए”

ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, अधिकार चाहिए। उनका साफ संदेश है कि यदि प्रबंधन ने मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन और व्यापक होगा।
दुबिल की पहाड़ियों में गूंज रहे नारे अब सिर्फ विरोध नहीं, चेतावनी बन चुके हैं—
“हातु-आबुआ राज, हमारा गांव हमारा राज!”
और यही नारा अब सेल प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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सिंहभूम हलचल न्यूज़ एक स्थानीय समाचार मंच है, जो पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड से सटीक और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए समर्पित है। यह राजनीति, अपराध, मौसम, संस्कृति और सामुदायिक मुद्दों को हिंदी में कवर करता है।

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