बायोमेट्रिक व्यवस्था के विरोध में किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों में कामकाज लगभग 6 घंटे से निरंतर प्रभावित
रिपोर्ट : शैलेश सिंह
लगभग 30-40 वर्षों बाद पहली बार ऐसा देखने को मिला है जब बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी बनाना अनिवार्य किए जाने के विरोध में सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों की सभी प्रमुख यूनियनें एक मंच पर आ गई हैं। संयुक्त मोर्चा अथवा संयुक्त यूनियन के बैनर तले 15 जून की पहली पाली से चारों खदानों के अधिकांश श्रमिकों ने बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी दर्ज नहीं कराई, जिससे खदानों में एक प्रकार की अघोषित हड़ताल की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कुछ श्रमिकों के काम पर जाने की चर्चा, यूनियनों ने दिखाई सख्ती
हालांकि यह भी खबरें सामने आ रही हैं कि संयुक्त मोर्चा के आह्वान के बावजूद कुछ श्रमिकों ने बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी बनाकर काम किया है। ऐसे श्रमिकों की संख्या कम बताई जा रही है, लेकिन उनकी स्पष्ट जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
इस सूचना के बाद मेघाहातुबुरु संयुक्त यूनियन की एक विशेष बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि यदि कोई श्रमिक आंदोलन के साथ विश्वासघात करता पाया गया तो जिस यूनियन का वह सदस्य होगा, वह यूनियन उसे अपने संगठन से बाहर करेगी। साथ ही उसके सामाजिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी भाग नहीं लेने का फैसला किया गया है।
श्रमिकों के सवालों का जवाब नहीं मिलने से बढ़ा असमंजस
आंदोलन में शामिल संतोष कुमार पांडा, कोषाध्यक्ष, ऑल इंडिया स्टील फेडरेशन (भारतीय मजदूर संघ) ने कहा कि बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने से पहले कई महत्वपूर्ण सवालों का समाधान होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मेडिकल अवकाश और अन्य छुट्टियों का समायोजन कैसे होगा, देर से आने वाले कर्मचारियों की हाजिरी कैसे बनेगी, रविवार की ड्यूटी का रिकॉर्ड किस प्रकार रखा जाएगा और अतिरिक्त भुगतान कैसे मिलेगा। इसके अलावा ओवरटाइम ड्यूटी की गणना और भुगतान की व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि मुख्य प्रवेश द्वार पर सेंट्रल टाइम ऑफिस की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा यूनियनों की कई लंबित मांगें भी वर्षों से लंबित हैं। इस विषय पर प्रबंधन के साथ दो दौर की बैठक हो चुकी है, जिसमें अधिकारियों ने उच्च स्तर पर विचार-विमर्श कर समाधान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसी कारण श्रमिकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

चारों खदानों के अधिकांश श्रमिक आंदोलन में शामिल
जानकारी के अनुसार मेघाहातुबुरु खदान में 343 स्थायी श्रमिक, किरीबुरू में 379, गुवा में 330 तथा चिड़िया खदान में 38 स्थायी श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें से कुछ को छोड़कर पहली पाली के अधिकांश श्रमिकों ने बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध करते हुए टाइम ऑफिस के पास धरना दे रखा है।
मेघाहातुबुरु और किरीबुरू में आंदोलनरत श्रमिकों ने दिनभर धरनास्थल पर डटे रहने के साथ सामूहिक रूप से खिचड़ी बनाने की तैयारी भी की, जिससे उनके लंबे आंदोलन की रणनीति के संकेत मिल रहे हैं।
सहायक श्रमायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
सूत्रों के अनुसार आंदोलनरत यूनियनों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दूरभाष के माध्यम से सहायक श्रमायुक्त को दी है। बताया जा रहा है कि सहायक श्रमायुक्त ने सेल प्रबंधन के अधिकारियों से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की पहल कर सकते है।
पुलिस प्रशासन भी स्थिति पर रखे हुए है नजर
दूसरी ओर किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार लगातार आंदोलन स्थलों का दौरा कर विधि-व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और दोनों पक्ष आपसी संवाद से समाधान निकालें।
उत्पादन और मजदूरों के हित दोनों पर टिकी निगाहें
वर्तमान स्थिति में सभी की निगाहें प्रबंधन और यूनियनों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं। एक ओर खदानों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है तो दूसरी ओर श्रमिकों को “नो वर्क, नो पे” जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में श्रमिक, प्रशासन और आमजन सभी चाहते हैं कि बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर उत्पन्न विवाद का शीघ्र समाधान निकले और खदानों में सामान्य कार्य व्यवस्था पुनः बहाल हो सके।










