कार्ड पंचिंग व्यवस्था बहाल करने की मांग पर अड़े श्रमिक संगठन, माइनिंग ऑपरेशन प्रभावित
रिपोर्ट शैलेश सिंह
सेल की किरीबुरू, मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदानों में बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था को लेकर जारी विवाद समाप्त नहीं हो सका। इस मुद्दे पर केटीआई सभागार में दो चरणों में चली प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल रहने के बाद संयुक्त यूनियन के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकलने का निर्णय लिया।
बैठक में किरीबुरू के सीजीएम पी. एम. शिरपुरकर, सीजीएम (एचआर, जेजीओएम) धीरेन्द्र मिश्रा, मेघाहातुबुरु के महाप्रबंधक प्रभारी संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक अमित कुमार विश्वास, सहायक महाप्रबंधक आलोक वर्मा, थाना प्रभारी रोहित कुमार सहित संयुक्त यूनियन के दर्जनों प्रतिनिधि उपस्थित थे।

यूनियन की मांग : कोर्ट के निर्णय तक स्थगित हो बायोमेट्रिक व्यवस्था
संयुक्त यूनियन के प्रतिनिधियों ने बैठक के बाद बताया कि सभी श्रमिक संगठनों की ओर से एकमत होकर प्रबंधन से कहा गया कि न्यायालय का सम्मान करते हुए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अदालत के अंतिम आदेश के बाद ही लागू किया जाए। वैकल्पिक रूप से, इस संबंध में जारी आदेश को फिलहाल वापस लिया जाए और एक-दो दिन बाद विस्तृत वार्ता कर कर्मचारियों को इस नई व्यवस्था के लाभ बताए जाएं तथा उनकी शंकाओं का समाधान किया जाए।
यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर किए बिना नई व्यवस्था लागू करना उचित नहीं होगा।
प्रबंधन अपने निर्णय पर कायम
सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन ने बैठक में बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था को नियमित रूप से जारी रखने की बात दोहराई। साथ ही यह भी कहा कि यूनियनों की जो भी शंकाएं हैं, उन्हें बाद में आपसी बातचीत के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
हालांकि इस प्रस्ताव से संयुक्त यूनियन सहमत नहीं हुई और प्रतिनिधियों ने बैठक छोड़ दी।
द्वितीय और तृतीय पाली के श्रमिकों का रुख स्पष्ट
बैठक के बाद द्वितीय पाली के श्रमिक अपने-अपने खदानों के टाइम ऑफिस पहुंचे। श्रमिकों का कहना है कि वे पारंपरिक कार्ड पंचिंग व्यवस्था के तहत ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यस्थल जाएंगे और बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी नहीं बनाएंगे। यूनियन का दावा है कि इसी प्रकार का रुख तृतीय पाली के श्रमिक भी अपनाएंगे।
माइनिंग ऑपरेशन प्रभावित, डिस्पैच जारी
दूसरी ओर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किरीबुरू, मेघाहातुबुरु और गुवा खदानों में ठेका एजेंसियों के माध्यम से रैक लोडिंग एवं लौह अयस्क डिस्पैच का कार्य जारी है। वहीं माइनिंग ऑपरेशन तथा प्लांट से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
यूनियन का दावा : यह हड़ताल नहीं, अधिकारों का विवाद
संयुक्त यूनियन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति को हड़ताल नहीं माना जाना चाहिए। यूनियन नेताओं के अनुसार यह मामला बायोमेट्रिक बनाम कार्ड पंचिंग व्यवस्था को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच उत्पन्न विवाद का है, जो पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। उनका कहना है कि श्रमिक केवल अपनी पूर्व व्यवस्था के तहत उपस्थिति दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं और न्यायालय के निर्णय का इंतजार चाहते हैं।
अब अगली वार्ता पर टिकी निगाहें
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद खदान क्षेत्रों में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती है तो उत्पादन और खनन कार्यों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं श्रमिक संगठन भी अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।














